
दुनिया भर में अंतिम संस्कार से जुड़ी अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं। कुछ रस्में ऐसी भी हैं, जो पहली नजर में बेहद अजीब लगती हैं। ऐसी ही एक परंपरा चीन और ताइवान के कुछ हिस्सों में प्रचलित है, जहां किसी प्रियजन की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के दौरान नकली नोट जलाए जाते हैं।
चीन और ताइवान में निभाई जाती है यह परंपरा
चीन और ताइवान के कई इलाकों में लोग अपने मृत परिजनों की विदाई के समय विशेष प्रकार के कागजी नोट जलाते हैं। इन्हें ‘जॉस पेपर’ (Joss Paper) या ‘घोस्ट मनी’ (Ghost Money) कहा जाता है। ये असली मुद्रा नहीं होती, बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बनाए गए प्रतीकात्मक नोट होते हैं।
क्यों जलाए जाते हैं नकली नोट?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा एक दूसरी दुनिया में प्रवेश करती है, जहां उसे भी जीवनयापन के लिए धन और अन्य जरूरी वस्तुओं की आवश्यकता होती है। इसलिए परिजन इन प्रतीकात्मक नोटों को जलाकर मृत आत्मा तक समृद्धि पहुंचाने की कामना करते हैं।
सिर्फ नोट ही नहीं, कागज की दूसरी चीजें भी होती हैं अग्नि को समर्पित
इस परंपरा में केवल कागजी नोट ही नहीं, बल्कि कागज से बने घर, कार, कपड़े, मोबाइल फोन और अन्य उपयोगी वस्तुओं के प्रतीकात्मक मॉडल भी जलाए जाते हैं। मान्यता है कि ये वस्तुएं परलोक में मृतक तक पहुंच जाती हैं और उसे किसी चीज की कमी नहीं रहती।
पूर्वजों के सम्मान से जुड़ी है यह परंपरा
यह रस्म चीनी संस्कृति में पूर्वजों के सम्मान और स्मरण का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। जैसे भारत में श्राद्ध और पितृ तर्पण की परंपरा है, उसी तरह चीन में जॉस पेपर जलाने की परंपरा मृतकों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का एक सांस्कृतिक माध्यम मानी जाती है।



