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बंगाल: भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही लागू होगी आयुष्मान योजना, इससे कितनी अलग है ममता की ‘स्वास्थ्य साथी स्कीम’

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी की सरकार के पतन के बाद अब भाजपा की सरकार शनिवार को शपथ लेगी. यह पहला अवसर होगा, जब बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी. चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने ममता बनर्जी की सरकार पर केंद्रीय योजनाओं को राज्य में लागू नहीं करने का आरोप लगाया था.

बंगाल: भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही लागू होगी आयुष्मान योजना, इससे कितनी अलग है ममता की ‘स्वास्थ्य साथी स्कीम’
बंगाल: भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही लागू होगी आयुष्मान योजना, इससे कितनी अलग है ममता की ‘स्वास्थ्य साथी स्कीम’

बंगाल में जीत के बाद दिल्ली में भाजपा मुख्यालय से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया कि बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट योजना को मंजूरी दी जाएगी. इस तरह से देश के अन्य राज्यों की तरह अब बंगाल में भी आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी और इसके साथ ही ममता बनर्जी की स्वास्थ्य साथी योजना खत्म हो जाएगा.

बता दें कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार शुरुआत में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन शामिल हुई थी. इसके तहत परिवारों को 5 लाख रुपए तक का हॉस्पिटलाइजेशन का कवर प्रदान करना था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार के साथ टकराव के बाद बंगाल सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य साथी योजना लागू करने का ऐलान कर दिया. इस योजना के तहत पांच लाख रुपए तक हॉस्पिटलाइजेशन का कवर दिया गया.

ममता और केंद्र के बीच क्यों हुआ टकराव?

पश्चिम बंगाल उन राज्यों में से एक था, जिसने शुरू में आयुष्मान योजना को अपनाया था, लेकिन 2019 में यह कहते हुए इससे बाहर हो गया ममता बनर्जी की सरकार ने आरोप लगाया कि इस स्कीम का नाम बदलकर आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कर दिया गया और प्रधानमंत्री की तस्वीर वाले बेनिफिशियरी कार्ड बांटे गए.

फंडिंग मॉडल के लिए केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में कॉस्टशेयरिंग की जरूरत थी. ममता बनर्जी की सरकार ने आरोप लगाया कि इस योजना में राज्य को कम से कम 40 परसेंट खर्च उठाना पड़ रहा है. ममता बनर्जी की दलील थी कि चूंकि राज्य ने वित्तीय बोझ शेयर ज्यादा था. इसलिए केंद्र को अकेले क्रेडिट का दावा नहीं करना चाहिए.

आयुष्मान भारत बनाम स्वास्थ्य साथी

इसके बजाय, ममता बनर्जी की राज्य सरकार ने अपनी स्वास्थ्य साथी स्कीम जारी रखी, जिसमें हर परिवार को हर साल 5 लाख रुपये का कवर भी दिया गया, हालांकि केंद्र सरकार की ओर से नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की ओर से बारबार राज्य सरकार से अनुरोध किया गया, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार नहीं मानी.

हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार ऐसी अकेली सरकार रही, जिसने आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं की. हालांकि पहले ओडिशा और दिल्ली की सरकार भी इसमें शामिल नहीं थी, लेकिन बाद में बीजेपी की सरकार बनने के बाद वे क्रमश: 2024 और 2025 में शामिल हो गये.

आयुष्मान भारत योजना में क्याक्या?

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है जो सेकेंडरी और टर्शियरी केयर हॉस्पिटलाइजेशन के लिए हर परिवार को हर साल 5 लाख रुपए का कवर देती है, जिनमें से लगभग आधे प्राइवेट हैं.

2026 तक, इस स्कीम को बढ़ाकर 70 साल और उससे ज्यादा उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को कवर किया गया है. इसमें सर्जरी, चिकित्सा उपचार, निदान और दवाओं की लागत शामिल है.

