आईआईटी और एनआईटी जैसे बड़े कॉलेजों के स्टूडेंट्स के लिए किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिलना एक बहुत बड़ा सपना सच होने जैसा होता है. लेकिन हाल ही में अमेरिकी कंपनी ओरेकल के एक फैसले ने कई होनहार छात्रों के इस सपने को एक झटके में तोड़ दिया है.

कंपनी ने कैंपस प्लेसमेंट के दौरान दिए गए 35 से 40 लाख रुपये के भारीभरकम सैलरी वाले जॉब ऑफर्स अचानक वापस ले लिए हैं. इस कदम से न सिर्फ इन छात्रों के करियर की शुरुआत पर ब्रेक लग गया है, बल्कि कॉर्पोरेट दुनिया का वो कड़वा सच भी सामने आ गया है कि जब भी मार्केट में उतारचढ़ाव आता है या कंपनियों को ‘कॉस्टकटिंग’ करनी होती है, तो सबसे पहली गाज अक्सर नए टैलेंट पर ही गिरती है.
छात्रों को बड़ा झटका
इस पूरी घटना में सबसे ज्यादा पीड़ादायक बात संस्थानों के प्लेसमेंट नियम हैं. आईआईटी रुड़की, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी बीएचयू से लेकर एनआईटी वारंगल तथा वीएनआईटी नागपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में ‘एक छात्र, एक नौकरी’ की नीति लागू होती है. इसका सीधा सा अर्थ यह है कि यदि किसी छात्र ने एक बार किसी कंपनी का ऑफर स्वीकार कर लिया, तो वह अन्य कंपनियों की चयन प्रक्रिया में नहीं बैठ सकता.
ओरेकल का बड़ा ऑफर हाथ में होने के कारण इन छात्रों ने माइक्रोसॉफ्ट, सैमसंग, फ्लिपकार्ट, वालमार्ट, सैप और सिटी जैसी दिग्गज कंपनियों के इंटरव्यू की रेस से खुद को बाहर कर लिया था. अब ओरेकल द्वारा ऐन मौके पर हाथ खींच लेने से ये युवा मझधार में फंस गए हैं. उनके पास अब कोई बैकअप नौकरी नहीं बची है.
लिंक्डइन पर मदद की गुहार लगाते टॉपर
जिन छात्रों ने कुछ समय पहले ही अपने परिवारों को बड़ी नौकरी लगने की खुशखबरी दी थी, वे आज प्रोफेशनल नेटवर्किंग साइट लिंक्डइन पर रोजगार तलाशने को मजबूर हैं. आईआईटी बीएचयू के एमटेक छात्र तानसेन लहारे की कहानी इसका जीताजागता उदाहरण है. उन्हें ओरेकल में टेक्निकल स्टाफ मेंबर की भूमिका मिली थी, लेकिन जॉइनिंग से ठीक एक महीने पहले उनका ऑफर रद्द कर दिया गया. वीएनआईटी नागपुर के बीटेक ग्रेजुएट अनिमेश शर्मा का भी यही हाल है.
नाम न छापने की शर्त पर एक एनआईटी छात्र ने बताया कि उनके कॉलेज से ओरेकल में 12 छात्रों को इंटर्नशिप के बाद प्रीप्लेसमेंट ऑफर मिला था, जिनमें से तीन को अब बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. छात्र के अनुसार, ओरेकल में काम का अनुभव शानदार था और किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि प्लेसमेंट पक्का होने के बाद उन्हें दोबारा नौकरी ढूंढनी पड़ेगी.
टेक दिग्गज ने क्यों लिया यह फैसला
इस अचानक लिए गए फैसले के पीछे कंपनी के भीतर चल रहा भारी संगठनात्मक बदलाव यानी रीस्ट्रक्चरिंग है. प्लेसमेंट सेल के अधिकारियों के अनुसार, ओरेकल ने एप्लिकेशन डेवलपर तथा सर्वर टेक्नोलॉजी टीमों के लिए 3540 लाख के पैकेज पर बड़े पैमाने पर भर्तियां की थीं. हाल ही में कंपनी ने अपनी ओरेकल हेल्थ तथा एप्लीकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी इकाइयों को बंद करने का फैसला किया है. जिन विभागों के लिए इन छात्रों को चुना गया था, उनका अस्तित्व ही खत्म हो गया. कंपनी का कहना है कि उसने प्रभावित छात्रों को दूसरी टीमों में शिफ्ट करने का प्रयास किया, लेकिन जगह न होने के कारण यह संभव नहीं हो पाया.
कॉरपोरेट लागत कटौती का सच
छात्रों के ऑफर वापस लेना वास्तव में उस बड़ी छंटनी का ही एक विस्तार है, जिसे ओरेकल ने पिछले महीने अंजाम दिया था. अप्रैल में कंपनी ने वैश्विक स्तर पर करीब 30,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था. इसमें से करीब 12,000 कर्मचारी अकेले भारत से थे, जो देश में कंपनी के कुल वर्कफोर्स का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा था.
इस पूरी कवायद का मुख्य केंद्र वर्ष 202122 में हुआ सेर्नर कॉरपोरेशन का अधिग्रहण माना जा रहा है, जिसे मिलाकर ओरेकल हेल्थ बनाया गया था. निकाले गए लोगों में सबसे बड़ी संख्या इसी सेर्नर वर्कफोर्स की है. कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ने अपनी टीमों को कर्मचारियों की संख्या कम करने का नहीं, बल्कि बजट में भारी कटौती करने का एक निश्चित लक्ष्य दिया था.



