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Pitru Dosh से हैं परेशान? Ashadh Amavasya पर ये Divine Tips दिलाएंगे सभी संकटों से मुक्ति

Pitru Dosh से हैं परेशान? Ashadh Amavasya पर ये Divine Tips दिलाएंगे सभी संकटों से मुक्ति
हिंदू धर्म अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। सालभर में 12 अमावस्या तिथियां पड़ती है, इन्हीं में से आषाढ़ी अमावस्या का अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अमावस्या के दिन पितरों का निमित्त तर्पण किया जाता है और यदि किसी व्यक्ति के घर में पितृ दोष है, तो यह दिन ऐसे दोष दूर करने के लिए काफी शुभ माना गया है।
कल यानी आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को मनाई जाएगी। अगर आप पितरों की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो आप इन जरुरी उपाय को जरुर करें। ऐसा करने से आपके जीवन के सभी पितृ दोष दूर हो जाएंगे और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलेगी। आइए आपको इन उपायों के बारे में बताते हैं
ब्रह्म मुहूर्त में उठें और सूर्य को अर्घ्य दें
अमावस्या वाले दिन आपको ब्रह्म मुहूर्त में उठना है और स्नान आदि करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। आप एक तांबे के लोटे में थोड़े से काले तिल डालें और एक चुटकी सिंदूर या रोली डालें और फिर इस जल को अर्पित करें। जब आप सूर्य देव को जल देते हैं, तो उस समय ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इस उपाय से आपके जीवन में सूर्य देव की कृपा बनी रहेगी और पूर्वजों की नाराजगी भी दूर हो जाएगी।
दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके पूर्वजों के नाम का तर्पण करें
इस दिन पूर्वजों के लिए किया तर्पण विशेष रुप से फलदायी होता है। अगर आप आषाढ़ अमावस्या के दिन एक लोटे में जल लेकर उसमें एक चुटकी काले तिल मिलाएं और दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके पितरों के नाम से तर्पण करें। इस उपाय से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है और घर से पिृत दोष दूर हो जाते हैं।
पीपल के पेड़ में शाम के समय दीपक जलाएं
हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ में पितरों का वास माना जाता है। इसलिए आप आषाढ़ अमावस्या के दिन शाम के समय पीपल के पेड़ पास सरसों का तेल का दीपक जलाएं और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें, जिससे आपको पितृ दोषों से मुक्ति मिल जाएगी और पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है।
जरूरतमंदों को दान करें
अमावस्या वाले दिन दान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार ही जरुरतमंदों को वस्त्र और अन्न का दान जरुर करें। ऐसा करने से आपको शुभ फलों की प्राप्ति होती है और पूर्वजों  की आत्मा को शांति मिलती है। बता दें कि, ऐसा करने से कुंडली से पितृ दोष भी दूर होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

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