Satya Report: आज के दौर में 1 करोड़ रुपये को रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फंड माना जाता है. कई लोग इसे फाइनेंशियल फ्रीडम का लक्ष्य समझकर बचत करते हैं. लेकिन बदलते आर्थिक माहौल में यह सोच अधूरी हो सकती है. महंगाई समय के साथ पैसे की असली कीमत को कम करती रहती है. ऐसे में जो रकम आज बड़ी लगती है, वही भविष्य में छोटी साबित हो सकती है. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आप कितना जोड़ते हैं, बल्कि यह भी है कि उस पैसे की भविष्य में खरीदने की क्षमता कितनी बचेगी. भारत में लंबे समय से 1 करोड़ रुपये को रिटायरमेंट के लिए एक सुरक्षित और पर्याप्त फंड माना जाता रहा है. लेकिन यह धारणा अब बदलने की जरूरत है. महंगाई लगातार पैसे की वैल्यू को कम कर रही है, जिससे भविष्य में इस रकम की असली ताकत काफी घट सकती है.

अगर हम औसतन 5-6% महंगाई दर मानें, तो अगले 20 साल में 1 करोड़ रुपये की खरीदने की क्षमता करीब आधी या उससे भी कम रह सकती है. यानी आज जो लाइफस्टाइल आप 1 करोड़ रुपये से बनाए रख सकते हैं, वही 2046 में बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. इसका सीधा असर आपकी रिटायरमेंट क्वालिटी पर पड़ेगा. रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी गलती यही होती है कि लोग सिर्फ रकम पर फोकस करते हैं, उसकी भविष्य की वैल्यू पर नहीं. असल में रिटायरमेंट एक लंबी अवधि होती है, जो 25-30 साल तक चल सकती है. इस दौरान खर्च लगातार बढ़ते रहते हैं.
कितनी रह जाएगी वैल्यू
अगर आज आप 1 करोड़ को एक बड़ी रकम मानते हैं, तो ज़रूरी है समझना कि समय के साथ इसकी असली कीमत घटती जाती है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) महंगाई दर (CPI) को आमतौर पर 2% से 6% के बीच रखने की कोशिश करता है.
इसी दायरे को आधार मानकर अगर हम अगले 20 साल यानी 2046 तक का अनुमान लगाएं, तो ₹1 करोड़ की खरीदने की ताकत काफी कम हो सकती है. आसान शब्दों में कहें तो आज के ₹1 करोड़ से आप जो चीजें खरीद सकते हैं, 2046 में उसी के लिए आपको कहीं ज्यादा पैसे की जरूरत पड़ेगी.
| महंगाई दर | 2046 में ₹1 करोड़ की वैल्यू |
आज के हिसाब से इसका मतलब
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| 5% | ~ ₹37-40 लाख | मध्यम गिरावट |
| 6% | ~ ₹31-32 लाख |
काफी ज्यादा गिरावट
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| 7% | ~ ₹25-26 लाख |
खरीदने की ताकत में तेज गिरावट
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Source- मिंट
Note- ये अनुमान के हिसाब है. मूल डेटा में बदलाव हो सकता है.
खासतौर पर हेल्थकेयर खर्च तेजी से बढ़ रहा है, जो बुजुर्ग अवस्था में सबसे बड़ा खर्च बन सकता है. इसके अलावा शहरों में रहने की लागत, लाइफस्टाइल खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें भी महंगी होती जा रही हैं. लंबी उम्र के कारण ज्यादा समय तक पैसे की जरूरत पड़ती है, जिससे फंड जल्दी खत्म होने का खतरा रहता है. इतना ही नहीं, बच्चों की पढ़ाई, शादी या अचानक आने वाली मेडिकल इमरजेंसी जैसे खर्च भी आपकी सेविंग्स पर दबाव डाल सकते हैं. अगर इन सभी फैक्टर्स को नजरअंदाज किया गया, तो 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य आपको झूठी सुरक्षा का एहसास दे सकता है. इसलिए जरूरी है कि रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय महंगाई को ध्यान में रखते हुए बड़ा और यथार्थवादी लक्ष्य तय किया जाए.
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