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Jewellery Insurance: गहनों का भी होता है बीमा मामूली खर्च में सुरक्षित हो जाएगा आपका सोना!

Satya Report: भारत में सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि परिवारों की पीढ़ियों की जमापूंजी और सामाजिक सुरक्षा का प्रतीक है. लेकिन आज जब सोने की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं और 10 ग्राम सोने का भाव ₹1.5 लाख के करीब पहुंच गया है, तो यही बेशकीमती सोना अब सुरक्षा की एक बड़ी चिंता भी बन गया है. बढ़ती कीमतों के साथ ज्वेलरी से जुड़ा जोखिम भी कई गुना बढ़ गया है. चौंकाने वाली बात यह है कि देश में लोग सोना तो लगातार खरीद रहे हैं, लेकिन उसकी सुरक्षा के लिए ‘बीमा’ यानी इंश्योरेंस लेने की तरफ अब भी ध्यान नहीं दे रहे. यही लापरवाही ग्राहकों और ज्वेलर्स, दोनों को चोरी और नुकसान जैसे बड़े आर्थिक जोखिमों के प्रति असुरक्षित बना रही है.

Jewellery Insurance: गहनों का भी होता है बीमा मामूली खर्च में सुरक्षित हो जाएगा आपका सोना!
Jewellery Insurance: गहनों का भी होता है बीमा मामूली खर्च में सुरक्षित हो जाएगा आपका सोना!

महंगे सोने के साथ बढ़ गई है सेंधमारी की चुनौती

जब घर में रखी ज्वेलरी की वैल्यू लाखोंकरोड़ों में पहुंच जाती है, तो चोरी और सेंधमारी का खतरा भी बढ़ जाता है. आज के दौर में घर की तिजोरी या अलमारी में सोना रखना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा जोखिम भरा हो गया है. केवल आम ग्राहक ही नहीं, बल्कि ज्वेलरी कारोबारियों के लिए भी चुनौतियां बढ़ी हैं. उनका स्टॉक अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा है, जिसे स्टोर करने, ग्राहकों को दिखाने और एक शहर से दूसरे शहर भेजने के दौरान हर वक्त लूट या नुकसान का डर बना रहता है. इस बढ़ते जोखिम के बावजूद लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं.

एक चूक और डूब सकती है पूरी कमाई

मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो टियर2 और टियर3 शहरों के छोटे और मध्यम स्तर के ज्वेलर्स इस वक्त सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं. इन व्यापारियों के पास या तो पर्याप्त इंश्योरेंस कवर नहीं है या फिर वे पूरी तरह अनइंश्योर्ड हैं. यही स्थिति उन कारीगरों, ट्रेडर्स और एक्सपोर्टर्स की भी है, जिनके हाथों से रोजाना करोड़ों की ज्वेलरी गुजरती है. भारत में ज्वेलरी इंडस्ट्री की कुल वैल्यू करीब ₹4.7 लाख करोड़ है, लेकिन इसके मुकाबले ज्वेलरी इंश्योरेंस मार्केट का आकार महज ₹250500 करोड़ ही है. यह आंकड़ा डराने वाला है क्योंकि यह दर्शाता है कि इतनी बड़ी इंडस्ट्री का एक बहुत छोटा हिस्सा ही बीमा के सुरक्षा कवच में है. लोग आज भी इंश्योरेंस प्रीमियम को सुरक्षा के बजाय एक ‘अतिरिक्त खर्च’ के रूप में देखते हैं, जो एक बड़ी भूल साबित हो सकती है.

ज्वेलरी इंश्योरेंस में आखिर मिलता क्याक्या है?

ज्वेलर्स के लिए बाजार में ‘ज्वेलर्स ब्लॉक इंश्योरेंस’ जैसी विशेष पॉलिसियां मौजूद हैं, जो इस कारोबार की बारीकियों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं. इसमें न केवल चोरी, सेंधमारी और लूट जैसे सामान्य खतरे कवर होते हैं, बल्कि आग लगने या किसी प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई भी की जाती है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी को भी शामिल किया जाता है, जिसे अक्सर कारोबारी नजरअंदाज कर देते हैं. इसके अलावा, ट्रांजिट इंश्योरेंस के जरिए माल को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान होने वाली अनहोनी से भी सुरक्षा मिलती है.

ग्राहकों के लिए क्यों जरूरी है यह सुरक्षा कवच?

ज्वेलरी सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि उसकी भावनाओं से जुड़ी होती है. सोने की मौजूदा कीमतों को देखते हुए, अगर भगवान न करे कभी कोई अनहोनी हो जाए या ज्वेलरी चोरी हो जाए, तो उसे दोबारा खरीदना आज के मध्यम वर्ग के लिए बहुत कठिन हो सकता है. ज्वेलरी इंश्योरेंस पॉलिसी चोरी और दुर्घटना में हुए नुकसान के दौरान एक वित्तीय ढाल की तरह काम करती है. यह सुनिश्चित करती है कि नुकसान का पूरा बोझ आपकी जेब पर न पड़े. जिस तरह हम अपनी कार या स्वास्थ्य का बीमा कराते हैं, उसी तरह अब समय आ गया है कि ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम वाले इस कीमती एसेट को भी बीमा की सुरक्षा दी जाए.

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