
अमेरिका: आमतौर पर प्रमोशन मिलने के बाद कर्मचारियों की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और काम का दबाव भी पहले से ज्यादा हो जाता है। लेकिन एक टेक कर्मचारी की कहानी इससे बिल्कुल उलट है। कर्मचारी का दावा है कि उसे प्रमोशन मिलने के पहले ही दिन उसके मैनेजर और डायरेक्टर कंपनी छोड़कर चले गए। इसके बाद करीब दो साल तक उसकी जिम्मेदारियां स्पष्ट नहीं हुईं, लेकिन सैलरी लगातार मिलती रही। इस दौरान उसे हर साल करीब 2.75 लाख डॉलर यानी लगभग 2.3 करोड़ रुपये से ज्यादा का वेतन मिलता था। कर्मचारी के मुताबिक, इस अवधि में उसे कुल 5 लाख डॉलर से अधिक की सैलरी मिली।
प्रमोशन मिला, लेकिन पहले दिन ही बदल गए हालात
कर्मचारी ने रेडिट के r/corporate फोरम पर अपनी कहानी साझा की। उसके मुताबिक, वह एक बड़ी टेक कंपनी में करीब 10 साल से काम कर रहा था और इस दौरान पांच अलग-अलग भूमिकाएं निभा चुका था।
साल 2025 की शुरुआत में उसे नई टीम में काम करने का अवसर मिला। यह उसके करियर के लिए प्रमोशन जैसा था। लेकिन नई भूमिका शुरू करने के पहले ही दिन कंपनी में बड़ा बदलाव हो गया। जिस मैनेजर और डायरेक्टर ने उसे टीम में शामिल किया था, दोनों ही कंपनी छोड़कर चले गए।
इसके बाद उसकी जिम्मेदारियों को लेकर असमंजस पैदा हो गया। कर्मचारी अपने परिवार के साथ वेस्ट कोस्ट से न्यूयॉर्क भी शिफ्ट हो चुका था। उसे उम्मीद थी कि कुछ समय बाद टीम का कामकाज सामान्य हो जाएगा, लेकिन स्थिति लंबे समय तक स्पष्ट नहीं हुई।
करोड़ों की सैलरी, लेकिन करने के लिए खास काम नहीं
कर्मचारी के अनुसार, उसे सालाना करीब 2.75 लाख डॉलर का वेतन मिल रहा था, लेकिन उसके पास न तो कोई ठोस जिम्मेदारी थी और न ही प्रबंधन की ओर से स्पष्ट निर्देश मिल रहे थे।
शुरुआत में उसने काम तलाशने, कारोबार को समझने और अपनी भूमिका तय करने की कोशिश की। हालांकि, जब उसे लगातार कोई ठोस काम नहीं मिला, तो उसने भी प्रयास करना कम कर दिया।
उसने बताया कि कई बार वह कंपनी के कैफे में बैठकर मनोरंजन करता, न्यूयॉर्क के रेस्टोरेंट में खाना खाने जाता और शहर में घूमता रहता था। बाद में उसने घर से ज्यादा समय बिताना शुरू कर दिया। कभी जिम जाता, कभी अच्छा नाश्ता बनाता तो कभी बालकनी में बैठकर कॉफी पीते हुए समय गुजारता था।
बाहर से उसकी जिंदगी आरामदायक दिखाई देती थी, क्योंकि बिना किसी खास काम के भी उसे अच्छी सैलरी मिल रही थी। लेकिन धीरे-धीरे उसे महसूस होने लगा कि लंबे समय तक खाली बैठना उसके करियर और काम करने की क्षमता पर असर डाल रहा है।
पहले अपराधबोध हुआ, फिर हालात स्वीकार कर लिए
कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में बताया कि शुरुआत में बिना पर्याप्त काम किए सैलरी लेने पर उसे अपराधबोध होता था। पहले वह सेल्स से जुड़ी भूमिका में काम करता था और कंपनी के लिए अच्छी कमाई लाने में योगदान देता था।
लेकिन जब लंबे समय तक उसकी जिम्मेदारियां तय नहीं हुईं, तो उसकी भावनाएं भी बदलने लगीं। उसके मुताबिक, अपराधबोध धीरे-धीरे गुस्से और फिर परिस्थितियों को स्वीकार करने की भावना में बदल गया। इस दौरान उसने अपनी पत्नी के साथ समय बिताया और रोजमर्रा की जिंदगी को आराम से जीने की कोशिश की।
हालांकि, यह स्थिति हमेशा नहीं रही। कई महीनों तक इंटरव्यू देने के बाद उसे उसी कंपनी में एक नई भूमिका मिल गई। अब उसके सामने दोबारा नियमित रूप से काम करने और नई जिम्मेदारियां संभालने की चुनौती थी।
नई भूमिका मिली तो दो साल की निष्क्रियता का एहसास हुआ
कर्मचारी ने बताया कि नई भूमिका शुरू करने के करीब डेढ़ सप्ताह बाद ही उसे लगने लगा कि वह अपने काम में पीछे रह गया है। लंबे समय तक नियमित जिम्मेदारियों से दूर रहने के कारण उसे पहले जैसी तेजी और कार्यक्षमता हासिल करने में मुश्किल महसूस हो रही थी।
उसकी कहानी सामने आने के बाद रेडिट पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे सपनों जैसी नौकरी बताया, जबकि अन्य ने कहा कि लगातार खाली बैठना मानसिक रूप से परेशान कर सकता है। कुछ यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि अगर काम कम हो, तो उस समय का इस्तेमाल नई स्किल सीखने और अपनी पेशेवर योग्यता बढ़ाने में करना चाहिए।
यह मामला बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों की जिम्मेदारियां तय करने और प्रबंधन के बीच तालमेल की अहमियत को भी सामने लाता है। अच्छी सैलरी और खाली समय पहली नजर में आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक काम से दूर रहने का असर कर्मचारी के अनुभव, आत्मविश्वास और करियर पर पड़ सकता है।
डिस्क्लेमर: यह खबर कर्मचारी की रेडिट पोस्ट और उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। उसके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।



