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ISI के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़, आतंकी मोहम्मद जफर गिरफ्तार; 14 राज्यों से दबोचे गए 200 से अधिक ऑपरेटिव्स

मेरठ : स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और खूंखार आतंकी संगठन जैशएमोहम्मद की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। यूपी एटीएस ने जैशएमोहम्मद से जुड़े एक अहम आतंकी मोहम्मद जफर को गिरफ्तार कर उसके खतरनाक मंसूबों पर पानी फेर दिया है। इस बड़ी कामयाबी के बाद खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर मोदी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की सराहना की और सुरक्षाबलों के इस सफल ऑपरेशन की जानकारी दी।

14 राज्यों में ऑपरेशन, 200 से ज्यादा ऑपरेटिव्स गिरफ्तार
गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ने आईएसआई का सहयोग करने वाले पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने बताया कि भारतीय सुरक्षाबलों ने 14 राज्यों में एक साथ सघन अभियान चलाते हुए 200 से अधिक स्लीपर सेल और ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया है, जिससे देश पर होने वाले खतरनाक हमलों की साजिश नाकाम हो गई। अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अब तक शहजाद भट्टी और सरफराज डोगरा के गिरोह से जुड़े 16 संदिग्ध आतंकियों को पकड़ा जा चुका है, जिनका सीधा कनेक्शन मेरठ और आसपास के जिलों से पाया गया है।

वेस्ट यूपी बना आतंकियों का नया ठिकाना? हापुड़ से लेकर सहारनपुर तक फैली थी जड़ें
मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश पाकिस्तानी गैंगस्टरों और आतंकी संगठनों के निशाने पर है। पिछले सात महीनों में एटीएस और सिविल पुलिस ने हापुड़, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से कुल 16 संदिग्ध आतंकियों को दबोचा है। चौंकाने वाली बात यह है कि उमर, आजाद राजपूत और तुषार चौहान जैसे कई स्थानीय युवक इन आतंकियों के झांसे में आकर उनके लिए काम कर रहे थे। यहां तक कि तुषार चौहान ने तो अपना धर्म बदलकर मुस्लिम नाम भी रख लिया था। एटीएस को शक है कि जफर की गिरफ्तारी के बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं है और कई अन्य युवक इस नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।

मदरसे से जुड़ा कनेक्शन, चंदा वसूल कर जैश को भेजता था जफर
जांच में यह बात सामने आई है कि आतंकी मोहम्मद जफर का सीधा कनेक्शन बुलंदशहर के एक मदरसे से है। इसी मदरसे के एक परिचित ने साल 2017 में जफर को पढ़ाई के नाम पर मेरठ बुलाया था। एटीएस ने जफर को दो दिन पहले हापुड़ के शेरपुर स्थित एक मस्जिद से पकड़ा था, लेकिन पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया था। हालांकि, जांच एजेंसी ने उसके सभी उर्दू दस्तावेज जब्त कर लिए थे। जब उर्दू अनुवादक से इन दस्तावेजों को पढ़वाया गया, तो जफर की असलियत सामने आई। वह जैशएमोहम्मद के लिए बाकायदा चंदा इकट्ठा कर संगठन को भेज रहा था, जिसके बाद एटीएस ने उसे दोबारा दबोच लिया।

पाकिस्तान जाने की थी तैयारी, मसूद अजहर से मीटिंग फिक्स!
बिहार का मूल निवासी मोहम्मद जफर आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर से काफी प्रभावित था और उसके मंसूबे बेहद खतरनाक थे। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि जफर ने बिहार के पते से अपना पासपोर्ट भी बनवा लिया था और वह जल्द ही पाकिस्तान भागने की फिराक में था। चौंकाने वाली बात यह है कि उसने जैशएमोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर से अपनी मीटिंग तक फिक्स कर ली थी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जफर वेस्ट यूपी में किसी बड़े धमाके की साजिश रच रहा था। फिलहाल एटीएस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि जफर के नेटवर्क में और कौनकौन शामिल है। लखनऊ से जेल भेजे जाने के बाद अब जफर का पासपोर्ट रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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