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एशियाई बाजारों का बुरा हाल, दक्षिण कोरिया का कोस्पी धड़ाम, चिप कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली

बुधवार, 19 अगस्त का दिन एशियाई शेयर बाजारों के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा. ग्लोबल मार्केट में मची उथलपुथल का सीधा असर एशियाई शेयरों पर देखने को मिला है. सेमिकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली, लगातार बढ़ते बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की चढ़ती कीमतों ने निवेशकों का मूड पूरी तरह से बिगाड़ दिया है. इस घबराहट की शुरुआत दरअसल अमेरिकी शेयर बाजार से हुई, जहां तकनीक से जुड़े शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई. अमेरिका का टेकहैवी इंडेक्स नैस्डैक 1.33 प्रतिशत तक लुढ़क गया, जिसके बाद दुनिया भर के बाजारों में जोखिम भरे निवेश को लेकर खलबली मच गई.

चिप कंपनियों पर टूटा पहाड़

शेयर बाजार में इस ताजा गिरावट की सबसे बड़ी मार सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने वाली कंपनियों पर पड़ी है. दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर एसके हाइनिक्स के शेयरों में लगभग 7 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है. ये गिरावट तब आई जब अमेरिका के एक प्रमुख सेमीकंडक्टर इंडेक्स में रातोंरात 5 प्रतिशत का गोता लगा. इसका सीधा असर एशियाई बाजारों के इंडेक्स पर हुआ.

दक्षिण कोरिया का मुख्य शेयर सूचकांक कोस्पी 6.37 प्रतिशत तक धड़ाम हो गया. इसके अलावा, जापान का निक्केई 225 और टोपीक्स इंडेक्स भी 2 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए. एमएससीआई एशिया पैसिफिक बेंचमार्क में भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई. हालांकि, इस भारी उथलपुथल के बीच करेंसी मार्केट काफी हद तक शांत रहा. जापानी येन 159.49 प्रति डॉलर पर रहा, जबकि ऑफशोर युआन 6.7465 के स्तर पर स्थिर बना रहा.

बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई बाजार की धड़कनें

शेयर बाजार के निवेशकों के लिए केवल टेक कंपनियों का गिरना ही चिंता का विषय नहीं है. सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड ने भी निवेशकों के पसीने छुड़ा दिए हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.75 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो साल 2025 की शुरुआत के बाद का सबसे उच्च स्तर है. वहीं, 30 साल की बॉन्ड यील्ड उछलकर 5.34 प्रतिशत तक जा पहुंची.

ऐसा ऊंचा स्तर 2007 के बाद से कभी नहीं देखा गया था, हालांकि बाद में यह थोड़ा सुधरकर 5.28 प्रतिशत पर आ गई. बाजार में महंगाई को लेकर लगातार बनी हुई चिंता, सरकारों द्वारा भारी मात्रा में कर्ज लेना और नए कर्ज जारी होने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है. इस बढ़ते दबाव के कारण हालात ऐसे बन गए कि कम से कम सात संभावित कर्ज जारी करने वाली कंपनियों को अपने उच्च श्रेणी के बॉन्ड बेचने का प्लान फिलहाल टालना पड़ गया.

युद्ध के साये में कच्चे तेल की आग

एक तरफ शेयर और बॉन्ड बाजार में चिंता का माहौल है, तो दूसरी तरफ खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल इकॉनमी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. संयुक्त अरब अमीरात ने जानकारी दी है कि ईरान की तरफ से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलें उसके समुद्री इलाके में आकर गिरी हैं. मई के बाद से खाड़ी देश पर तेहरान का यह पहला ज्ञात हमला है. अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर चल रही रस्साकशी ने कच्चे तेल के बाजार में आग लगा दी है. इसी भूराजनीतिक तनाव की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 0.3 प्रतिशत बढ़कर 91.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी 0.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 85.31 डॉलर के पार पहुंच गया है.

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