अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर में भक्तों की तरफ से दान दिए जाने वाले चढ़ावे की चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है. सीएम योगी आदित्यनाथ के कड़े रूख के बाद एसआईटी की जांच शुरू हो गई है. ट्रस्ट के सदस्य की तरफ से 8 नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर के बाद हिरासत में भी लिया गया है. इस बीच हुए बड़े डेवलपमेंट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य डॉक्टर अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. आरएसएस और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े यह दोनों शख्स प्रभावशाली भूमिका में रहे. इनमें से चंपत राय जहां प्रोफेसर थे, वहीं अनिल मिश्रा डॉक्टर के पद पर थे. इसके साथ ही मामले की शिकायत कराने वाले रिटायर्ड अधिकारी कौन हैं? आइए जानते हैं इनसे जुड़ी अहम बातें.

केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे चंपत राय
चंपत राय की बात करें तो वह छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़े हुए हैं. साल 1946 में यूपी के बिजनौर जिला के नगीना में बंसल वैश्य परिवार में जन्मे चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव बने. उन पर ट्रस्ट की मुख्य जिम्मेदारी रही. 1975 में देश में लगे आपातकाल के दौरान वह जेल भी गए. वह धामपुर के एक डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे. हालांकि आरएसएस से जुड़ने और आपातकाल के दौरान जेल जाने के बाद उन्होंने पूरी तरह से खुद को सामाजिक कार्यों की तरफ मोड़ दिया.
वह संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए.
चंपत राय का जुड़ाव विश्व हिंदू परिषद से हुआ और वह अशोक सिंघल और विनय कटियार जैसे नेताओं के विश्वस्त बने. वह राम मंदिर आंदोलन में जुड़ गए. वीएचपी में उन्होंने केंद्रीय सचिव, संयुक्त महासचिव, अंतर्राष्ट्रीय महासचिव और संगठन उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया. यहां रणनीति और संगठन के साथ काम करने का अनुभव हासिल हुआ. चंपत राय ने मंदिरमस्जिद विवाद के दौरान कई सारे दस्तावेज और रिकॉर्ड्स को जुटाया, जिससे हिंदू पक्ष के वकीलों को अदालती लड़ाई में मदद मिली.
वह पिछले लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन के साथ जुड़े हुए थे, जिस वजह से अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने 2020 में मंदिर निर्माण और मैनेजमेंट की देखरेख के लिए 15 सदस्यों वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था. चंपत राय को इसमें अहम दायित्व सौंपा गया.
डॉक्टर से स्वयंसेवक बने अनिल मिश्रा
डॉक्टर अनिल मिश्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता और राम मंदिर आंदोलन के दौर के कारसेवक हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने जब राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और पूजा की थी तब अनिल मिश्रा ही यजमान बने थे. उन्होंने सातों दिन इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया था. वह अयोध्या में आरएसएस के जिला कार्यवाह की भूमिका का निर्वहन कर रहे थे. इसके बाद विभाग कार्यवाह और फिर प्रांत कार्यवाह की जिम्मेदारी संभाली. उन्हें जिम्मेदार और कर्मठ कार्यकर्ता का दर्जा हासिल है.
शांत और गंभीर स्वभाव के अनिल मिश्रा दरअसल सरकारी होमियोपैथी डॉक्टर थे. वह अपने पेशे के साथ ही साथ संघ की जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाते रहे. मूल रूप से गोंडा जिले के महबूबपुर गांव के निवासी अनिल मिश्रा की पोस्टिंग अयोध्या और अगलबगल के इलाकों में ही होती रही. 2017 में रिटायर होने के बाद आरएसएस में उनकी भूमिका के साथ ही जिम्मेदारी भी बढ़ गई.
डॉक्टर मिश्र अयोध्या की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी में रहते हैं. वह आरएसएस पदाधिकारी होने के साथ ही होम्योपैथिक बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके हैं. सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद वह रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी भी बने. वह इस ट्रस्ट के 11 स्थायी सदस्यों में शामिल रहे.
किन लोगों पर हुई FIR?
SIT की सिफारिश के बाद जिन लोगों पर एफआईआर करवाई गई, उनमें चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, टिन्नू के भतीजे मनीष याद, गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, चढ़ावे की गणना करने वाले अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, अविनाश शुक्ला शामिल हैं. ये सभी ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खास थे. चढ़ावे और नगद रकम की गिनती के काम से जुड़े हुए थे.
शिकायत कराने वाले कृष्ण मोहन कौन हैं?
राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले में ट्रस्ट से जुड़े कृष्ण मोहन ने ही शिकायत दर्ज कराई है. मूल रूप से हरदोई के निवासी कृष्ण मोहन ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कई सालों तक काम किया. वह बाद में भारतीय वन सेवा में चयनित हुए और महाराष्ट्र कैडर में सेवा में रहे. रिटायरमेंट के बाद वह सामाजिक गतिविधियों में शामिल हुए. 2025 के फरवरी महीने में ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उन्हें सदस्य बनाया गया.



