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​​​​​एक प्रेम संबंध ने बढ़ाई​​​​​ रंजिश, फिर रात के अंधेरे में रची गई ऐसी साजिश कि पूरे गांव में मच गया हड़कंप​​​​

​​​​​एक प्रेम संबंध ने बढ़ाई​​​​​ रंजिश, फिर रात के अंधेरे में रची गई ऐसी साजिश कि पूरे गांव में मच गया हड़कंप​​​​

तराना, उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के तराना क्षेत्र में एक महिला की हत्या के मामले ने रिश्तों और आपसी विश्वास को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे। गांव के बाहर एक 27 वर्षीय महिला का शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। शुरुआती तौर पर मामला रहस्यमय लग रहा था, लेकिन मोबाइल कॉल डिटेल और संदिग्धों से पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने रिश्तों में उलझी एक ऐसी कहानी आई, जिसमें प्रेम संबंध, पैसों को लेकर प्रतिस्पर्धा और कथित साजिश के आरोप शामिल थे।

मृतका का नाम भगवंती बताया गया था। उसके पति जितेंद्र सिंह ने पुलिस को बताया कि वह एक दिन बच्चों को थोड़ी देर में लौटने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं आई। अगले दिन गांव के बाहर उसका शव मिलने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस ने हत्या के मामले की जांच शुरू की।

एक घंटे में कई बार किए गए फोन से गहराया शक

जांच के दौरान पुलिस ने भगवंती के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली। इसमें किशन पाटीदार नाम के एक किसान के साथ उसकी बार-बार बातचीत सामने आई। पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन शाम के समय किशन ने करीब एक घंटे में भगवंती को 22 बार फोन किया था।

आगे की जांच में यह भी सामने आया कि किशन की बातचीत भगवंती की देवरानी सुधा से भी होती थी। इसके अलावा कुछ अन्य लोगों के मोबाइल नंबर भी जांच के दायरे में आए। पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों के आधार पर संदिग्धों से पूछताछ की।

पुलिस की जांच के अनुसार, घटना के समय कुछ संदिग्धों की मोबाइल लोकेशन उस इलाके के आसपास मिली थी, जहां बाद में भगवंती का शव बरामद हुआ। इन तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।

खेत पर काम करने के दौरान शुरू हुआ था संबंध

पुलिस के सामने आई कहानी के मुताबिक, भगवंती कुछ साल पहले किशन के खेत पर काम करने जाती थी। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने का आरोप सामने आया। बताया गया कि किशन भगवंती पर पैसे खर्च करता था, जिसके चलते उसके रहन-सहन में बदलाव आया था।

भगवंती की देवरानी सुधा को भी दोनों के संबंधों की जानकारी हो गई थी। आरोप है कि बाद में सुधा ने भी किशन से नजदीकियां बढ़ा लीं। इसके बाद तीनों के बीच तनाव और प्रतिस्पर्धा बढ़ने लगी।

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, किशन का ध्यान अपनी ओर बनाए रखने को लेकर भगवंती और सुधा के बीच विवाद बढ़ता गया। दोनों के बीच पैसों और संबंधों को लेकर भी तनाव रहने लगा था। हालांकि, इन संबंधों से जुड़ी कई बातें पुलिस की जांच में सामने आए दावों पर आधारित थीं।

रंजिश ने लिया गंभीर रूप, हत्या की योजना का आरोप

पुलिस के मुताबिक, सुधा पर आरोप था कि उसने भगवंती को रास्ते से हटाने के लिए किशन के साथ मिलकर साजिश रची। इस मामले में सुधा के दो रिश्तेदारों और किशन के एक दोस्त की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।

बताया गया कि घटना वाले दिन गांव में एक कार्यक्रम आयोजित था और कई लोग उसमें व्यस्त थे। इसी दौरान सुधा कथित तौर पर भगवंती को घर के पीछे झाड़ियों की ओर ले गई। आरोप है कि वहां पत्थर से हमला किया गया और बाद में अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस के अनुसार, भगवंती की हत्या में कई लोगों की भूमिका सामने आई थी।

घटना के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर सबूत छिपाने की कोशिश की। जांच में भगवंती के मोबाइल फोन को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया।

पूछताछ के बाद पांच लोगों की गिरफ्तारी

पुलिस ने किशन समेत पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। मामले में सुधा, उसके दो रिश्तेदारों और किशन के एक दोस्त के नाम सामने आए। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पांचों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में तराना पुलिस ने मामले की जांच की थी। कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन से मिले संकेत जांच में अहम साबित हुए। हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के फैसले से ही मानी जाती है।

मोबाइल कॉल डिटेल बनी जांच की अहम कड़ी

इस मामले में पुलिस के लिए मोबाइल कॉल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण सुराग साबित हुआ। घटना से पहले बार-बार फोन किए जाने और अन्य संदिग्ध नंबरों के बीच संपर्क की जानकारी ने जांच को आगे बढ़ाने में मदद की। इसके बाद पुलिस ने संबंधित लोगों से पूछताछ की और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया।

भगवंती की हत्या का यह मामला रिश्तों में पैदा हुए कथित विवाद और आपसी रंजिश के गंभीर परिणामों की ओर ध्यान खींचता है। पुलिस ने अपनी जांच के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि मामले में आरोपों और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए।

सत्‍य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार सामग्री और पुलिस जांच से जुड़े विवरणों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

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