दशहरा 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा. ये दिन सिर्फ एक त्योहार की तरह नहीं सेलिब्रेट किया जाना चाहिए, बल्कि इससे कई सीख भी लेनी चाहिए. जैसे अपने मन से बुराई, नेगेटिविटी, ईर्ष्या, द्वेष अहंकार की भावना का दहन करें. रावण बेहद विद्वान था, लेकिन अपने जीवन में की गई कुछ गलतियां ही उसके विनाश का कारण बनीं. इन गलतियों और रावण की कुछ बातों से अपने जीवन में सबक लें और इस दशहरा अपने आप में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लें.

प्रभु श्रीराम सभी के लिए पूज्य हैं. उनके आदर्शों पर चलकर जीवन को
संयमित बनाया जा सकता है, लेकिन रावण के जीवन की घटनाएं, उसके ज्ञान से भी हम बहुत कुछ सीख सकते हैं. तो चलिए जान लेते हैं कि रावण के जीवन से क्या सबक मिलता है.
अहंकार न करें
रावण के पास बल और शक्तियां थीं. उसके पास परिवार, सेना, संपत्ति और ज्ञान भी था, लेकिन इसी के साथ मन में अहंकार भी था. यही अहंकार उसके पतन का कारण बना और यहां तक कि उसके सभी प्रमुख योद्धाओं से लेकर पुत्रों और भाईयों तक की मृत्यु हो गई थी. भाई विभीषण ने भी अंतत: उसका साथ छोड़ दिया था. हमें इससे सबक लेना चाहिए कि अपनी ताकत से लेकर पैसों तक का अंहकार नहीं करना चाहिए.
ज्ञान पाने के लिए बने विनम्र
रावण ने अपने जीवन में बहुत ज्ञान अर्जित किया था. वह वेदों का ज्ञाता था. इस बात को प्रभु राम भी जानते और स्वीकारते थे. जब रावण मृत्यु शैया पर था तो स्वंय श्री राम ने लक्ष्मण जी को उससे जीवन का कुछ ज्ञान प्राप्त करने को कहा था. पहली बार में लक्ष्मण जी रावण के सिर की तरफ जाकर खड़े हुए थे तो उसने कुछ नहीं कहा. ऐसे में वह वापस लौट आए और राम जी के कहने पर दोबारा जाकर चरणों के पास खड़े हुए तो रावण ने उन्हें बहूमुल्य शिक्षाएं दीं. ये बात हमें सिखाती है कि अगर किसी से ज्ञान लेना हो तो हमेशा विनम्र रहना चाहिए और शिक्षक का सदा सम्मान करना चाहिए.
प्रतिद्वंदी को कम न आंकें
रावण ने कठिन तपस्याओं से शक्तियां अर्जित की थीं. कथाएं कहती हैं, उसने वरदान मांगा था कि वानर और मनुष्य उसे कभी न मार पाएं, क्योंकि वह इन्हें तुच्छ समझता था. जब प्रभु राम लंका आए तो भी रावण ने उन्हें कमतर आंका. इससे हमें सीख लेनी चाहिए कि किसी को तुच्छ न समझें और अपने प्रतिद्वंदी यानी कम्पटीटर को कभी कम नहीं समझना चाहिए.
हमेशा सीखते रहना चाहिए
रावण को नई चीजें सीखने, ज्ञान अर्जित करने, नई चीजों को खोजने और अविष्कार करने में विश्वास रखता था. इसी कारण उसकी अपनी वेधशाला भी थी, जहां वह नए यंत्रों से लेकर अस्त्रशस्त्र के निर्माण और उसे चलाने तक का अभ्यास करता था. यह भी एक बड़ा कारण था कि उसे युद्ध में परास्त करना बेहद मुश्किल था. इससे हमें ये सीख मिलती है कि जीवन सदैव नई चीजें सीखते रहना चाहिए.
शुभ कामों में देरी नहीं करनी चाहिए
कथाएं कहती हैं कि रावण जब अंतिम समय में था तो उसने यह बात स्वीकार की थी, कि अच्छे या शुभ कामों को कभी टालना नहीं चाहिए और बुरे कामों को हमेशा टालने की कोशिश करनी चाहिए. इसी तरह हमें भी अपने जीवन में अच्छे कामों को जल्दी करना चाहिए और गलत कार्यों से दूर रहना चाहिए.



