एयरप्लेन में सफर करते हुए देखा होगा होगा कि टेकऑफ और लैंडिंग से पहले लाइट्स को धीमा कर दिया जाता है. ज्यादातर यात्री इस प्रक्रिया को आरामदायक अनुभव मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. इसके पीछे गंभीर और सुरक्षा कारण हैं. विमान सुरक्षा के आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा हादसे टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान होते हैं. यानी एक बात साफ है कि लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान पायलट और क्रू पर सबसे ज्यादा दबाव होता है. यही वजह है कि सुरक्षा कारणों से इस दौरान लाइट्स को धीमा किया जाता है. अब इसके पीछे का कारण भी समझ लेते हैं.

जब कोई इंसान तेज रोशनी से अचानक अंधेरे में आता है, तो उसकी आंखों के सामने अंधेरा रहता है.आंखों की रोशनी को सामान्य होने में समय लगता है. यानी कम से कम 5 से 20 मिनट का समय लगता है. अगर विमान में बिजली अचानक चली जाए तो केबिन में पूरी तरह से अंधेरा छा जाएगा. यानी तेज रोशनी में बैठे यात्री को रास्ता ढूंढना मुश्किल हो जाएगा.
ऐसे हालातों से बचने के लिए क्रू पहले ही लाइट्स को धीमा कर देते हैं. ताकि यात्री कम रोशनी में देखने के आदी हो जाएं. अगर इमरजेंसी की नौबत आती है तो बिना किसी देरी के अपने आसपास की चीजें देख सकें और बाहर निकलने का रास्ता तलाश सकें.
इमजरेंसी एग्जिट साफ दिखना है जरूरी
विमान में इमरजेंसी एग्जिट के रास्तों पर खास तरह की रोशनी होती है, यह ऐसे मैटेरियल से बनी होती है जो अंधेरे में चमकती है यानी बिजली पूरी तरह बंद हो जाए फिर भी ये रास्ते चमकते रहें और यात्री उस रास्ते पर चलकर बाहर निकल सके.
अमेरिका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन और यूरोप की एविएशन सेफ्टी एजेंसी दोनों के नियमों में यह तय है कि एग्ज़िट का रास्ता अंधेरे में भी साफ दिखना चाहिए, लेकिन अगर पहले से केबिन में तेज रोशनी होगी, तो यह हल्की चमक दिखना मुश्किल हो जाएगा. यही कारण है कि लाइट्स धीमी रखने से ये एग्ज़िट साइन ज्यादा असरदार ढंग से नजर आते हैं और यात्री जल्दी रास्ता पहचान पाते हैं.
विमान में सुरक्षा कारणों से लाइट को धीमा किया जाता है.
यह भी एक वजह
फ्लाइट सेफ्टी फउंडेशन की स्टडी रिपोर्ट कहती है, अगर विमान में गैस या धुआं भर जाए तो यात्री अपनी दिशा पहचानने की क्षमता को 83 प्रतिशत तक खो सकते हैं. ऐसे हालात में अगर रोशनी पहले से कम हो और एग्ज़िट साइन साफ चमक रहे हों, तो यात्रियों के लिए सही दिशा में बढ़ना आसान हो जाता है.
खिड़कियों के पर्दे खोलने का निर्देश
टेकऑफ और लैंडिंग के समय क्रू यात्रियों से खिड़की के पर्दे खोलने के लिए कहता है. इसके पीछे भी यही सुरक्षा कारण है. बाहर की प्राकृतिक रोशनी अंदर आने से क्रू और यात्री दोनों को बाहरी हालात का अंदाजा बेहतर तरीके से लग पाता है. अगर इंजन में कोई गड़बड़ी हो या पंखों में कुछ असामान्य हालात दिखे तो खिड़की से बाहर देखकर समय रहते उसकी जानकारी मिल सकती है.
ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब यात्रियों ने खिड़की से कोई तकनीकी खराबी देखी और क्रू को इसकी जानकारी दी. इस तरह समय रहते सही फैसला लिया जा सका.



