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जंग के पीछे शेयर बाजार के धंधे के मिले सबूत! ट्रंप के सीजफायर ऐलान से ठीक पहले हुआ खेल और चंद मिनटों में कमाए करोड़ों

Satya Report: ऐसा माना जा रहा था कि ईरान वॉर और सीजफायर की खबरों से बाजार में हेरा फेरी कर मोटा पैसा बनाया जा रहा है. अब रायटर्स की एक रिपोर्ट ने इन कयासों को और बढ़ा दिया है. रिपोर्ट में बाताया गया है कि सीजफायर के ऐलान से ठीक पहले कैसे कच्चे तेल का खेल किया गया और महज 2 मिनट में ही करीब 430 मिलियन डॉलर F&O मार्केट से छाप दिए गए.

जंग के पीछे शेयर बाजार के धंधे के मिले सबूत! ट्रंप के सीजफायर ऐलान से ठीक पहले हुआ खेल और चंद मिनटों में कमाए करोड़ों
जंग के पीछे शेयर बाजार के धंधे के मिले सबूत! ट्रंप के सीजफायर ऐलान से ठीक पहले हुआ खेल और चंद मिनटों में कमाए करोड़ों

ये तो हुई एक दिन की बात. वहीं, अगर बात पूरे अप्रैल की करें तो करीब 20 दिनों में मार्केट को मैन्युपुलेट करके करीब 2.1 बिलियन डॉलर की हेरा फेरी कर दी गई. सीजफायर के ऐलान से ठीक पहले क्रूड ऑयल के 4260 लॉट एक झटके में बेच दिए गए, जिससे एक ही झटके में कच्चे तेल की कीमतें 15 फीसदी तक लुढक गईं और इस गिरावट से करीब 430 मिलियन डॉलर की कमाई कर ली गई.

पहले कमाए पैसे, फिर हो गया सीजफायर!

मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने से ठीक 15 मिनट पहले कि वह ईरान के साथ संघर्ष विराम को आगे बढ़ाएंगे, ट्रेडर्स ने कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट पर $430 मिलियन के दांव लगाए. इस महीने यह तीसरी बार है और कुल मिलाकर चौथी बार, जब ईरान युद्ध से जुड़ी बड़ी घोषणाओं से ठीक पहले तेल की कीमतों पर बड़े और सही समय पर लगाए गए दांव सामने आए हैं. मार्च में एक संयुक्त दांव $500 मिलियन का था, जबकि अप्रैल के दांवों का कुल मूल्य लगभग $2.1 बिलियन रहा.

LSEG के आंकड़ों के अनुसार, 1954 से 1956 GMT के बीच करीब 4,260 लॉट ब्रेंट क्रूड ऑयल एक साथ बेचे गए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 430 मिलियन डॉलर थी. यह सौदा ऐसे समय में हुआ जब बाजार बंद होने के बाद कम वॉल्यूम में ट्रेडिंग होती है, जिससे कीमतों पर इसका असर ज्यादा दिखता है. उस वक्त तेल की कीमत लगभग 100.91 डॉलर प्रति बैरल थी, जो थोड़ी गिरकर 100.66 डॉलर पर आ गई. इसके कुछ ही मिनट बाद, 2010 GMT पर ट्रंप ने सीजफायर बढ़ाने का ऐलान किया, जिसके बाद तेल की कीमत तेजी से गिरकर 96.83 डॉलर तक पहुंच गई. इस गिरावट से पहले लगाए गए दांव ने ट्रेडर्स को भारी मुनाफा दिलाया.

पहले भी हुआ खेल

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. मार्च और अप्रैल के दौरान इस तरह के कई बड़े दांव देखे गए. 23 मार्च को ट्रंप की संभावित सैन्य कार्रवाई टालने की घोषणा से पहले करीब 500 मिलियन डॉलर का दांव लगाया गया था. वहीं, 7 अप्रैल को सीजफायर की घोषणा से पहले 950 मिलियन डॉलर और 17 अप्रैल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी खबर से पहले 760 मिलियन डॉलर के दांव लगाए गए.

कुल मिलाकर अप्रैल में ही ऐसे सौदों की वैल्यू 2.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जिससे यह संदेह गहराता है कि बाजार में इनसाइड जानकारी के आधार पर ट्रेडिंग की जा रही है. इस पूरे मामले में अमेरिकी एजेंसियां जांच भी कर रही हैं. हालांकि, अभी तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर बाजार में हेरफेर की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जिस तरह से अहम घोषणाओं से पहले सटीक दांव लगाए गए, उसने बाजार की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अगर यह साबित होता है कि इनसाइडर जानकारी का दुरुपयोग हुआ है, तो यह वैश्विक कमोडिटी बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. .

contact.satyareport@gmail.com

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