नई कारों की कीमत लगातार बढ़ने की वजह से अब बहुत से लोग सेकेंड हैंड यानी पुरानी कारों की ओर रुख कर रहे हैं. कम बजट में अच्छी और प्रीमियम कार मिल जाना इस ऑप्शन को और भी लोकप्रिय बना रहा है. लेकिन यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है कि सिर्फ बाहर से चमकदार दिखने वाली कार हमेशा अच्छी नहीं होती. अगर खरीदते समय सही जांच न की जाए तो बाद में मरम्मत और मेंटेनेंस पर काफी ज्यादा खर्च उठाना पड़ सकता है.

इंजन चेक करना बेहद जरूरी
खरीदते समय सबसे पहले उसका इंजन चेक करना बेहद जरूरी है. इंजन किसी भी गाड़ी का दिल होता है और इसी पर पूरी परफॉर्मेंस निर्भर करती है। कार स्टार्ट करके उसकी आवाज ध्यान से सुनें. अगर इंजन से असामान्य आवाज आ रही हो या धुआं ज्यादा निकल रहा हो, तो यह खराबी का संकेत हो सकता है. ऐसे मामलों में किसी अनुभवी मैकेनिक से जांच करवाना समझदारी भरा कदम होता है.
सर्विस रिकॉर्ड और पुराने बिल
इसके बाद कार का और कुल रनिंग की जांच करनी चाहिए. कई बार ओडोमीटर में छेड़छाड़ करके कम किलोमीटर दिखा दिए जाते हैं, जिससे खरीदार को गलत जानकारी मिलती है. इसलिए सिर्फ मीटर पर भरोसा न करें, बल्कि सर्विस रिकॉर्ड और पुराने बिलों को भी देखें. इससे आपको असली उपयोग का अंदाजा मिल जाएगा.तीसरी अहम बात है सर्विस हिस्ट्री. जिस कार की समयसमय पर सर्विस होती रही है, वह आमतौर पर बेहतर स्थिति में रहती है. सर्विस रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि गाड़ी में पहले क्याक्या रिपेयर हुए हैं और उसकी देखभाल कितनी अच्छी तरह की गई है.
RC, इंश्योरेंस और PUC
आजकल कारों में इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स भी काफी ज्यादा होते जा रहे हैं. इसलिए खरीदने से पहले सभी सिस्टम जैसे टचस्क्रीन, कैमरा, सेंसर, एसी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक फंक्शन ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं, यह जरूर जांचें. इनकी मरम्मत में बाद में काफी खर्च आ सकता है.इसके अलावा जरूरी डॉक्यूमेंट्स जैसे RC, इंश्योरेंस और PUC को भी ध्यान से जांचना चाहिए.
टेस्ट ड्राइव लेना भी जरूरी है, जिससे आपको कार की असली कंडीशन का बेहतर अंदाजा मिल सके.थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है और आप अपने बजट में एक अच्छी, भरोसेमंद सेकेंड हैंड कार खरीद सकते हैं.



