KenBetwa Project News: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में केनबेतवा लिंक परियोजना और रुंझ परियोजना से विस्थापित हो रहे आदिवासी किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है. अपनी जमीन, जल और जंगल के अस्तित्व को बचाने के लिए सैकड़ों की संख्या में गांव वाले पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर डेरा डाल दिया. इस आंदोलन को कांग्रेस का भी पुरजोर समर्थन मिला. झाबुआ विधायक और कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया खुद जमीन पर बैठकर आदिवासियों के हक की आवाज बुलंद करते नजर आए.
आंदोलनकारियों का मुख्य आक्रोश सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और कई गांव वालों की देर रात हुई गिरफ्तारी को लेकर है. दिव्या आदिवासी का आरोप है कि पुलिस ने आधी रात को बिना महिला पुलिस बल के घरों में दबिश दी और महिलाओं के साथ बदसलूकी व मारपीट की. इसी दमनकारी नीति के विरोध में शुक्रवार को भारी संख्या में ग्रामीण एसपी कार्यालय पहुंचे. आंदोलन में शामिल हुए झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. करीब 18 घंटे बाद यह आंदोलन शनिवार को खत्म हो गया.
SP से मिलने पर अड़े थे प्रदर्शनकारी
विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ा जा रहा है, लेकिन उन्हें न तो उचित मुआवजा मिल रहा है और न ही रहने के लिए जमीन. भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद गांव वाले अपनी मांग पर अड़े हैं कि जब तक पुलिस अधीक्षक खुद आकर उनसे बात नहीं करतीं, धरना समाप्त नहीं होगा. विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा कि जब भी अन्याय होगा, मैं देश के किसी भी कोने में जाने को तैयार हूं.
’25 लाख पेड़ काटे जा रहे’
अमित भाई और दिव्या जैसे लोग जो आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्हें जेल में डालना सरकार की एक सोचीसमझी साजिश है. रात के 3 बजे बिना महिला पुलिस के आदिवासियों के घरों में घुसकर मारपीट करना किस तरह का न्याय है?
केनबेतवा परियोजना के नाम पर 25 लाख पेड़ काटे जा रहे हैं और 7 हजार परिवारों को बेघर किया जा रहा है. किसान अपनी जमीन मांग रहा है, अगर जमीन नहीं होगी तो किसान कैसा? हम यहां तब तक बैठे हैं जब तक एसपी मैडम आकर जवाब नहीं देतीं. हमें अधिकार चाहिए, मुआवजा चाहिए और जमीन के बदले जमीन भी.
गांव वालों की क्या है मांग?
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और अन्य गांव वालों की तत्काल रिहाई हो. विस्थापितों को ‘जमीन के बदले जमीन’ और उचित मुआवजा मिले. रात में दबिश देने और बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो और केनबेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासियों का सही पुनर्वास. प्रदर्शन के बीच एसपी कार्यालय के बाहर तनावपूर्ण माहौल के बीच शांति बनी हुई है. पुलिस बल चप्पेचप्पे पर तैनात है. वहीं, आदिवासियों का पारंपरिक वाद्य यंत्रों और नारों के साथ यह प्रदर्शन शुक्रवार से शुरु होकर शनिवार सुबह तक चला.
18 घंटों तक चला धरना
पन्ना एसपी कार्यालय के बाहर किसानों का धरना करीब 18 घंटे तक लगातार जारी रहा. सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में किसान धरने पर बैठे थे. शनिवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया और किसानों के पैनल ने पन्ना एसपी निवेदिता नायडू से मुलाकात की. चर्चा के बाद धरना समाप्त कर दिया गया. विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा कि किसानों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और आंदोलन आगे भी जारी रहेगा.
उन्होंने बताया कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी के पन्ना आगमन के बाद आगामी रणनीति बनाई जाएगी. वहीं गिरफ्तार किसानों की जमानत के लिए न्यायालय में याचिका भी लगाई जा रही है.



