
लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रक्षाबंधन से पहले महिला कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला लिया था, जिसे आज यानी 2 सितम्बर से लागू कर दिया गया है। अब सरकार ने 2 साल की मातृत्व अवकाश की बाध्यता को समाप्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश शासन के वित्त अनुभाग2 ने आज यानी 2 सितंबर को इससे संबंधित आदेश भी जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत राज्य की महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश नियमावली में किया गया संशोधन आज से लागू हो गया है।
आदेश
दरअसल, महिला कर्मचारियों को उनके पूरे सेवाकाल में अधिकतम दो बार मातृत्व अवकाश की अनुमति थी, लेकिन इसमें एक शर्त भी शामिल थी, उसी शर्त को अब समाप्त कर दिया गया है। शर्त यह थी कि महिला कर्मचारी को दूसरा मातृत्व अवकाश दो साल बाद ही मिलेगा। यानी कि पहले मातृत्व अवकाश लेने के बाद दो साल बाद ही दोबारा मातृत्व अवकाश महिला कर्मचारी को मिल सकता था।
यह हुआ बदलाव
अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की तरफ से जारी इस आदेश में कहा गया है कि मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के नियम27 के तहत यूपी सरकार ने दो वर्ष के अंतराल वाली इस शर्त को पूरी तरह हटा दिया है। जिससे महिला कर्मचारियों को इस समयसीमा के कारण आ रही व्यावहारिक और चिकित्सा संबंधी कठिनाइयों से निजात मिलेगी। मातृत्व अवकाश के लिए दो वर्ष के अंतराल वाली शर्त समाप्त होने के बाद अब महिलायें जरूरत पड़ने पर पहले भी अवकाश ले सकेंगी।
आज से ही लागू होगा यह नियम
शासनादेश में यह भी कहा गया है कि इस संशोधन को राज्यपाल ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। जिसके बाद अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की तरफ से जारी यह आदेश आज 2 सितंबर 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा।
सरकार का यह कदम स्वागत योग्य
केजीएमयू नर्सेज एसोसिएशन के संरक्षक और डिप्टी नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट प्रदीप गंगवार ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय महिला सरकारी कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण और स्वागतयोग्य कदम है। प्रसूति अवकाश के बीच अनिवार्य दो वर्ष की प्रतीक्षा अवधि समाप्त होने से महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे मातृत्व एवं पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन में उन्हें अधिक सुविधा और सहयोग मिलेगा। यह निर्णय मातृत्व के सम्मान तथा महिला हितैषी कार्यपरिवेश को और मजबूत करेगा। निश्चित रूप से यह उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनशील एवं महिला कल्याणकारी सोच को दर्शाता है। मुख्यतः वह महिला कर्मी जिनका वैवाहिक जीवन अपनी प्रोफेशनल एवं करियर संबंधी कारणों के चलते देर से शुरू हुआ है और उनमें दो बच्चों के बीच लंबा अंतराल रखना उम्र के लिहाज़ से संभव नहीं है। ऐसी महिला कर्मियों को उक्त बाध्यता के हटने से निश्चित ही लाभ प्राप्त होगा।

