
अमरोहा: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के चर्चित बावनखेड़ी नरसंहार के दोषी सलीम की करीब 18 साल बाद अपने गांव में वापसी हुई है। प्रयागराज की नैनी जेल में बंद सलीम को अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए सात दिन की पैरोल मिली है। बुधवार रात वह पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच बावनखेड़ी पहुंचा। इतने वर्षों बाद उसे देखने के लिए गांव के लोगों में उत्सुकता रही।
सलीम को पैरोल के दौरान निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। उसकी सुरक्षा के लिए प्रयागराज से आए पुलिसकर्मियों के साथ हसनपुर कोतवाली की पुलिस भी तैनात की गई है। मुलाकात की व्यवस्था भी सुरक्षा नियमों के अनुसार की गई है, जिसके तहत एक बार में सीमित संख्या में लोगों को उससे मिलने दिया जा रहा है।
बहन की शादी में शामिल होने के लिए मिली पैरोल
परिवार के मुताबिक, सलीम अपनी बहन की शादी में शामिल होने और उसे विदा करने के लिए गांव आया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि बहन से उसका बचपन से लगाव रहा है और वह उसकी शादी के मौके पर मौजूद रहना चाहता था।
रिपोर्ट के अनुसार, 25 अक्टूबर को बहन की बरात हसनपुर से आने वाली है। इसी समारोह में शामिल होने के लिए सलीम को सात दिन की पैरोल दी गई है। उसने कहा है कि वह पैरोल की शर्तों का पालन करेगा और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों के अनुसार ही रहेगा।
सफेद कुर्ता-पायजामा और जेब में पेंसिल ने खींचा ध्यान
बुधवार रात करीब 10 बजे पुलिस सलीम को लेकर हसनपुर कोतवाली पहुंची। वहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे सुरक्षा घेरे में गांव ले जाया गया।
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, सलीम सफेद कुर्ता-पायजामा पहने हुए था और उसकी जेब में पेंसिल लगी थी। करीब 18 साल पहले जेल जाने के समय वह कम उम्र का युवक था, जबकि अब उसके व्यक्तित्व और बातचीत में बदलाव नजर आया। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से बातचीत के दौरान वह संयमित दिखाई दिया।
2008 के बावनखेड़ी हत्याकांड में हुई थी सजा
बावनखेड़ी नरसंहार 14-15 अप्रैल 2008 की रात हुआ था। इस मामले में सलीम और उसकी प्रेमिका शबनम को शिक्षक शौकत अली के परिवार के सात सदस्यों की हत्या का दोषी ठहराया गया था। इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था और लंबे समय तक यह मामला चर्चा में रहा।
सलीम को दोषसिद्धि के बाद फांसी की सजा सुनाई गई थी। वह प्रयागराज की नैनी जेल में बंद है। बहन की शादी में शामिल होने के लिए मिली पैरोल के दौरान पुलिस उसकी गतिविधियों और सुरक्षा पर नजर रखेगी।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। पैरोल की अवधि और शर्तों से संबंधित जानकारी संबंधित प्रशासनिक आदेशों के अधीन है।



