
लखनऊ, अमृत विचार: दिलकुशामल्हौर के बीच 8.20 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन की 447 करोड़ रुपये की परियोजना में गोंमती नदी पर बन रहे तीन बड़े रेलवे पुलों के निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं। पुलों में लगाए जा रहे घटिया स्टील गर्डर, गिट्टी, सीमेंट और सरिया से कभी भी हादसे हो सकते हैं। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव के सख्त रुख से ठेका कंपनी जीएस एक्सप्रेस समेत संबंधित इंजीनियरों और अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरु हो गई है।
रेलवे ने 202526 के बजट में लखनऊ के दिलकुशामल्हौर तीसरी लाइन की परियोजना के लिए 447 करोड़ की धनराशि दी थी। परियोजना के तहत मेजर ब्रिज संख्या 466, 468 और 469 का निर्माण समेत संबंधित कार्य जीएस एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड कर रहा है। इन पुलों से जुड़े काम में सबस्ट्रक्चर, सुपरस्ट्रक्चर, पीएससी स्लैब और ओपन वेब स्टील गर्डर समेत अन्य संबद्ध कार्य शामिल हैं। मामले में एक विधायक ने रेल मंत्री से शिकायत में आरोप लगाया है कि काम में इस्तेमाल होने वाला स्टील गर्डर घटिया गुणवत्ता का है। इसके अलावा गिट्टी, सीमेंट और लोहे की सरिया भी निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं होने और आरडीएसओ के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित रेलवे ट्रैक/बैलास्ट से जुड़े कार्यों में मौके पर निरीक्षण और गुणवत्ता की निगरानी करने वाला पीडब्ल्यूआई, असिस्टेंट इंजीनियर और सीनियर डिविजनल इंजीनियर स्तर के अधिकारियों को काम की स्थिति की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी से जुड़े लोगों की ओर से संबंधित लोगों को कथित रूप से धमकाया जा रहा है।
बैलास्ट में भी मानक से अलग गिट्टी का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि रेलवे बैलास्ट में ऐसी गिट्टी मिलाकर इस्तेमाल की जा रही है, जो आरडीएसओ के विनिर्देशों के अनुरूप नहीं है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इससे रेलवे को नुकसान हो रहा है और निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। रेल मंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया है, कारण कि शिकायत सामान्य निर्माण कार्य को लेकर नहीं, बल्कि गोंमती नदी पर बनने वाले तीन रेलवे पुलों और नई तीसरी रेल लाइन से संबंधित है। ऐसे में इस्तेमाल होने वाली स्टील, कंक्रीट और ट्रैक निर्माण सामग्री की गुणवत्ता तकनीकी जांच का विषय है।
मामले की जांच करेंगे रेलवे के चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर
उत्तर रेलवे के विजिलेंस विभाग के डिप्टी चीफ विजिलेंस ऑफिसर रजत कुमार ने मामले की जांच के लिए चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर प्रभाकर भारती को आदेश दिए हैं। कहा है कि चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर व्यक्तिगत रूप से शिकायतकर्ता से मिलने के साथ जांच प्रक्रिया तेजी से पूरा करें। अब जांच में टेंडर की शर्तों और स्वीकृत तकनीकी मानकों के अलावा साइट पर इस्तेमाल सामग्री, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, स्टील और कंक्रीट की जांच, बैलास्ट की गुणवत्ता, साइट निरीक्षण, माप पुस्तिका, भुगतान और संबंधित अधिकारियों की निगरानी जैसे बिंदु महत्वपूर्ण होंगे।
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