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सोशल​​​ मीडिया पर दोस्ती का​​​​​ दिया झांसा, फिर कमरे में बुलाकर रची ब्लैकमेलिंग की साजिश; वर्दी वालों की भूमिका ने बढ़ाया शक

सोशल​​​ मीडिया पर दोस्ती का​​​​​ दिया झांसा, फिर कमरे में बुलाकर रची ब्लैकमेलिंग की साजिश; वर्दी वालों की भूमिका ने बढ़ाया शक

यह कहानी एक ऐसे जाल की थी, जिसकी शुरुआत सोशल मीडिया पर हुई एक साधारण-सी दोस्ती से हुई थी। सामने से बातचीत करने वाली युवती खुद को भरोसेमंद दिखाती थी। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ती, मिलने की बात होती और फिर ऐसा मोड़ आता, जहां युवक खुद को एक गंभीर आरोप और बदनामी के डर के बीच घिरा हुआ पाता था।

इस पूरे खेल में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कथित साजिश में कुछ ऐसे लोगों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई थी, जिनसे आम लोग कानून की मदद की उम्मीद करते हैं।

सोशल मीडिया पर शुरू हुआ दोस्ती का खेल

एक शहर में रहने वाली युवती ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग नामों से युवकों से संपर्क करना शुरू किया था। वह बातचीत के दौरान दोस्ती और सहानुभूति का भरोसा दिलाती थी। सामने वाला युवक जब उस पर विश्वास करने लगता, तो वह मुलाकात का प्रस्ताव रखती थी।

कथित तौर पर युवती ने इसके लिए एक किराए का कमरा भी इस्तेमाल किया था। मुलाकात के बाद कहानी अचानक बदल जाती थी। युवक पर गंभीर आरोप लगाने की धमकी दी जाती और मामला दबाने के नाम पर पैसों की मांग की जाती थी।

इस खेल में अकेली नहीं थी युवती

जांच में सामने आया था कि युवती के साथ दो युवक भी कथित रूप से जुड़े हुए थे। उनकी भूमिका मुलाकातों और पैसों की मांग से जुड़े घटनाक्रम में बताई गई थी।

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब दो पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे। आरोप था कि वे कथित तौर पर युवती और उसके साथियों के संपर्क में थे और पूरे घटनाक्रम में उनकी मौजूदगी ने पीड़ितों पर दबाव बढ़ाया था।

एक फोन कॉल ने खोल दी पूरी कहानी

घटना के दिन एक ग्रामीण परिवार के पास अचानक फोन आया। फोन करने वाला युवक घबराया हुआ था। उसने बताया कि परिवार का बेटा और उसका एक रिश्तेदार बड़ी मुसीबत में फंस गए थे। उन्हें एक तय जगह पर एक लाख रुपये लेकर पहुंचने को कहा गया था।

यह सुनकर परिवार के लोग परेशान हो गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा क्या हो गया, जिसके कारण इतनी बड़ी रकम मांगी जा रही थी। फिर भी बेटे की चिंता में परिवार का एक सदस्य बताए गए पते पर पहुंच गया।

कमरे के अंदर का नजारा देखकर रह गया हैरान

जब वह व्यक्ति कमरे में पहुंचा, तो वहां उसके बेटे और रिश्तेदार के अलावा दो युवक, एक युवती और दो पुलिसकर्मी मौजूद थे।

पुलिसकर्मियों की ओर से बताया गया कि युवती ने उसके बेटे पर गंभीर आरोप लगाया था। मामला दर्ज न कराने के बदले एक लाख रुपये देने की बात कही जा रही थी।

परिवार के सदस्य को पूरा घटनाक्रम संदिग्ध लगा। उसने तुरंत पैसे देने के बजाय वहां से निकलने का फैसला किया। बाहर आने के बाद वह सीधे जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पास पहुंचा और पूरी जानकारी दी।

वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची शिकायत तो शुरू हुई कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच के निर्देश दिए। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए युवती और उसके दोनों कथित साथियों को हिरासत में ले लिया था।

वहीं, मौके पर मौजूद दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई थी। उन्हें तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन भेज दिया गया था और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई थी।

मोबाइल फोन ने सामने रखी साजिश की कड़ियां

जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल साक्ष्य कब्जे में लिए गए थे। सोशल मीडिया पर हुई बातचीत, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सामग्री की पड़ताल की गई।

पुलिस को शक था कि यह कोई अचानक हुआ विवाद नहीं, बल्कि पहले से तय तरीके से चलाया जा रहा खेल था। कथित तौर पर पहले दोस्ती की जाती, फिर मिलने के लिए बुलाया जाता और उसके बाद गंभीर आरोप लगाकर युवक को डराया जाता था।

क्या इस जाल में पहले भी फंस चुके थे कई युवक?

जांच के दौरान पुलिस को आशंका हुई थी कि इस कथित गिरोह ने इससे पहले भी दूसरे युवकों को निशाना बनाया हो सकता था। बदनामी और सामाजिक दबाव के डर से कुछ लोग शिकायत करने से बच गए हों, इस संभावना से भी इनकार नहीं किया गया था।

इसी कारण पुलिस ने लोगों से अपील की थी कि यदि किसी के साथ इस तरह की कथित ब्लैकमेलिंग हुई हो, तो वह बिना डर के शिकायत दर्ज कराए।

भरोसे के नाम पर बिछाया गया था जाल

इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए थे। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सावधानी बरतना जरूरी है, लेकिन किसी पर झूठे आरोप लगाने या कानून का ड

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