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37 साल की ये महिला अब संभालेंगी 60 हजार करोड़ की कंपनी, अभी करती हैं ये काम

भारत की सक्सेजफुल बिजनेस वुमन किरण मजूमदारशॉ ने अपना उत्तराधिकारी चुन लिया है. फार्मा सेक्टर की बड़ी कंपनी Biocon की मालकिन ने 73 साल की उम्र में अपनी भतीजी क्लेयर मजूमदार को अपना सक्सेसर तय किया है. 73 वर्षीय मजूमदारशॉ ने Fortune India को बताया कि उन्होंने अपनी भतीजी को उस कंपनी की फ्यूचर लीडर के रूप में चुना है, जिसकी शुरुआत उन्होंने चार दशक से भी पहले की थी. बायोकॉन का मार्केट कैप अभी करीब 60 हजार करोड़ रुपये का है.

37 साल की ये महिला अब संभालेंगी 60 हजार करोड़ की कंपनी, अभी करती हैं ये काम
37 साल की ये महिला अब संभालेंगी 60 हजार करोड़ की कंपनी, अभी करती हैं ये काम

किरण ने कहा कि मैंने अपनी भतीजी क्लेयर को अपनी उत्तराधिकारी के रूप में देखा है, क्योंकि मुझे लगता है कि उसने मुझे यह प्रूव कर दिया है कि वह एक कंपनी चला सकती है. उत्तराधिकारी चुने जाने के बाद क्लेयर एकाएक सुर्खियों में आ गई. लोग उनके बारे में सर्च करने लगे. लेकिन क्या आपको पता है कि किरण की 37 साल की उनकी भतीजी भी बिजनेस से जुड़ी हुई है. वह 1.6 बिलियन डॉलर यानी करीब 15 हजार करोड़ की एक कंपनी की मालिकन हैं. यानी अब वह अमेरिका की 15 हजार करोड़ की कंपनी के साथसाथ भारत की 60 हजार करोड़ रुपये की कंपनी की कमान संभालेंगी. आइए आपको इस खबर में क्लेयर के बारे में डिटेल में बताते हैं. उनके बिजनेस से लेकर एजुकेशनल बैकग्राउंड को समझते हैं.

किरण मजूमदारशॉ ने संकेत दिया कि यह बदलाव धीरेधीरे होगा. उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा कि वह अभी कुछ समय तक काम छोड़ना नहीं चाहतीं और क्लेयर समय के साथ धीरेधीरे मेरी भूमिका संभालेगी. यह इस बात का संकेत है कि उत्तराधिकार की प्लानिंग भले ही शुरू हो गई हो, लेकिन लीडरशिप में कंटिन्यूटी बनी रहेगी.

बिजनेस में आगे हैं क्लेयर

37 साल की क्लेयर मजूमदार एक शानदार बिजनेस वुमन हैं. वह Bikara Therapeutics की फाउंडर CEO हैं. यह अमेरिका में स्थित एक ऐसी कंपनी है जिसे बायोकॉन ने शुरू किया था और जो कैंसर के नए इलाज पर फोकस करती है. उनके लीडरशिप में, कंपनी 2024 में NASDAQ पर लिस्ट हुई और तब से इसका मार्केट वैल्यू बढ़कर $1.6 बिलियन से ज्यादा हो गया है, जबकि इसका मेन इलाज अभी भी क्लिनिकल ट्रायल में है.

उनके करियर में वेंचर कैपिटल और दवा डेवलपमेंट दोनों शामिल हैं. उन्होंने पहले Third Rock Ventures में काम किया, जहां उन्होंने कंपनी बनाने और स्ट्रैटेजी बनाने पर फोकस किया और फिर Rheos Medicines में काम किया, जहां उन्होंने बिजनेस ग्रोथ में मदद की, जिसमें Roche के साथ एक अहम पार्टनरशिप भी शामिल थी.

क्लेयर का एजुकेशनल बैकग्राउंड

पढ़ाईलिखाई के मामले में भी उनकी उपलब्धियां उतनी ही शानदार हैं. उनके पास मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग की डिग्री, स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से MBA और स्टैनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन से कैंसर बायोलॉजी में PhD की डिग्री है. ट्यूमर इम्यूनोलॉजी और कैंसर एपिजेनेटिक्स पर उनका रिसर्च नेचर और Cell Stem Cell जैसे जानेमाने जर्नल्स में पब्लिश हुआ है.

अपनी शानदार बैकग्राउंड के बावजूद, क्लेयर मजूमदार ज्यादातर पब्लिक सुर्खियों से दूर ही रही हैं जो उनकी बुआ के बिल्कुल उलट है. उनकी बुआ ने ही बायोकॉन को भारत की सबसे बड़ी बायोटेक कंपनी और ग्लोबल लेवल पर बायोसिमिलर दवाओं की एक बड़ी कंपनी बनाया था. मजूमदारशॉ ने संकेत दिया है कि क्लेयर को फैमिली और प्रोफेशनल लीडर्स के एक बड़े इकोसिस्टम का सपोर्ट मिलेगा. इसमें उनके भाई एरिक मजूमदार शामिल हैं, जो California Institute of Technology में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक्सपर्ट हैं, और उनके पति थॉमस रॉबर्ट्स, जो Massachusetts General Hospital में हैं.

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