
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री से विशेष सुरक्षा व्यवस्था की मांग की गई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर प्रेमानंद महाराज को जेड प्लस सुरक्षा देने की अपील की है। इसके साथ ही आश्रम से जुड़े कुछ आरोपों और हालिया घटनाओं की जांच कराने की मांग भी की गई है।
पत्र में आश्रम की व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें दावा किया गया है कि आश्रम से जुड़े लोगों के बीच मतभेद और गुटबाजी की स्थिति बन रही है। साथ ही कुछ बाहरी लोगों की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आश्रम परिसर के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की मांग की गई है, ताकि हालिया घटनाओं से जुड़े किसी भी मामले की जांच में इनका इस्तेमाल किया जा सके।
आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर उनके परिजनों द्वारा प्रदर्शन किए जाने की खबरों के बीच यह मांग सामने आई है। पुलिस अलग-अलग मामलों में बच्चों की तलाश और घटनाक्रम की जांच कर रही है।
प्रस्तावित प्रदर्शन भी किया गया निरस्त
इस बीच आश्रम के बाहर समर्थकों की ओर से प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को फिलहाल निरस्त कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर कार्यक्रम को लेकर अपील की जा रही थी, लेकिन बाद में बैठक के बाद प्रदर्शन नहीं करने का निर्णय लिया गया।
बताया गया कि संत प्रेमानंद महाराज और आश्रम से जुड़े वरिष्ठ संतों की ओर से किसी तरह की भीड़ या धरना आयोजित नहीं करने की सलाह दी गई थी। इसके बाद समर्थकों ने प्रस्तावित कार्यक्रम को रोकने का फैसला किया।
दो लापता युवकों के मिलने का दावा
इसी बीच आश्रम से जुड़े मामलों में लापता बताए जा रहे दो युवकों के सकुशल मिलने की जानकारी सामने आई है। इनमें एक युवक को बरामद किए जाने के बाद पुलिस की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है, जबकि दूसरे युवक के प्रयागराज क्षेत्र से मिलने की बात सामने आई है।
दोनों मामलों में परिजनों को राहत मिली है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों युवक किन परिस्थितियों में घर से दूर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम के पीछे क्या वजह रही।
प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने की मांग और आश्रम से जुड़े आरोपों के बीच अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।



