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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय, अनिल मिश्रा के बाद अब गोविंद देव पर SIT की नजर, क्या कसेगा शिकंजा?

अयोध्या स्थित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक बड़ी खबर सामने आ रही है. चंपत राय, अनिल मिश्रा के बाद अब विशेष जांच दल की नजर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि पर है. सूत्रों के मुताबिक, SIT ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की भूमिका की जांच की. जांच में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव के साथसाथ कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारियों को भी शामिल किया गया है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय, अनिल मिश्रा के बाद अब गोविंद देव पर SIT की नजर, क्या कसेगा शिकंजा?

सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और चढ़ावे के प्रबंधन की व्यवस्था की गहन जांचपड़ताल की गई. कोषाध्यक्ष के प्रशासनिक और वित्तीय कर्तव्यों की गहनता से समीक्षा की गई. साथ ही संबंधित रिकॉर्ड की जांच और कई लोगों से पूछताछ भी की गई है. हालांकि अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि SIT ने अब किनकिन लोगों से कितने समय तक पूछताछ की है. सूत्रों के मुताबिक SIT ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की है.

स्वामी गोविंद देव गिरि की भूमिका पर विशेष ध्यान

बता दें कि 13 जून को तीन अधिकारियों वाली SIT का गठन किया गया. टीम ने पहली बार 15 जून को अयोध्या का दौरा किया. सरकार को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद जुलाई में अयोध्या में दो दिनों तक विस्तृत जांच की गई. जुलाई के दौरे के दौरान स्वामी गोविंद देव गिरि की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया. इस दौरान SIT ने अयोध्या के वैदेही भवन का भी दौरा किया. उनके ठहरने और की गई व्यवस्थाओं के बारे में महंतों और सेवकों से पूछताछ की गई.

गोविंद देव के तथ्यों और रिकॉर्ड का सत्यापन

SIT की टीम ने स्वामी गोविंद देव गिरि के ठहरने की व्यवस्था और अन्य संबंधित पहलुओं पर जानकारी जुटाई गई. चढ़ावे के प्रबंधन और वित्तीय निगरानी में कोषाध्यक्ष की भूमिका का आकलन किया गया. स्वामी गोविंद देव गिरि से संबंधित तथ्यों और रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया. SIT के दो दिनों के भीतर सरकार को अंतिम रिपोर्ट सौंपने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट मिलने पर सरकार इसे सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी. अंतिम रिपोर्ट से ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिकाओं और जवाबदेही का पता चलेगा.

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