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Adhik Maas: अगले महीने से शुरू हो रहा है ‘अधिक मास’, जानिए पुण्य कमाने के इस सर्वोत्तम समय में क्या करें

Satya Report: Adhik Maas Kya Kare:  17 मई से अधिकमास शुरू होने जा रहा है। श्रीहरि भगवान विष्णु को समर्पित अधिकमास सनातन धर्म में बड़ा महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह में किए गए जप, तप और दान का फल अन्य महीनों की तुलना में दस गुना अधिक मिलता है।

Adhik Maas: अगले महीने से शुरू हो रहा है ‘अधिक मास’, जानिए पुण्य कमाने के इस सर्वोत्तम समय में क्या करें
Adhik Maas: अगले महीने से शुरू हो रहा है ‘अधिक मास’, जानिए पुण्य कमाने के इस सर्वोत्तम समय में क्या करें

हालांकि ज्योतिष एवं धर्म गुरु के अनुसार, इस दौरान भले ही शादीविवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। ऐसे में कुछ खास उपाय द्वारा आप भगवान विष्णु के कृपा पात्र बन सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस दौरान आपको किन कामों को करने व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

अधिकमास में क्या करना होता है शुभ?

को धर्मकर्म के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। इस दौरान आप श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु सहस्त्रनाम और राम कथा का पाठ कर सकते हैं, जो बेहद फलदायी होता है। साथ ही इस पवित्र महीने में भगवान श्री कृष्ण और भगवान नरसिंह की कथाओं का पाठ करना या सुनना भी बेहत लाभकारी माना गया है।

अधिक मास में आप रोज सुबह और शाम भगवान विष्णु के मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का 108 बार जप कर सकते हैं।

होगी भगवान विष्णु की असीम कृपा

  • तुलसी दल अर्पित करें

अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा में उन्हें तुलसी दल जरूर अर्पित करें, क्योंकि इसके बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।

  • तांबे के लोटे से तुलसी में जल अर्पित करें

सनातन धर्म में तुलसी में माता लक्ष्मी का वास माना गया है। ऐसे में अधिक मास में रोजाना सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र से तुलसी में जल अर्पित करें।

  • तुलसी माता की परिक्रमा करें

जल चढ़ाने के बाद तुलसी माता की परिक्रमा करें और धन प्राप्ति के लिए इस सिद्ध मंत्र का जप करें – “ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नमः”।

  • जरूरतमंदों को दान दें

अधिक मास में अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान दें। पूरे माह में कमसेकम एक बार किसी भी मंदिर में ध्वजा का दान जरूर करें। साथ ही इस माह में पौधे लगाने और करने से भी व्यक्ति को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

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