जयपुर
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा एवं कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथसाथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है।

उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र प्राप्त करने के लिए भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स अनिवार्य है। राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया को और सरल एवं सुलभ बनाने के उद्देश्य से अधिकतम आयु सीमा की शर्त को विलोपित कर दिया है। इससे अधिक से अधिक योग्य व्यक्ति इस प्रशिक्षण में भाग ले सकेंगे।
अब ग्राम सेवा सहकारी समितियों तथा क्रयविक्रय सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों के लिए विशेष रूप से 15 दिवसीय प्रमाण पत्र प्रशिक्षण आयोजित कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। कृषि आयुक्तालय के आदेशानुसार संबंधित जिले के केवीके, कृषि विश्वविद्यालय एवं मान्यता प्राप्त संस्थानों पर 32 व्याख्यान ऑनलाइन तथा 10 प्रैक्टिकल ऑफलाइन के माध्यम से यह प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
इससे संबंधित समितियों के उन व्यवस्थापकों को, जो अभी तक इस कोर्स से वंचित रहे हैं, शीघ्र प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया जाएगा, ताकि वे खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र प्राप्त कर सकें। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उर्वरक की उपलब्धता सुगम होगी, सहकारी समितियों का व्यवसाय सुदृढ़ होगा तथा किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक समय पर मिल सकेगा। संस्थाओं द्वारा ऑनलाइन ट्रेनिंग एवं आयु सीमा हटाने की लंबे समय से मांग की जा रही थी
यह पहल मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में “आपणो अग्रणी राजस्थान” की भावना के अनुरूप है, जिसमें कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल के मार्गदर्शन में कृषि विभाग सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाकर व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं सुलभ बना रहा है।
राज्य सरकार का यह कदम नियामकीय आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ साथ सहकारी समितियों के लिए व्यवसाय करने को आसान बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।


