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99 साल की गणितज्ञ और 22 साल की भारतीय छात्रा ने मिलकर सुलझाई सदी पुरानी गणितीय पहेली, ऐसे बनी थी दोनों की जोड़ी.

99 साल की गणितज्ञ और 22 साल की भारतीय छात्रा ने मिलकर सुलझाई सदी पुरानी गणितीय पहेली, ऐसे बनी थी दोनों की जोड़ी.

गणित की दुनिया में एक ऐसी कहानी सामने आई थी, जिसने उम्र और अनुभव की सीमाओं को ही पीछे छोड़ दिया। एक तरफ थीं 99 साल की अनुभवी गणितज्ञ, तो दूसरी ओर थीं महज 22 साल की भारतीय मूल की युवा गणितज्ञ। दोनों ने मिलकर एक ऐसी कठिन गणितीय समस्या को सुलझाने में योगदान दिया था, जो दशकों से दुनिया के गणितज्ञों के लिए चुनौती बनी हुई थी।

इस काम में उनके साथ यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो की गणितज्ञ भी शामिल थीं। तीनों ने मिलकर चार धागों वाले classical braid group से जुड़े Burau representation की एक अहम पहेली का समाधान किया था।

कहानी शुरू हुई थी जब छात्रा सिर्फ 15 साल की थी

इस उपलब्धि के पीछे सबसे दिलचस्प कहानी दोनों गणितज्ञों की मुलाकात की थी।

जब भारतीय मूल की छात्रा सिर्फ 15 साल की थीं, तब उन्होंने वरिष्ठ गणितज्ञ से संपर्क किया था। उनकी दिलचस्पी स्कूल की किताबों से आगे जाकर गणित की गहराई को समझने में थी।

उस समय वरिष्ठ गणितज्ञ की उम्र 92 साल थी और वह विश्वविद्यालय से रिटायर हो चुकी थीं। इसके बावजूद उन्होंने युवा छात्रा की जिज्ञासा को गंभीरता से लिया।

धीरे-धीरे दोनों के बीच गणित को लेकर बातचीत शुरू हुई। वरिष्ठ गणितज्ञ ने उन्हें कठिन और उन्नत स्तर की गणितीय किताबें पढ़ने के लिए दीं। यही संपर्क आगे चलकर एक लंबी शोध यात्रा में बदल गया।

छात्रा और मेंटर का रिश्ता शोध साझेदारी में बदला

समय बीतने के साथ युवा गणितज्ञ ने उच्च स्तर पर गणित की पढ़ाई जारी रखी। उनकी रुचि खास तौर पर braid theory और Burau representation जैसे जटिल विषयों में बनी रही।

दोनों ने साथ मिलकर इस क्षेत्र की समस्याओं पर काम करना शुरू किया। यह रिश्ता सिर्फ एक छात्रा और मेंटर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे शोध सहयोग में बदल गया।

इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 2021 में आया, जब दोनों ने Burau representation of B4 से जुड़ा शोधपत्र प्रकाशित किया था।

आखिर क्या है यह गणितीय पहेली?

पहली नजर में braid यानी चोटी का गणित से कोई संबंध समझना मुश्किल लग सकता है। लेकिन गणित में कई धागों को एक-दूसरे के ऊपर से घुमाने और लपेटने से बनने वाली संरचनाओं का बाकायदा अध्ययन किया जाता है। इसे braid theory कहा जाता है।

इन जटिल संरचनाओं को समझने के लिए गणितज्ञ अलग-अलग algebraic representations का इस्तेमाल करते हैं। Burau representation भी इन्हीं में से एक है।

यहां असली सवाल यह था कि क्या इस representation में मूल braid की पूरी जानकारी सुरक्षित रहती है या कुछ जानकारी रास्ते में खो जाती है।

चार धागों वाला मामला दशकों से अटका था

इस पहेली को समझने के लिए अलग-अलग strands यानी धागों की संख्या महत्वपूर्ण थी।

गणितज्ञ पहले ही यह समझ चुके थे कि तीन या उससे कम strands के मामले में Burau representation faithful है। दूसरी ओर, पांच या उससे अधिक strands के लिए यह unfaithful साबित हो चुका था।

लेकिन चार strands का मामला लंबे समय तक बीच में अटका रहा।

यही वह सवाल था जिसका जवाब कई दशकों तक गणितज्ञ खोजते रहे थे—क्या चार strands के मामले में भी Burau representation faithful है?

फिर तीन गणितज्ञों ने दिया जवाब

2026 में प्रकाशित शोध में युवा गणितज्ञ, वरिष्ठ गणितज्ञ और उनकी सहयोगी ने मिलकर इस सवाल का समाधान प्रस्तुत किया।

उनके काम से साबित हुआ कि चार strands वाले classical braid group के लिए Burau representation faithful है।

इसका मतलब यह हुआ कि इस खास स्थिति में representation मूल गणितीय संरचना की जानकारी को पूरी तरह बनाए रखती है।

शोध का एक और महत्वपूर्ण परिणाम यह था कि इसी स्थिति में Jones representation के faithful होने की बात भी साबित हुई।

उम्र के फासले से बड़ी थी गणित की साझेदारी

इस उपलब्धि की खास बात सिर्फ करीब एक सदी पुरानी गणितीय समस्या का समाधान होना नहीं था। इसकी कहानी इसलिए भी खास बनी क्योंकि इसमें दो अलग-अलग पीढ़ियों के गणितज्ञ साथ दिखाई दिए थे।

एक तरफ 99 साल की उम्र में भी गणित की जटिल समस्याओं पर काम कर रहीं अनुभवी गणितज्ञ थीं। दूसरी तरफ 22 साल की युवा भारतीय मूल की गणितज्ञ थीं, जिन्होंने किशोरावस्था में ही उनसे संपर्क किया था।

15 साल की एक छात्रा की जिज्ञासा से शुरू हुआ यह सफर कई साल बाद एक महत्वपूर्ण गणितीय उपलब्धि तक पहुंचा था।

यह कहानी बताती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और सही मार्गदर्शन के साथ एक युवा जिज्ञासा भी दुनिया की सबसे कठिन समस्याओं में से किसी एक का समाधान खोजने की यात्रा का हिस्सा बन सकती है।

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