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मौत​​​ का इंजेक्शन देने के बाद भी जिंदा बची महिला, एक महीने बाद छलका दर्द; बोली- शरीर ही नहीं, आत्मा भी टूट रही है

मौत​​​ का इंजेक्शन देने के बाद भी जिंदा बची महिला, एक महीने बाद छलका दर्द; बोली- शरीर ही नहीं, आत्मा भी टूट रही है

वाशिंगटन, अमेरिका: अमेरिका के टेनेसी राज्य में मृत्युदंड की सजा देने की कोशिश के बावजूद जीवित बची क्रिस्टा पाइक ने करीब एक महीने बाद अपना पहला सार्वजनिक बयान दिया है। जानलेवा इंजेक्शन दिए जाने के बाद उनकी मौत नहीं हुई, लेकिन वह लगातार शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजर रही हैं। पाइक का कहना है कि उस घटना के बाद से उनके शरीर में दर्द बना हुआ है और बोलने में भी परेशानी हो रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 50 वर्षीय क्रिस्टा पाइक को 30 सितंबर को मृत्युदंड देने की प्रक्रिया के तहत पेंटोबार्बिटल दवा के दो डोज दिए गए थे। हालांकि, इस प्रक्रिया के बावजूद उनकी मौत नहीं हुई। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

‘मेरे शरीर में हर समय दर्द रहता है’

मृत्युदंड की कोशिश के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति बताते हुए पाइक ने कहा कि उस रात के बाद से ऐसा कोई पल नहीं गुजरा, जब उन्हें दर्द न हुआ हो। उनके मुताबिक, शरीर के अलग-अलग हिस्सों में लगातार पीड़ा बनी हुई है।

उन्होंने बताया कि उनकी बांहों, हाथों और गले में दर्द रहता है। उन्हें अब भी बोलने में काफी परेशानी होती है। पाइक ने यह भी कहा कि उनकी तकलीफ केवल शारीरिक नहीं है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी वह गहरे दर्द से गुजर रही हैं।

मौत की तारीख के बाद की जिंदगी के बारे में नहीं सोचा था

पाइक ने बताया कि वह मृत्युदंड की प्रक्रिया के लिए मानसिक रूप से तैयार थीं और उन्हें उम्मीद थी कि सब कुछ शांतिपूर्वक खत्म हो जाएगा। उन्होंने कभी यह कल्पना नहीं की थी कि निर्धारित तारीख के बाद भी उन्हें जीवित रहना पड़ेगा।

लेकिन जब उन्हें होश आया तो उन्होंने खुद को अस्पताल के बिस्तर पर अकेला और उलझन की स्थिति में पाया। पाइक ने इस पूरी घटना के लिए प्रक्रिया में हुई अक्षमता को जिम्मेदार ठहराया है।

1995 में सहपाठी की हत्या के मामले में मिली थी सजा

क्रिस्टा पाइक को 1995 में अपनी 19 वर्षीय सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में मृत्युदंड सुनाया गया था। उस समय पाइक की उम्र 18 साल थी। आरोप था कि उसने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर सहपाठी को प्रताड़ित किया और फिर चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी।

इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद पाइक को मौत की सजा मिली थी। वह अमेरिका में मृत्युदंड पाने वाली सबसे कम उम्र की महिलाओं में शामिल रही हैं।

मृत्युदंड की प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल

जानलेवा इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद पाइक के जीवित बचने और उसके बाद सामने आई उनकी पीड़ा ने अमेरिका में मृत्युदंड की प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। इस घटना ने सजा देने के तरीके, उसकी प्रभावशीलता और कैदियों के साथ होने वाली प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

Satya Report Disclaimer: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों और क्रिस्टा पाइक के सार्वजनिक बयान पर आधारित है। मृत्युदंड की प्रक्रिया में क्या तकनीकी या चिकित्सकीय चूक हुई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

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