Bihar

मां हो तो ऐसी…कहानी बिहार की पहली महिला कैब ड्राइवर अर्चना पांडे की, पति ने छोड़ा साथ, अब तीन बच्चों के सपनों को दे रही नई उड़ान

Mother’s Day 2026: आर्थिक रूप से सशक्त और अपने पैर पर खड़ा होना हर महिला की चाहत होती है. वह यह भी चाहती है कि समाज से उठने वाली आवाज में उनके उत्साह को बढाए. बिहार की राजधानी पटना की अर्चना पांडे ऐसी ही एक मिसाल है. जब बात उनके अपने बच्चों की परवरिश पर आई, तब अर्चना ने कुछ ऐसे कदम उठाए जो दूसरों के लिए नजीर बन गए. दरअसल अर्चना पांडे बिहार की पहली महिला कैब ड्राइवर है. अर्चना ने यह कदम तब उठाया था जब, मुश्किलें उनके सामने खड़ी थी और उनको खुद को साबित करना था.

मां हो तो ऐसी…कहानी बिहार की पहली महिला कैब ड्राइवर अर्चना पांडे की, पति ने छोड़ा साथ, अब तीन बच्चों के सपनों को दे रही नई उड़ान
मां हो तो ऐसी…कहानी बिहार की पहली महिला कैब ड्राइवर अर्चना पांडे की, पति ने छोड़ा साथ, अब तीन बच्चों के सपनों को दे रही नई उड़ान

दरअसल, अर्चना की कहानी अलग तरह की है. वह कहती हैं कि चार पहिया वाहन चलाने का शौक उनको शुरू से था. उनके जीवन में अहम मोड़ तब आया, जब बात उनके परिवार तक पहुंची. अर्चना अपने उन लम्हों के बारे में बात करना और याद करना ही नहीं चाहती, जिस लम्हें में किसी महिला को विवाहित कहा जाता है. बहुत कुरेदने पर भी वह इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहती हैं.

प्राइवेट जॉब और बिजनेस भी किया

अर्चना ने कार की स्टेयरिंग को पकड़ने से पहले जीवन जीने के लिए कई कदम उठाये. उन्होंने प्राइवेट जॉब की. बिजनेस में भी हाथ आजमाया, लेकिन किसी कारण बिजनेस नहीं चला. उनको बचपन से ही गाड़ी चलाने का बहुत शौक था. इसी शौक और हुनर को उन्होंने अपनी आजीविका का साधन बना लिया. अर्चना कहती हैं, शुरू में जब कैब की स्टेयरिंग को संभाला तो कई तरह की बातें सुनने को मिली.

महिला कैब ड्राइवर

मैंने उन सबको नजरअंदाज कर दिया. क्योंकि मेरे सामने मेरे बच्चों की परवरिश और परिवार था. लाख पूछने के बाद भी वह अपने वैवाहिक जीवन के बारे में कुछ भी नहीं कहना चाहती. शायद वह उसे अपने दिल की किसी कोने में दबा कर रखना चाहती है. अर्चना बताती हैं, जब मैं ड्राइविंग करती हूं तो पैसेंजर भी चौंक जाते हैं. शहर के लोग तो कुछ नहीं कहते, लेकिन बाहर के लोग ताने मारते हैं.

कई राज्यों का सफर किया पूरा

पीठ पीछे कई तरह की बातें भी करते हैं, लेकिन मैं इन सारी बातों को नजरअंदाज करती हूं. वह बताती हैं, केवल पटना ही नहीं इसके अलावा वह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश के अलावा नेपाल तक में कैब लेकर जाती हैं, जहां की बुकिंग आती है, जाने को तैयार रहती है. अर्चना बताती है कि बहुत सी महिलाएं और लड़कियां गाड़ी चलाने की इच्छा लेकर मेरे पास आती हैं. अब मेरी कोशिश महिलाओं को सशक्त बनाने को लेकर के है.

भले ही वह बिहार की पहली महिला कैब ड्राइवर है, लेकिन वह चाहती है कि और भी महिलाएं इस फील्ड में आए और अपने दम पर खुद की पहचान बनाएं. अर्चना की तीन बेटियां और एक बेटा है. सबका पोषण वह कैब चलाकर करती हैं. अर्चना यह भी कहती है कि समाज उनके बारे में क्या कह रहा है, उसकी फिक्र वह नहीं करती. उनकी योजना लोन पर और गाड़ियां निकालने की है, जिसके बाद वह ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इस क्षेत्र में रोजगार दे सकें.

कुछ लोग मेरी सराहना करते हैं तो मैं उनका शुक्रिया कह देती हूं, लेकिन कुछ लोग कुछ न कुछ कहते रहते हैं. वैसे लोगों का मैं नोटिस ही नहीं करती.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply