
हमारा बीजी लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खानपान और जंक फूड का अत्यधिक सेवन अक्सर शरीर में हानिकारक पदार्थों (Toxins) को जमा कर देता है। जब शरीर में टॉक्सिन्स की मात्रा बढ़ने लगती है, तो इसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र, त्वचा और ओवरऑल एनर्जी लेवल पर दिखाई देने लगता है। आयुर्वेद में माना गया है कि समय-समय पर शरीर और रक्त (Blood) को डिटॉक्स करना सेहतमंद रहने के लिए बेहद जरूरी है। आयुर्वेदिक डॉक्टर सलीम जैदी के अनुसार, प्रकृति में कई ऐसे औषधीय और कड़वे पत्ते (Bitter Herbs) उपलब्ध हैं जो प्राकृतिक ब्लड प्यूरीफायर का काम करते हैं। इन पत्तों को सही तरीके से उबालकर पीने से न केवल खून में जमा टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, बल्कि मुहांसों और पाचन से जुड़ी समस्याओं से भी राहत मिलती है।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के मुताबिक नीम के कुछ पत्तों को अगर उबालकर उसका पानी बनाकर पिया जाए तो आप आसानी से अपने खून और बॉडी को साफ कर सकते हैं। बहुत ज्यादा ऑयली खाना, पॉल्यूशन और अनहेल्दी लाइफस्टाइल हमारी बॉडी में टॉक्सिन को जमा कर देता है। ये टॉक्सिन हमारे लिवर और किडनी पर दबाव डालते हैं जिसकी वजह से बॉडी कमजोर और बीमार होने लगती है। नीम एक ऐसा पत्ता है जो नेचुरल डिटॉक्सीफायर है, जिसका सेवन करने से खून साफ होता है और बॉडी में मौजूद अशुद्धियां बाहर निकलती हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि नीम का सेवन कैसे बॉडी को डिटॉक्स करता है।
नीम कैसे खून को साफ करता है?
आयुर्वेद में नीम को रक्तशोधक यानी रक्त को शुद्ध करने में सहायक माना जाता है। इसकी प्रकृति कड़वी और शीतल मानी जाती है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से यह शरीर में बढ़ी हुई गर्मी और पित्त दोष को संतुलित करने में मदद कर सकता है। इसी वजह से नीम का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से स्किन संबंधी समस्याओं में भी किया जाता रहा है। नीम की कड़वी प्रकृति को शरीर की सफाई और अतिरिक्त पित्त को शांत करने में उपयोगी माना जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से इसी कारण नीम को डिटॉक्स और रक्त शोधन के लिए उपयोग किया जाता है।
नीम को पारंपरिक रूप से कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कुछ एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो खून को नेचुरल तरीके से साफ करने में मदद करते हैं। नीम का सेवन शरीर में बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों और कई तरह के हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता हैं। नीम के पत्तों का सेवन लिवर और किडनी में जमा होने वाली अशुद्धियों को दूर करने में भी असरदार है। हेल्दी बॉडी में लिवर और किडनी अपने-अपने तरीके से रक्त को फिल्टर और शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। इसके लिए किसी खास ‘डिटॉक्स ड्रिंक’ की जरूरत आमतौर पर नहीं होती।
नीम में कौन-से गुण पाए जाते हैं?
नीम की पत्तियों में कई जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। रिसर्च में नीम के कुछ एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव देखे गए हैं। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से इन गुणों के कारण नीम का इस्तेमाल शरीर की शुद्धि और स्किन संबंधी समस्याओं में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। आयुर्वेद में ब्लड और स्किन हेल्थ को आपस में जोड़ा जाता है। इसलिए नीम को फोड़े-फुंसी, मुंहासे, खुजली और कुछ अन्य स्किन से जुड़ी समस्याओं में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।
आयुर्वेद के मुताबिक नीम का सेवन कैसे करें?
अगर आप खून को और बॉडी को डिटॉक्स करना चाहते हैं तो सुबह खाली पेट 3 से 5 नीम की पत्तियां चबालें। अगर आप इन कड़वे पत्तों को नहीं चबा सकते तो आप 5 से 7 पत्तियों को पानी में उबालकर छानकर उसका पानी पी लें। इस पानी को कुछ दिनों तक रोजाना पीने से बॉडी हेल्दी रहती है, बॉडी डिटॉक्स होती है और किडनी अपना काम दुरुस्त तरीके से करती है।
नीम का सेवन करते समय सावधानी
नीम के अधिक सेवन से नुकसान हो सकता है और कुछ दवाओं या स्वास्थ्य स्थितियों में यह उपयुक्त नहीं हो सकता। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और किसी बीमारी की दवा लेने वाले लोगों को नीम का नियमित सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: नीम को ‘ब्लड डिटॉक्स’ या किसी बीमारी के इलाज का प्रमाणित उपाय नहीं माना जाना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लें।



