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‘700 करोड़ के कथित घोटाले का आरोपी राजीव रंगीला कौन है? नौकर-चायवालों के नाम कंपनियां बनाने का आरोप, अमेरिका से लौटकर किया सरेंडर’

‘700 करोड़ के कथित घोटाले का आरोपी राजीव रंगीला कौन है? नौकर-चायवालों के नाम कंपनियां बनाने का आरोप, अमेरिका से लौटकर किया सरेंडर’

नई दिल्ली: दिल्ली में सामने आए कथित 700 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले में मुख्य आरोपियों में शामिल बताए जा रहे कारोबारी राजीव रंगीला को एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, लंबे समय से फरार चल रहा रंगीला अमेरिका चला गया था और भारत लौटने के बाद उसने जांच एजेंसी के सामने सरेंडर किया।

गिरफ्तारी के बाद उसे राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। ACB अब कथित घोटाले में उसकी भूमिका, पैसों के लेन-देन और उससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही है।

कौन है राजीव रंगीला?

जांच एजेंसी के मुताबिक, राजीव रंगीला फार्मास्युटिकल और मेडिकल उपकरणों से जुड़े कारोबार में सक्रिय रहा है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी मेडिकल उपकरण खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान उसका नाम सामने आया।

ACB का आरोप है कि रंगीला इस पूरे मामले में प्रमुख लाभार्थियों में से एक था। जांच के दौरान दिल्ली के अलावा हरियाणा और उत्तराखंड में उसकी संपत्तियों का भी पता चलने की बात सामने आई है।

2014 में चुनाव भी लड़ चुका है रंगीला

राजीव रंगीला का नाम सिर्फ कारोबारी गतिविधियों के कारण ही चर्चा में नहीं रहा है। वह राजनीति में भी किस्मत आजमा चुका है।

जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2014 में उसने हरियाणा की करनाल विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह चुनाव जीतने में सफल नहीं रहा।

क्या है 700 करोड़ रुपये का कथित घोटाला?

मामला दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के तहत मेडिकल उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी सामान की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है।

मेडिकल उपकरण, दवाएं और अन्य जरूरी सामान सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदने वाली एजेंसियों की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद विजिलेंस विभाग ने जांच शुरू की और संबंधित कार्यालयों में कार्रवाई की गई।

जांच आगे बढ़ने पर मामला एंटी करप्शन ब्रांच तक पहुंचा।

टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप

ACB का आरोप है कि राजीव रंगीला ने कुछ सरकारी अधिकारियों, निर्माताओं और बिचौलियों के साथ मिलकर कथित तौर पर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया।

जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी खरीद में फायदा हासिल करने के लिए कई कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इनमें से कुछ कंपनियां ऐसे लोगों के नाम पर बनाई गईं, जिनका मेडिकल उपकरण कारोबार से सीधा संबंध नहीं था।

ACB का दावा है कि इन नामों में रंगीला के कर्मचारी और यहां तक कि चाय बेचने वाले लोग भी शामिल थे। एजेंसी के मुताबिक, कंपनियां अलग-अलग लोगों के नाम पर थीं, लेकिन उनका वास्तविक नियंत्रण और संचालन कथित तौर पर रंगीला के हाथ में था।

कई कंपनियों के जरिए सरकारी ऑर्डर हासिल करने का आरोप

जांच में एफ मेड डिवाइसेज, टेक्नोक्रेट्स, राजश्री, आशी सर्जिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स और एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम सामने आने की बात कही गई है।

ACB का आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए टेंडर प्रक्रिया में पहले से तय कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। एजेंसी के मुताबिक, टेंडर की शर्तें इस तरह तैयार की जाती थीं कि संबंधित कंपनियों को सरकारी खरीद के ऑर्डर मिल सकें।

हालांकि, इन सभी आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

दो मशीनों के टेंडर से 448 मशीनों तक पहुंचा मामला

जांच में एक टेंडर को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ACB के मुताबिक, शुरुआत में केवल दो पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद के लिए टेंडर जारी किया गया था, लेकिन बाद में इसी प्रक्रिया के जरिए 448 मशीनों की खरीद का ऑर्डर दिए जाने का आरोप है।

इसके अलावा सीआर रेडियोग्राफी, एनेस्थीसिया मशीन, अन्य विशेष मेडिकल उपकरणों और ओरल डिहाइड्रेशन सॉल्यूशन की खरीद में भी कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है।

जांच शुरू होने के बाद अमेरिका चला गया था रंगीला

ACB के मुताबिक, मामले में कुछ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद राजीव रंगीला भारत से बाहर चला गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि वह अमेरिका पहुंच गया था और काफी समय से भारत नहीं लौटा था।

उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया। इसके अलावा गैर-जमानती वारंट और उद्घोषणा की कार्रवाई भी की गई थी।

बाद में भारत लौटने के बाद रंगीला जांच एजेंसी के सामने पहुंचा और सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया

गिरफ्तारी के बाद राजीव रंगीला को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। ACB ने अदालत से उसकी पुलिस हिरासत की मांग की।

जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि रंगीला से कथित घोटाले की पूरी कार्यप्रणाली, अन्य आरोपियों की भूमिका, पैसों के लेन-देन, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के बारे में पूछताछ करनी है।

अदालत ने ACB की दलीलों पर विचार करने के बाद राजीव रंगीला को 29 सितंबर तक चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

वहीं, बचाव पक्ष ने पुलिस हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि जांच काफी आगे बढ़ चुकी है और मामले में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।

अब पुलिस हिरासत के दौरान जांच एजेंसी कथित घोटाले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, कंपनियों के संचालन और अन्य आरोपियों के साथ रंगीला के कथित संबंधों की जांच करेगी।

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