मंगलवार के इंट्राडे सेशन में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी मजबूत होकर 94.87 पर पहुंच गया, जो पिछले एक महीने में इसका सबसे ऊंचा स्तर है. घरेलू करेंसी 95 प्रति डॉलर के स्तर पर खुली, फिर इस स्तर को पार किया और जल्द ही 94 के दायरे में आ गई. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, करेंसी मार्केट के ट्रेडर्स का कहना है कि ऐसा लोकल स्पॉट मार्केट खुलने से पहले RBI द्वारा डॉलर की संभावित बिक्री के कारण हुआ है.

रुपए में क्यों आई मजबूती?
करेंसी में यह मजबूती भारत की पहली तिमाही की GDP में हुई बड़ी बढ़ोतरी के बाद आई है. अप्रैलजून तिमाही में ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा 7.8 फीसदी रही. इसने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और प्राइवेट अनुमानों, दोनों को पीछे छोड़ दिया. इसके साथ ही, MSCI से जुड़े इनफ्लो और फिस्कल स्लिपेज के नियंत्रण में रहने से भी घरेलू करेंसी को सहारा मिला.
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेज़री हेड अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि कुल मिलाकर, तेल की ऊंची कीमतों और मजबूत डॉलर जैसे प्रतिकूल बाहरी माहौल के बावजूद, मजबूत घरेलू ग्रोथ, फिस्कल स्लिपेज पर नियंत्रण, RBI का समर्थन और पोर्टफोलियो से जुड़े इनफ्लो ने रुपए को अगस्त के आखिर में मजबूती के साथ बंद होने में मदद की. सोमवार को, भारतीय रुपया दक्षिण कोरियाई वॉन और जापानी येन के बाद तीसरी सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली एशियाई करेंसी थी.
डॉलर इंडेक्स में मामूली सुधार
दिन के दौरान डॉलर इंडेक्स 0.07 फीसदी बढ़कर 99.47 पर रहा. हालांकि, पिछले महीने में इस इंडेक्स में 0.54 फीसदी की गिरावट आई है. यह इंडेक्स छह अन्य करेंसी की बास्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है. कमजोर डॉलर विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों की करेंसी को अधिक आकर्षक बनाता है.
घरेलू इक्विटी में बढ़त
मंगलवार के इंट्राडे कारोबार में घरेलू बाजार बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे. सेंसेक्स 206.95 अंक या 0.27 फीसदी बढ़कर 77,165.73 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 0.15 फीसदी बढ़कर 24,118.35 पर रहा. इक्विटी बाजारों में बढ़त का करेंसी पर सकारात्मक असर पड़ता है. FPIs लगातार दो महीनों से नेट खरीदार बने हुए हैं विदेशी निवेशकों ने लगातार दो महीनों तक घरेलू इक्विटी की नेट खरीदारी की है. उन्होंने अगस्त में 29,631 करोड़ रुपए और जुलाई में 20,200 करोड़ रुपए की इक्विटी भारतीय प्राइमरी मार्केट से खरीदी. हालांकि, साल की शुरुआत से अब तक के आंकड़ों को देखें तो FPIs नेट सेलर बने हुए हैं. उन्होंने घरेलू मार्केट से 2.24 लाख करोड़ रुपए निकाले हैं, जो पिछले साल के 1.66 लाख करोड़ रुपये के आउटफ्लो से ज्यादा है.



