
मेडिकल डिवाइस की बढ़ती कीमतों और मरीजों पर पड़ने वाले इलाज के खर्च को कम करने के लिए Trade Margin Rationalisation (TMR) एक महत्वपूर्ण नियामकीय व्यवस्था मानी जाती है। इसका उद्देश्य निर्माता से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर तक सप्लाई चेन में लिए जाने वाले व्यापारिक मार्जिन को तर्कसंगत बनाना है, ताकि अत्यधिक मार्जिन के कारण मेडिकल उपकरणों की कीमत अनावश्यक रूप से न बढ़े।
भारत में National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) पहले भी कई जरूरी मेडिकल डिवाइस पर ट्रेड मार्जिन को सीमित कर चुकी है। ऐसे में TMR को लेकर एक बार फिर चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि अगर इसका दायरा बढ़ाया जाता है तो मरीजों और ग्राहकों को मेडिकल उपकरण खरीदने में कितनी राहत मिल सकती है।
क्या है Trade Margin Rationalisation?
Trade Margin Rationalisation यानी TMR ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत मेडिकल डिवाइस की सप्लाई चेन में अलग-अलग स्तरों पर जो व्यापारिक मार्जिन जुड़ता है, उसे एक निर्धारित सीमा के भीतर रखने का प्रयास किया जाता है।
किसी मेडिकल डिवाइस के निर्माण या आयात के बाद वह डिस्ट्रीब्यूटर, स्टॉकिस्ट और रिटेलर जैसे कई स्तरों से होकर ग्राहक तक पहुंचता है। हर स्तर पर जुड़ने वाला मार्जिन अंतिम कीमत को प्रभावित कर सकता है। TMR का उद्देश्य इसी मार्जिन को तर्कसंगत बनाना है, ताकि मरीज को उपकरण के लिए असामान्य रूप से ज्यादा कीमत न चुकानी पड़े।
कोरोना काल में कई मेडिकल डिवाइस पर लागू हुआ था TMR
कोरोना महामारी के दौरान मेडिकल उपकरणों की मांग और कीमतों को देखते हुए NPPA ने कई जरूरी डिवाइस के ट्रेड मार्जिन पर सीमा लगाई थी।
इस व्यवस्था में पल्स ऑक्सीमीटर, ब्लड प्रेशर मॉनिटर, नेब्युलाइजर, डिजिटल थर्मामीटर और ग्लूकोमीटर जैसे उपकरण शामिल थे। इनके ट्रेड मार्जिन को 70 प्रतिशत तक सीमित किया गया था।
ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के लिए भी अलग से ट्रेड मार्जिन कैप लागू किया गया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इसके बाद कुछ उत्पादों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में 252 उत्पादों में से 70 की कीमतों में कमी और कुछ मामलों में खुदरा कीमतों में 54 प्रतिशत तक की गिरावट का उल्लेख किया गया था।
मेडिकल डिवाइस की कीमतों पर पहले से है सरकारी निगरानी
मेडिकल डिवाइस की कीमतों को नियंत्रित और मॉनिटर करने के लिए सरकार पहले से कई व्यवस्थाओं का इस्तेमाल करती है। कुछ अनुसूचित मेडिकल डिवाइस के लिए NPPA सीलिंग प्राइस निर्धारित करती है, जबकि गैर-अनुसूचित उपकरणों की कीमतों पर भी निगरानी रखी जाती है।
मार्च 2026 में सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, गैर-अनुसूचित दवाओं



