
सूर्य के सबसे करीब स्थित और सौरमंडल के सबसे छोटे ग्रह बुध (Mercury) को लेकर वैज्ञानिकों के सामने आज भी कई बड़े सवाल हैं। इस रहस्यमयी ग्रह को करीब से समझने के लिए यूरोप और जापान का संयुक्त अंतरिक्ष मिशन बेपीकोलंबो (BepiColombo) अब अपनी लंबी यात्रा के बेहद महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है।
करीब एक दशक से चल रही इस अंतरिक्ष यात्रा के बाद मिशन का अंतरिक्ष यान बुध के और करीब पहुंच रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस अभियान के जरिए ग्रह की सतह, आंतरिक संरचना, चुंबकीय क्षेत्र और वहां होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों के बारे में कई अहम जानकारियां मिल सकती हैं।
अंतिम चरण में पहुंचा बेपीकोलंबो मिशन
बेपीकोलंबो मिशन के दो अंतरिक्ष यान अपने क्रूजर से अलग होकर बुध की कक्षा में प्रवेश की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। इस प्रक्रिया की पुष्टि अंतरिक्ष यान से आने वाले रेडियो संकेतों के जरिए की गई।
मिशन की निगरानी यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के नियंत्रण केंद्र से की जा रही है। वैज्ञानिकों और मिशन टीम के लिए यह चरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब अंतरिक्ष यान अपने अंतिम लक्ष्य यानी बुध की कक्षा में पहुंचने की तैयारी कर रहा है।
योजना के मुताबिक, बेपीकोलंबो को नवंबर में बुध की कक्षा में प्रवेश करना है। इसके बाद दिसंबर में दोनों अंतरिक्ष यान अलग-अलग हो जाएंगे और अलग-अलग कक्षाओं से बुध का अध्ययन शुरू करेंगे।
2018 में हुई थी मिशन की शुरुआत
बेपीकोलंबो को वर्ष 2018 में लॉन्च किया गया था। इसका नाम इतालवी गणितज्ञ और वैज्ञानिक ज्यूसेपे ‘बेपी’ कोलंबो के सम्मान में रखा गया है। उन्होंने बुध के अध्ययन से जुड़े नासा के मेरिनर-10 मिशन की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बुध की खोज आसान नहीं है। सूर्य के बेहद करीब होने के कारण किसी अंतरिक्ष यान के लिए वहां पहुंचना और फिर उसकी कक्षा में स्थिर होना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। इसी वजह से बेपीकोलंबो को सीधे बुध की ओर भेजने के बजाय कई ग्रहों के पास से फ्लाईबाई कराकर उसकी गति और ऊर्जा को नियंत्रित किया गया।
मिशन को बुध की कक्षा तक पहुंचने के लिए कुल नौ फ्लाईबाई करनी पड़ीं। जनवरी 2025 में इसकी आखिरी फ्लाईबाई हुई थी। इस दौरान बुध की सतह की कई शानदार तस्वीरें भी सामने आई थीं।
आखिर बुध ग्रह वैज्ञानिकों के लिए इतना बड़ा रहस्य क्यों है?
बुध आकार में छोटा है, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए इससे जुड़े सवाल बेहद बड़े हैं। यह सूर्य के सबसे करीब स्थित ग्रह है और इसकी सतह पर विशाल प्रभाव गड्ढे, ज्वालामुखीय मैदान तथा दूसरी अनोखी संरचनाएं मौजूद हैं।
वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि बुध का निर्माण किस तरह हुआ और सूर्य के इतने करीब होने के बावजूद इसकी वर्तमान संरचना कैसे बनी।
इसके अलावा ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र और इसके अंदर मौजूद भारी धात्विक कोर को लेकर भी कई सवाल हैं।
बुध की सतह पर मौजूद हैं रहस्यमयी ‘हॉलोज’
बेपीकोलंबो मिशन बुध की सतह पर मौजूद ‘हॉलोज’ नाम की गड्ढेनुमा संरचनाओं का भी अध्ययन करेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन संरचनाओं के निर्माण और उनके धीरे-धीरे बदलने के पीछे सतह से कुछ खनिजों के वाष्पीकृत होने जैसी प्रक्रियाएं जिम्मेदार हो सकती हैं।
मिशन से मिलने वाला नया डेटा यह समझने में मदद कर सकता है कि बुध की सतह समय के साथ किस तरह बदल रही है।
एक ही ग्रह पर आग जैसी गर्मी और जमा देने वाली ठंड
बुध की सबसे हैरान करने वाली विशेषताओं में से एक यहां का तापमान है। ग्रह के कुछ हिस्सों में तापमान करीब 427 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं, इसके ध्रुवीय क्षेत्रों में ऐसी गहरी क्रेटर संरचनाएं हैं जहां सूर्य की रोशनी कभी नहीं पहुंचती।
इन स्थायी रूप से छायादार इलाकों में बर्फ मौजूद होने के प्रमाण मिले हैं। यानी एक तरफ बुध की सतह बेहद गर्म है, जबकि दूसरी तरफ उसी ग्रह के कुछ हिस्सों में पानी की बर्फ लंबे समय से जमी हो सकती है।
मिशन में क्या-क्या होगा अध्ययन?
बेपीकोलंबो के अलग-अलग वैज्ञानिक उपकरण बुध के कई पहलुओं का अध्ययन करेंगे। इनमें मुख्य रूप से—
- बुध के चुंबकीय क्षेत्र की जांच
- ग्रह के घने और भारी आंतरिक भाग का अध्ययन
- सतह की संरचना और खनिजों का विश्लेषण
- ग्रह पर होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों की जांच
- सतह पर मौजूद रहस्यमयी संरचनाओं का अध्ययन
- बुध के निर्माण और विकास से जुड़े सवालों के जवाब तलाशना
शामिल हैं।
सूर्य के बेहद करीब होने के कारण इस मिशन के अंतरिक्ष यान को अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ेगा। मिशन को तैयार करने वाले इंजीनियरों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि बेपीकोलंबो से मिलने वाला डेटा बुध के साथ-साथ शुरुआती सौरमंडल के निर्माण को समझने में भी मदद करेगा। अगर मिशन सफल रहता है, तो यह सूर्य के सबसे करीब स्थित इस छोटे लेकिन रहस्यमयी ग्रह के कई अनसुलझे सवालों के जवाब खोजने में अहम भूमिका निभा सकता है।