कॉम्प्रिहेंसिव कवरेज: इसमें सर्जरी, मेडिकल ट्रीटमेंट, डायग्नोस्टिक्स और दवाओं का खर्च शामिल है. वे परिवार जो पहले से ही सोशियोइकोनॉमिक कास्ट सेंसस 2011 में लिस्टेड हैं, इसमें शामिल हैं.

कैशलेस ट्रीटमेंट: पूरे भारत में किसी भी एम्पैनल्ड पब्लिक या प्राइवेट हॉस्पिटल में कोई अपफ्रंट पेमेंट की जरूरत नहीं है.

बढ़ी हुई उम्र सीमा: 70+ उम्र के नागरिकों को अब एक अलग हेल्थ कार्ड मिलता है जिसमें अगर उनका परिवार पहले से एनरोल है तो 5 लाख रुपए का एक्स्ट्रा टॉपअप कवर मिलता है, या अगर उनका परिवार एनरोल नहीं है तो फैमिली बेसिस पर 5 लाख रुपए का नया कवर मिलता है.

पहले से मौजूद बीमारियां: एनरोलमेंट के पहले दिन से ही सभी पहले से मौजूद बीमारियां कवर की जाती हैं.

बड़ा हॉस्पिटल नेटवर्क: देश भर में 36,000 से ज्यादा हॉस्पिटल एम्पैनल्ड हैं, जिनमें बड़ी प्राइवेट चेन और सभी सरकारी फैसिलिटी शामिल हैं. इसमें खास डेप्रिवेशन क्राइटेरिया के आधार पर .

आयुष्मान योजना से स्वास्थ्य साथी कैसे अलग?

इसके उलट, स्वास्थ्य साथी, जिसे शुरू में कम इनकम वाले परिवारों के लिए बनाया गया था, बाद में पूरी आबादी को कवर करने के लिए बढ़ाया गया. ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, फरवरी 2026 तक, इस राज्य स्कीम ने 2,900 से ज्यादा पैनल वाले अस्पतालों में लगभग 2.45 करोड़ परिवारों, या 8.51 करोड़ बेनिफिशियरी को कवर किया, जिससे राज्य की 74 परसेंट से ज्यादा आबादी तक पहुंचा जा सका. स्वास्थ्य साथी स्कीम ममता बनर्जी की सरकार ने 30 दिसंबर, 2016 को लॉन्च की थी.

स्वास्थ्य साथी योजना की एक और खासियत थी कि यह योजना परिवार की प्रमुख महिला के नाम से जारी की जाती है. इसमें बच्चे और परिवार के सभी सदस्य कवर किये जाते हैं. इस योजना के तहत पांच लाख रुपए का हेल्थ इंश्यूरेंस का कवरेज है.

स्वास्थ्य साथी योजना की पूरी फंडिंग राज्य सरकार की ओर से की जाती है, जबकि आयुष्मान भारत में केंद्र और राज्य की भागीदारी 60 और 40 की है. लेकिन क्या केंद्र की स्कीम से बाहर निकलने से पश्चिम बंगाल को नुकसान हुआ? कुछ विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं है. उनका कहना है कि स्वास्थ्य साथी एक लोकप्रिय स्कीम रही है जिसका पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है और इसका स्कोप असल में केंद्र के प्रोग्राम से बड़ा है क्योंकि यह सभी को टारगेट करता है, चाहे उनकी इनकम कुछ भी हो. यह कार्ड राज्य के सभी नागरिकों और परिवार को दिया गया. इसमें कोई इनकम की बाध्यता नहीं थी.

हालांकि प्राइवेट अस्पतालों द्वारा गैरजरूरी सर्जरी, डबल बिलिंग और दूसरी गड़बड़ियां इसमें रही, जो आयुष्मान भारत समेत सभी सरकारी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम में हैं. वहीं, स्वास्थ्य साथी योजना बंगाल की योजना है. इस कारण दूसरे राज्यों में इस योजना का लाभार्थियों को लाभ नहीं मिलता है, जबकि आयुष्मान योजना का लाभ देश के अन्य राज्यों में भी मिलता है.

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