राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है. इस बीच दो आरोपियों से पुलिस की पूछताछ पूरी हुई. बुधवार की सुबह 8 बजे आरोपी रामाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव को अयोध्या पुलिस ने रिमांड पर लिया और फैजाबाद पुलिस लाइन पहुंची, जहां उनसे पूछताछ शुरू हुई. पुलिस की ये पूछताछ काफी लंबी चली. अयोध्या पुलिस ने दोनों आरोपियों को रात 9 बजे वापस जेल में ले जाकर छोड़ा. पुलिस ने सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर मिश्रा दोनों के लिए अलगअलग सवालों की लिस्ट बना रखी थी, जिसके आधार पर उनसे कई सवाल पूछे गए.

रामाशंकर मिश्रा से पूछताछ के आधार पर उसे किराए के मकान पर ले जाया गया और वहां से पुलिस ने कुछ डॉक्यूमेंट्स बरामद किए. उसके घर पर लगे CCTV का DVR भी पुलिस लेकर गई. रामाशंकर के पिता और भाई से भी पुलिस ने पूछताछ की है. इसके अलावा रामाशंकर का एक दोस्त जो फोटोग्राफी का काम करता है, उससे भी पुलिस ने पूछताछ की. पुलिस ने तफ्तीश के बाद रामाशंकर मिश्रा का कमरा सील कर दिया है.
रामाशंकर मिश्रा ने पुलिस के सामने खोले राज
आरोप है कि रामाशंकर मिश्रा भी अनुकल्प मिश्रा से ही जुड़ा हुआ था और सब मिलजुल कर ही चोरी की घटना को अंजाम देते थे. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस की पूछताछ में रामाशंकर मिश्रा टूट गया और सारे राज खोल दिए. उसने कहा कि ‘कभी नहीं सोचा था कि ये सब उजागर हो जाएगा’. दरअसल, रामाशंकर मिश्रा के पास से 7 लाख 32 हजार रुपये की बरामदगी हुई थी. इसके अलावा उसके पास से चांदी के सिक्के और आभूषण भी बरामद किए गए थे. पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने भी जमीन में पैसे लगाए थे.
सुभाष श्रीवास्तव के पास से कोई बरामदगी नहीं
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पास से अब तक कोई बरामदगी नहीं हुई है. हालांकि उससे भी बुधवार को लंबी पूछताछ हुई. पुलिस का कहना है कि कुछ फैक्ट्स वेरिफाई किए जा रहे हैं. जिस तरह अयोध्या पुलिस रामाशंकर मिश्रा को उसके ठिकाने पर लेकर गई थी, उस तरह सुभाष श्रीवास्तव को पुलिस किसी लोकेशन पर लेकर नहीं गई. उससे सिर्फ पूछताछ की गई.
क्या करते थे रमाशंकर मिश्र और सुभाष श्रीवास्तव?
इस चंदा चोरी मामले में आरोपी सुभाष श्रीवास्तव एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी है, जो मंदिर के नकदी गिनने के कामों की देखरेख करता था, जबकि रामाशंकर मिश्रा की जिम्मेदारी चढ़ावे को काउंटिंग रूम तक पहुंचाने की थी. करीब 5 साल पहले उसे राम मंदिर में नौकरी पर रखा गया था. शुरुआत में वह मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की फोटो खींचकर भी कमाता था, लेकिन बाद में उसे चढ़ावे को काउंटिंग रूम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दे दी गई थी.


