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पेट में पल रहा था 9 माह के गर्भ जितना ट्यूमर, जटिल सर्जरी से बची युवती की जान

पेट में पल रहा था 9 माह के गर्भ जितना ट्यूमर, जटिल सर्जरी से बची युवती की जान

लखनऊ, अमृत विचार : संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल सर्जरी कर 35 वर्षीय अविवाहित युवती के पेट से नौ माह के गर्भ जितने आकार का विशाल अंडाशय ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि डॉक्टरों ने सूझबूझ और विशेषज्ञता का परिचय देते हुए युवती का गर्भाशय और दूसरा अंडाशय सुरक्षित रखा, जिससे उसकी भविष्य में मां बनने की संभावना भी बरकरार रही।

डॉक्टरों के मुताबिक युवती के बाएं अंडाशय में 28.7×20.4×15.8 सेंटीमीटर आकार का ट्यूमर था, जिसमें करीब 7.5 लीटर तरल पदार्थ भरा हुआ था। यह ट्यूमर मूत्राशय और आंतों पर दबाव बना रहा था, जिससे मरीज को चलनेफिरने, पेट में भारीपन और सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही थी।

संस्थान की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. निधि सिंह के नेतृत्व में डॉ. अंजू रानी, डॉ. मोनिका और डॉ. शिखा की टीम ने सफल ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान दाहिने अंडाशय में भी एक सिस्ट मिली, लेकिन तत्काल जांच में ट्यूमर के कैंसरमुक्त होने की पुष्टि होने पर डॉक्टरों ने केवल प्रभावित अंडाशय और ट्यूमर को हटाया तथा गर्भाशय और दाहिने अंडाशय को सुरक्षित रखा।

डॉ. निधि सिंह ने बताया कि मरीज कई महीनों से पेट फूलने, लगातार भारीपन और सांस लेने में तकलीफ से जूझ रही थी। जांच में पता चला कि बाएं अंडाशय में मौजूद ट्यूमर का आकार लगभग नौ माह के गर्भ के बराबर हो चुका था। ऑपरेशन के दौरान ट्यूमर का नमूना तत्काल जांच के लिए भेजा गया, जहां उसके कैंसरमुक्त होने की पुष्टि हुई।

इस जटिल सर्जरी में एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. निधि तथा पैथोलॉजी विभाग की डॉ. ऋतु वर्मा और डॉ. राम नवल राव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नर्सिंग टीम में दिव्या, सोनाली, वंदना और बीरभान वर्मा ने भी अहम योगदान दिया।

डॉ. निधि सिंह ने कहा कि अंडाशय के ट्यूमर शुरुआती चरण में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं देते और धीरेधीरे काफी बड़े हो सकते हैं। यदि लगातार पेट फूलना, असामान्य भारीपन, पेट का बढ़ना, जल्दी पेट भरना, पेशाब या मल त्याग में परेशानी या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

बीमारी से ज्यादा समाज ने दिया दर्द

परिजनों के मुताबिक अविवाहित युवती के लिए यह बीमारी केवल शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक पीड़ा का कारण भी बन गई थी। अंडाशय में मौजूद विशाल ट्यूमर के कारण उसका पेट नौ माह की गर्भवती महिला जैसा दिखाई देने लगा था। अविवाहित होने के कारण आसपास के लोग तरहतरह की बातें करने लगे। तानों और फब्तियों से आहत युवती ने धीरेधीरे घर से बाहर निकलना ही बंद कर दिया। परिवार के लिए भी यह स्थिति बेहद कष्टदायक थी। एक ओर युवती लगातार पेट फूलने, भारीपन और सांस लेने में तकलीफ झेल रही थी, वहीं दूसरी ओर उसे सामाजिक उपेक्षा और लोगों की गलत धारणाओं का सामना करना पड़ रहा था।

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