
लखनऊ, अमृत विचार : सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल मरीजों की जान बचाने की दिशा में केजीएमयू के डॉक्टरों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दुर्घटना के बाद शरीर के अंदर होने वाले रक्तस्राव का शुरुआती स्तर पर पता लगाने के लिए डॉक्टरों ने एक पोर्टेबल, स्क्रीनफ्री और हाथ से संचालित होने वाली डिवाइस विकसित की है। यह तकनीक गोल्डन ऑवर में मरीज की गंभीर स्थिति की पहचान कर समय पर इलाज शुरू करने में मददगार साबित होगी।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस एवं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज सिंह और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमिया अग्रवाल ने इस डिवाइस को विकसित किया है। इसका उद्देश्य उन अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी आंतरिक रक्तस्राव की पहचान करना है, जहां अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि यह डिवाइस शरीर के अंदर मौजूद तरल पदार्थों की जांच करती है। यदि पेट में खून या किसी असामान्य तरल के जमा होने के संकेत मिलते हैं तो यह तुरंत इसकी जानकारी देती है। इससे डॉक्टरों को बिना समय गंवाए यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मरीज के शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव हो रहा है या नहीं।
उन्होंने बताया कि यह उपकरण बिजली और बैटरी दोनों से संचालित किया जा सकता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि सामान्य प्रशिक्षण के बाद एम्बुलेंस चालक, पैरामेडिक्स और आपातकालीन स्वास्थ्यकर्मी भी इसका उपयोग कर सकेंगे। इसके संचालन के लिए न तो स्क्रीन की जरूरत होगी और न ही किसी विशेष विशेषज्ञ ऑपरेटर की। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आसानी से किया जा सकेगा।
डॉ. प्रेमराज सिंह ने कहा कि बाहरी चोटों से होने वाला रक्तस्राव दिखाई दे जाता है, लेकिन शरीर के अंदर होने वाली ब्लीडिंग का समय पर पता न चलने से मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। यह डिवाइस गंभीर मरीजों की जल्द पहचान कर उन्हें समय रहते उच्च स्तरीय ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचाने में मदद करेगी। साथ ही इलाज के दौरान रक्तस्राव की स्थिति पर नजर रखने में भी उपयोगी होगी।
डॉ. अमिया अग्रवाल ने बताया कि अभी तक पेट के अंदर रक्तस्राव का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड जांच की जाती थी, जिसके लिए मशीन और प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट की आवश्यकता होती है। नई डिवाइस में इस तरह की विशेषज्ञता की जरूरत नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि इस स्वदेशी तकनीक के डिजाइन का पेटेंट आवेदन किया जा चुका है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद यह डिवाइस देश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकती है और सड़क हादसों में घायल हजारों मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है।
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