
मात्र तीन साल की उम्र में जुआना रामिरेज को मेक्सिको सिटी के विशाल बोस्के दे चापुल्टेपेक पार्क से दिनदहाड़े किडनैप कर लिया गया था. परिवार पार्क में घूम रहा था. माता-पिता ने क्षणभर के लिए हाथ छोड़ा और बच्ची गायब हो गई. किडनैपर्स ने उसे नया नाम रोसियो दिया और नया जन्मदिन बताकर अपने साथ रख लिया.
27 लंबे सालों तक जुआना उन्हें अपनी असली मां-बाप समझती रही. फिर एक तस्वीर ने सब कुछ बदल दिया. घटना 1 अक्टूबर 1995 की है. लोरेना रामिरेज अपने पति, तीन बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पार्क घूमने गई थी. चिड़ियाघर देखकर जब वे विदाई ले रहे थे तभी छोटी जुआना बीच से गायब हो गई. लोरेना ने बताया कि उन्होंने और पति ने क्षणभर के लिए हाथ छोड़ा था. जब मुड़े तो बच्ची वहां नहीं थी. उन्होंने तुरंत खोज शुरू की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई. लोरेना ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी थी. 24 साल तक वे बेटी को खोजती रहीं.
बदल दी थी पहचान
किडनैपर्स ने जुआना को टोलुका ले जाकर रखा. उन्होंने उसे बताया कि उसका जन्मदिन 1 अक्टूबर 1995 है यानी जिस दिन उसे उठाया गया. असली जन्मदिन 16 जून था. नया नाम रोसियो रखा गया. पड़ोसियों ने बाद में बच्ची को बताया कि ये लोग उसके जैविक माता-पिता नहीं हैं. जब उसने पूछा तो “मां” ने कहा कि उन्होंने उसे पार्क में अकेला घूमते पाया और गोद ले लिया. जुआना ने बताया कि उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता था. 17 साल की उम्र में वह घर छोड़कर भाग निकली और बाद में शादी कर ली. सालों बाद सोशल मीडिया और मिसिंग पर्सन पोस्टर की मदद से राज खुला. जुआना (रोसियो) ने अपनी बचपन की तस्वीर अपलोड की थी. लोरेना की दूसरी बेटी मारिया जोस ने वह फोटो देखी और समानता देखकर संपर्क साधा. डीएनए टेस्ट में 99.99 प्रतिशत मैच पाया गया. 2022 में मां-बेटी का भावुक पुनर्मिलन हुआ.
मिल गई खोई बेटी
लोरेना ने कहा, “मैंने तीन साल की बच्ची खोई और 30 साल की महिला को पाया. उसके जीवन के कई पड़ाव मुझसे छीन लिए गए.” जुआना ने मां को देखते ही कहा, “आप मेरी मां हैं.” दोनों ने गले लगाया. लोरेना ने बताया कि 27 साल की पीड़ा अकल्पनीय थी लेकिन भगवान ने फिर मिलने का मौका दिया. दोनों ने खोया समय पूरा करने का संकल्प लिया. जुआना अब शादीशुदा हैं और खुद मां बन चुकी हैं. इस मामले में किडनैपर्स की बाद में गिरफ्तारी भी हुई. मेक्सिको की अधिकारियों ने जोड़ी को गिरफ्तार किया. लंबे समय तक चले इस अपराध ने पूरे समाज को झकझोर दिया. यह कहानी बाल अपहरण के खतरे को रेखांकित करती है. दिनदहाड़े भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी बच्चे असुरक्षित हो सकते हैं. माता-पिता को बच्चों पर निरंतर नजर रखनी चाहिए. पार्क, मेले या बाजार में हाथ कभी ना छोड़ें. मिसिंग चाइल्ड के मामलों में तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराएं और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें.



