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CBI को बड़ी सफलता, भगोड़े प्रभदीप सिंह को अजरबैजान से कराया प्रत्यर्पण

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने विदेश मंत्रालय , गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के कोर्डिनेशन से वांटेड भगोड़े प्रभदीप सिंह को अजरबैजान से भारत प्रत्यर्पित करा लिया है. भारत के लिए ये बड़ी सफलता है. प्रभदीप सिंह दिल्ली के स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में दर्ज NDPS Act, 1958 की विभिन्न धाराओं के तहत एक मामले में वांटेड था.

CBI को बड़ी सफलता, भगोड़े प्रभदीप सिंह को अजरबैजान से कराया प्रत्यर्पण
CBI को बड़ी सफलता, भगोड़े प्रभदीप सिंह को अजरबैजान से कराया प्रत्यर्पण

जानकारी के मुताबिक यह मामला मादक पदार्थों की तस्करी के एक बड़े गिरोह से संबंधित है. जिसमें भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए थे. जांच के दौरान कई सहआरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. इस गिरोह का मुख्य साजिशकर्ता और प्रमुख आयोजक प्रभदीप सिंह को माना गया है.

लोकेशन ट्रेस किया गया गिरफ्तार

प्रभदीप सिंह दिल्ली के स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट, 1985 के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज एक मामले के संबंध में वांटेड था. दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर CBI ने इंटरपोल चैनलों के जरिए आरोपी के खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया था. जिसके बाद अजरबैजान की एजेंसियों ने आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर उसे गिरफ्तार किया. इसके बाद भारत की ओर से प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा गया. सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद आरोपी का सफलतापूर्वक भारत प्रत्यर्पण कराया गया.

अजरबैजान की राजधानी बाकू गई थी टीम

दिल्ली पुलिस की तीन सदस्यीय एस्कॉर्ट टीम आरोपी प्रभदीप सिंह को भारत वापस लाने के लिए अजरबैजान की राजधानी बाकू गई थी. बुझवार को टीम आरोपी प्रभदीप लेकर दिल्ली पहुंची. CBI ने बताया कि प्रभदीप इस मादक पदार्थ रैकेट का मुख्य आयोजक था.

160 से ज्यादा वांछित अपराधियों को भारत लाया गया

भारत में इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में CBI, BHARATPOL के जरिए देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करती है. MEA, MHA और विभिन्न जांच एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से पिछले कुछ सालें में 160 से ज्यादा वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है.

CBI ने कहा कि वह इंटरपोल चैनलों और भारतपोल प्लेटफॉर्म के जरिए से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखे हुए है ताकि भारतीय एजेंसियों द्वारा वांछित भगोड़ों का पता लगाया जा सके और उन्हें वापस लाया जा सके.

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