
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सुनने वाले हर शख्स को झकझोर कर रख दिया है। अवैध संबंधों के चक्कर में अपने ही पति की गोली मारकर हत्या करवाने वाली पत्नी और उसके प्रेमी को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने से ठीक पहले जब जज ने अदालत में मौजूद मृतक की छोटी बेटी से उसकी इच्छा पूछी, तो मासूम का दर्द आंसुओं के जरिए बाहर आ गया। उसने जज साहब से हाथ जोड़कर अपनी ही मां के लिए फांसी की सजा की मांग की। इस हृदयविदारक घटना ने अदालत कक्ष में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दीं।
क्या था पूरा सनसनीखेज मामला?
यह पूरी घटना उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के थाना बरला क्षेत्र की है। अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, यह खौफनाक वारदात 10 जुलाई 2025 को सुबह करीब 08:30 बजे हुई थी। मृतक सुरेश के भाई विजय सिंह अपने घर के बाहर बैठे थे, जबकि सुरेश की पत्नी बीना अपने घर के दरवाजे पर खड़ी हुई थी। उसी दौरान मोहल्ले में ही रहने वाला एक अन्य युवक मनोज वहां पहुंचा। आरोप है कि बीना ने मनोज से कहा कि “देख क्या रहा है, आज इसे जिंदा मत छोड़ना, गोली मार दे।” इतना सुनते ही मनोज ने अपनी कमर से अवैध तमंचा निकाला और सीधे सुरेश के सीने में गोली दाग दी, जिससे सुरेश की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
बचाने दौड़े भाई पर भी की गई फायरिंग
जब सुरेश को गोली मारी गई और उसके भाई विजय सिंह उसे बचाने के लिए आगे दौड़े, तो आरोपी मनोज ने जान से मारने की नीयत से उन पर भी तमंचे से दूसरा फायर झोंक दिया। गनीमत यह रही कि गोली विजय सिंह के कान के पास से निकलकर सीधे दीवार में जा धंसी, लेकिन उस गोली के बारूद से वादी (विजय सिंह) का चेहरा बुरी तरह झुलस गया। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पुलिस ने तुरंत हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों पत्नी बीना और उसके प्रेमी मनोज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और बाद में अदालत में ठोस आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
जज और मासूम बेटी के बीच का वह दर्दनाक संवाद
अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय तोष कुमार शर्मा की अदालत में जब इस मामले की सुनवाई पूरी हुई, तो फैसला सुनाए जाने से पहले जज साहब ने अदालत कक्ष में मौजूद मृतक की सबसे छोटी बेटी रोशनी को अपने पास बुलाया। न्यायाधीश ने मासूम से पूछा कि वह इस मामले में क्या चाहती है। यह सवाल सुनते ही बच्ची फूट-फूटकर रोने लगी और कांपते हुए कहा, “जज अंकल, मुझे मम्मी से कोई लगाव नहीं है। इसने मेरे पापा को मारा है, इसे फांसी दे दो।” बेटी के इन दर्दनाक शब्दों ने कोर्ट रूम में मौजूद हर किसी को अंदर तक हिलाकर रख दिया। इसके बाद न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
15 साल के बेटे की गवाही बनी सबसे बड़ा सबूत
इस पूरे बहुचर्चित मुकदमे को अदालत में साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाह पेश किए गए। इनमें सबसे अहम और मजबूत गवाही मृतक के 15 वर्षीय बड़े बेटे नीतेश की रही, जो इस पूरी घटना का चश्मदीद गवाह था। इसके अलावा मृतक के भाई विजय सिंह, चिकित्साधिकारी, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर, विवेचक अरुण पवार और अन्य पुलिसकर्मियों की गवाही व दस्तावेजी साक्ष्य (जैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट, बरामद तमंचा, कारतूस और मोबाइल) अदालत में पेश किए गए। अदालत ने अपने फैसले में यह भी आदेश दिया कि दोषियों से वसूले जाने वाले कुल 35,000 रुपये के अर्थदंड में से आधी धनराशि मृतक के अनाथ बच्चों के पालन-पोषण के लिए दी जाएगी और शेष आधी धनराशि राज्य कोष में जमा होगी।



