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मां की मौत के बाद ‘अकेलेपन में हुआ ऑनलाइन प्यार’, 1300 मील दूर प्रेमिका से मिलने पहुंचा शख्स, सामने आई ऐसी सच्चाई कि उड़ गए होश

मां की मौत के बाद ‘अकेलेपन में हुआ ऑनलाइन प्यार’, 1300 मील दूर प्रेमिका से मिलने पहुंचा शख्स, सामने आई ऐसी सच्चाई कि उड़ गए होश

ब्राजील: अकेलापन इंसान को कभी-कभी ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देता है, जिनकी कीमत उसे अपनी पूरी जमा-पूंजी गंवाकर चुकानी पड़ती है। ब्राजील में रहने वाले 49 वर्षीय मजदूर एदिमार रोचा मार्टिंस के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। मां के निधन के बाद वह अकेलापन महसूस कर रहे थे। इसी दौरान सोशल मीडिया पर उनकी मुलाकात एक ऐसी महिला की प्रोफाइल से हुई, जिसे वह अपनी जिंदगी का प्यार समझ बैठे। उससे मिलने की उम्मीद में वह करीब 1300 मील यानी 2000 किलोमीटर का सफर तय करके पहुंच गए, लेकिन वहां पहुंचने के बाद जो सच्चाई सामने आई, उसने उनके सारे सपने तोड़ दिए।

सोशल मीडिया पर मिली सपनों की रानी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एदिमार की नजर सोशल मीडिया पर जेसिका ओलिविया नाम की एक महिला की प्रोफाइल पर पड़ी। इस प्रोफाइल पर फार्महाउस और गांव की जिंदगी से जुड़ी पोस्ट साझा की जाती थीं। महिला के करीब तीन लाख से अधिक फॉलोअर्स बताए गए थे। उसकी पोस्ट में लोगों को फार्महाउस पर आकर साथ रहने के लिए भी आमंत्रित किया जाता था।

मां को खोने के बाद अकेले पड़ चुके एदिमार को लगा कि शायद उन्हें अपना जीवनसाथी मिल गया है। धीरे-धीरे वह इस ऑनलाइन पहचान से भावनात्मक रूप से जुड़ गए और महिला से मिलने की उम्मीद पालने लगे।

36 घंटे बस में सफर कर पहुंचे मिलने

रिपोर्ट के अनुसार, जेसिका ने एदिमार से मिलने के बाद यात्रा का खर्च लौटाने और आर्थिक मदद करने की बात कही थी। इस भरोसे के साथ उन्होंने उससे मिलने का फैसला किया। वह उत्तरी ब्राजील के इम्पेराट्रिज से बस में सवार हुए और करीब 36 घंटे का सफर करके बेलो होरिजोन्टे पहुंच गए।

इस लंबी यात्रा में उनकी जमा-पूंजी और तनख्वाह का बड़ा हिस्सा खर्च हो गया। उन्हें उम्मीद थी कि वहां पहुंचकर उनकी मुलाकात उस महिला से होगी, जिसके साथ वह नई जिंदगी शुरू करना चाहते थे।

पता पूछा तो खुल गया पूरा राज

बेलो होरिजोन्टे पहुंचने के बाद एदिमार ने स्थानीय लोगों को महिला की तस्वीर दिखाकर उसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की। हालांकि, उन्हें जेसिका ओलिविया नाम की उस महिला के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।

इसके बाद उन्हें पता चला कि जिस महिला को वह असली समझ रहे थे, उसकी ऑनलाइन पहचान कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार की गई थी। यानी जिस खूबसूरत महिला के साथ भविष्य के सपने देख रहे थे, उससे मिलने की उनकी उम्मीद ही एक झूठी डिजिटल पहचान पर टिकी थी।

पैसे खत्म हुए तो प्रशासन ने की मदद

जब एदिमार को इस धोखे का एहसास हुआ, तब तक उनके पास खाने और रहने तक के लिए पर्याप्त पैसे नहीं बचे थे। ऐसी मुश्किल स्थिति में बेलो होरिजोन्टे की प्रवासी सहायता सेवा ने उनकी मदद की। उन्हें भोजन और रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ ऑनलाइन ठगी से बचने के बारे में भी सलाह दी गई।

यह घटना बताती है कि इंटरनेट पर किसी की तस्वीर, लोकप्रियता या मीठी बातों के आधार पर उस पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना भारी पड़ सकता है। AI की मदद से बनाई गई नकली पहचानें लोगों को भावनात्मक रूप से अपने जाल में फंसा सकती हैं। इसलिए किसी ऑनलाइन परिचित से मिलने के लिए लंबी यात्रा करने या पैसे भेजने से पहले उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। घटना से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

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