कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहीं दिग्गज अभिनेत्री नफीसा अली सोढ़ी के इलाज को लेकर एक अहम मेडिकल अपडेट सामने आया है। Nafisa Ali Sodhi, 69, जो इस समय स्टेज 4 पेरिटोनियल और ओवेरियन कैंसर के दोबारा लौटने से जूझ रही हैं, उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि एलर्जी रिएक्शन की वजह से उनकी कीमोथेरेपी की दवा बदलनी पड़ी है। इंस्टाग्राम पर उन्होंने लिखा कि पिछली कीमो बीच में रोकनी पड़ी क्योंकि मुझे उससे एलर्जी हो गई थी। अब नई कीमो शुरू हुई है, जिसे हफ्ते में एक बार लेना होगा। मैं पूरी हिम्मत से लड़ रही हूं। अब सवाल ये उठता है कि कीमो की दवा से एलर्जी क्यों हो रही है। नफीसा अली के इस खुलासे के बाद हमने विशेषज्ञों से समझा कि कीमोथेरेपी की दवाओं से एलर्जी होने का कारण क्या है।

हेड नेक कैंसर इंस्टीट्यूट इंडिया के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जेहान बी. धाभर के अनुसार, कीमोथेरेपी की दवाएं कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए बेहद शक्तिशाली होती हैं, लेकिन कई बार शरीर इन पर असामान्य प्रतिक्रिया दे सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ दवाओं को बारबार लेने पर एलर्जिक या हाइपरसेंसिटिविटी रिएक्शन होना आम बात है।
कीमोथेरेपी की वजह से स्किन और बॉडी में कौनकौन से दिखते हैं लक्षण
डॉक्टर जेहान ने बताया कीमो की वजह से हल्की खुजली, स्किन रैश, चेहरे पर लालिमा या सांस फूलने से लेकर गंभीर सूजन, ब्लड प्रेशर अचानक गिरना, सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ तक हो सकती हैं। डॉ. धाभर ने कहा कि कई बार शरीर का इम्यून सिस्टम दवा को बाहरी तत्व मानकर उसके खिलाफ जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने लगता है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ मरीज शुरुआत में दवा को आसानी से सहन कर लेते हैं, लेकिन कई साइकल के बाद एलर्जी हो सकती है।
कीमो की दवा से एलर्जी का खतरा किन लोगों को होता है?
TGH ऑन्को लाइफ कैंसर सेंटर के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. उत्कर्ष अजगांवकर ने कहा कि एलर्जी का खतरा दवा के प्रकार, मरीज की इम्यून प्रतिक्रिया और पहले से दवा के संपर्क पर निर्भर करता है। एक्सपर्ट के मुताबिक आज कीमोथेरेपी सिर्फ दवा देने तक सीमित नहीं है। डॉ. धाभर ने कहा कि अनुभवी ऑन्कोलॉजी टीम सही मात्रा, सही स्पीड, उचित मॉनिटरिंग और सपोर्टिव दवाओं के जरिए कई साइड इफेक्ट्स को काफी हद तक कम कर सकती है।
डॉ. अजगांवकर ने बताया कि कई मामलों में मरीज को ज्यादा सुरक्षित और आसानी से सहन होने वाला वैकल्पिक कीमो प्लान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आज कैंसर का इलाज काफी हद तक पर्सनलाइज्ड हो चुका है, जहां मरीज की सुरक्षा और आराम को ध्यान में रखते हुए इलाज तय किया जाता है। मरीजों को कीमोथेरेपी के दौरान या बाद में होने वाले किसी भी असामान्य लक्षण की तुरंत जानकारी डॉक्टर को देनी चाहिए।
कीमो से पहले प्रीमेडिकेशन का कीमो के साइड इफेक्ट पर असर
एक्सपर्ट ने यह भी बताया कि कीमो से पहले दी जाने वाली दवाएं और इंजेक्शन जिन्हें प्रीमेडिकेशन कहा जाता है वो एलर्जी, मतली, उल्टी, मुंह के छाले और एसिडिटी जैसे साइड इफेक्ट्स को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, कीमो के बाद घर पर दी जाने वाली दवाएं रिकवरी बेहतर बनाने और देर से होने वाले साइड इफेक्ट्स को कम करने में मदद करती हैं।
कीमोथेरेपी से एलर्जी होने पर क्या दवा बंद कर दी जाती है?
डॉ. धाभर ने कहा कि किसी एक कीमोथेरेपी दवा से एलर्जी होने का मतलब यह नहीं कि कैंसर का इलाज खत्म हो गया है। आधुनिक ऑन्कोलॉजी में कई विकल्प मौजूद हैं। मरीज की स्थिति और कैंसर के प्रकार के अनुसार डॉक्टर दूसरी दवा, कम डोज, धीमी स्पीड या साप्ताहिक कीमोथेरेपी जैसे विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर का इलाज हमेशा सीधी प्रक्रिया नहीं होता, बल्कि शरीर की प्रतिक्रिया के अनुसार समयसमय पर बदलाव करने पड़ते हैं। इसलिए खुजली, चक्कर, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत मेडिकल टीम को बताना बेहद जरूरी है। डॉ. धाभर के अनुसार, मेडिकल साइंस में प्रगति के कारण आज एक दवा बंद होने पर भी मरीजों के पास इलाज जारी रखने के लिए कई प्रभावी विकल्प मौजूद हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक जानकारी और विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है। किसी भी तरह की दवा या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।



