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क्या आपकी नसें कमजोर हो रही हैं? न्यूरोलॉजिस्ट से जानिए नर्वस सिस्टम की सेहत जांचने का 1 मिनट का टेस्ट

हमारा नर्वस सिस्टम शरीर के उस बिजली के तार की तरह है, जो मस्तिष्क के संदेशों को अंगों तक पहुंचाता है। लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब डाइट के कारण नसों में कमजोरी आना अब एक आम समस्या बन गई है। क्या आप भी अक्सर हाथोंपैरों में झुनझुनी या कमजोरी महसूस करते हैं? वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट ने कुछ ऐसे शारीरिक संकेतों और आसान तरीकों के बारे में बताया है जिनसे आप घर बैठे अपने नर्वस सिस्टम की स्थिति का शुरुआती अंदाजा लगा सकते हैं।

क्या आपकी नसें कमजोर हो रही हैं? न्यूरोलॉजिस्ट से जानिए नर्वस सिस्टम की सेहत जांचने का 1 मिनट का टेस्ट
क्या आपकी नसें कमजोर हो रही हैं? न्यूरोलॉजिस्ट से जानिए नर्वस सिस्टम की सेहत जांचने का 1 मिनट का टेस्ट

फोर्टिस हॉस्पिटल, फरीदाबाद में न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विनीत बंगा ने बताया बारबार निगलने में परेशानी होना केवल गले की समस्या नहीं, बल्कि तनाव और नर्वस सिस्टम से जुड़ा संकेत भी हो सकता है। Dr Vineet Banga के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को लगातार तीन बार तक निगलने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो यह शरीर के नर्वस सिस्टम के असंतुलित होने का संकेत हो सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि जब शरीर लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो वह फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है। इस स्थिति में शरीर का ध्यान सर्वाइवल पर ज्यादा केंद्रित हो जाता है, जिससे निगलने, पाचन और गहरी सांस लेने जैसी सामान्य प्रक्रिया प्रभावित होने लगती हैं।

नर्वस सिस्टम की एक मिनट में सेल्फ जांच

हमारा नर्वस सिस्टम शरीर की हर छोटीबड़ी गतिविधि को कंट्रोल करता है। कई बार शरीर कुछ ऐसे संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्हीं में से एक है निगलने में दिक्कत महसूस होना। निगलने की प्रक्रिया पैरासिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम से जुड़ी होती है, जो शरीर को रिलैक्स और संतुलित रखने का काम करता है। एक आसान तरीके से आप यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि निगलने की प्रक्रिया सामान्य है या नहीं। जब आप आराम की स्थिति में हों, तब लगातार 23 बार थूक निगलकर देखें। अगर यह प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के आसानी से हो रही है, तो आमतौर पर निगलने से जुड़ी मांसपेशियां और नसें ठीक तरह से काम कर रही होती हैं।

लेकिन अगर बारबार ऐसा लगे कि थूक गले में अटक रहा है, निगलने में असहजता हो रही है या गले में भारीपन महसूस हो रहा है, तो यह तनाव, एंग्जायटी, मांसपेशियों में जकड़न या कुछ मामलों में नर्वस सिस्टम से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। हालांकि, सिर्फ इस एक संकेत के आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। निगलने में दिक्कत कई अन्य कारणों जैसे गले का इंफेक्शन, एसिडिटी, थायरॉयड या न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की वजह से भी हो सकती है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहे या इसके साथ कमजोरी, चक्कर, बोलने में दिक्कत या हाथपैरों में झनझनाहट जैसे लक्षण भी दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

नर्वस सिस्टम को कैसे दुरुस्त करें

लगातार तनाव, चिंता और भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल का असर सीधे हमारे नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। जब नर्वस सिस्टम असंतुलित होने लगता है, तो शरीर में बेचैनी, घबराहट, थकान, नींद की कमी और निगलने जैसी सामान्य प्रक्रियाओं में भी परेशानी महसूस हो सकती है। ऐसे में कुछ आसान आदतें अपनाकर नर्वस सिस्टम को बेहतर तरीके से रेगुलेट किया जा सकता है।

गहरी और धीमी सांस लेने की आदत डालें

एक्सपर्ट के अनुसार डायाफ्रामेटिक ब्रीदिंग यानी धीमी और गहरी सांस लेने से शरीर रिलैक्स मोड में आने लगता है। इससे वेगस नर्व सक्रिय होती है, जो तनाव कम करने और शरीर को शांत रखने में मदद करती है। रोज कुछ मिनट गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस मानसिक तनाव और एंजायटी को कंट्रोल करने में फायदेमंद हो सकती है।

ठंडे पानी से चेहरे को धोना फायदेमंद

चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारना या ठंडे पानी से नहाना भी नर्वस सिस्टम को शांत करने का आसान तरीका माना जाता है। इससे वेगस नर्व उत्तेजित होती है, जो शरीर और दिमाग को रिलैक्स करने में मदद कर सकती है।

कुछ देर नंगे पैर चलें

घास, मिट्टी या किसी प्राकृतिक सतह पर नंगे पैर चलना मानसिक शांति देने में मददगार माना जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह आदत शरीर को ग्राउंडिंग का एहसास कराती है और नर्वस सिस्टम को शांत रखने में मदद करती है।

गुनगुना और गरारे करना भी है फायदेमंद

गाना गाना, हल्का गुनगुना या गरारे करना भी वेगस नर्व को सक्रिय करने में मदद कर सकता है। इससे शरीर में रिलैक्सेशन बढ़ता है और मानसिक तनाव कम महसूस हो सकता है।

अच्छी नींद और संतुलित डाइट जरूरी

पर्याप्त नींद और बैलेंस डाइट नर्वस सिस्टम को हेल्दी रखने के लिए बेहद जरूरी हैं। पोषण से भरपूर भोजन और 78 घंटे की अच्छी नींद शरीर को तनाव से लड़ने की ताकत देती है और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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