
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें हर मोर्चे पर विफल बताया। उन्होंने नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, बेरोजगारी और नकली खाद-बीज मामलों को लेकर सरकार को घेरा। जूली ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए भ्रष्टाचार व जवाबदेही पर सवाल उठाए।
अलवर। राजस्थान में विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार हर स्तर पर विफल साबित हुई है। जूली ने शनिवार को अलवर में कहा कि देश में माफिया राज को बढ़ावा मिल रहा है। परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने नीट-2026 सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि लाखों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
जूली ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा तैयार करने और संचालन से जुड़े लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, ऐसे में पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। केंद्र सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजाक बनाकर रख दिया है और सीबीएसई सहित कई परीक्षाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए जूली ने कहा कि सरकारी विद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। हजारों शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जबकि निजी शिक्षण संस्थानों की फीस हर वर्ष बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी विद्यालयों में अभिभावकों से मनमानी वसूली की जा रही है और विद्यार्थियों को महंगी कोचिंग एवं निजी संस्थानों पर निर्भर होना पड़ रहा है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के मुद्दे को उठाते हुए जूली ने कहा कि पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताएं और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार सृजन के बजाय केवल आंकड़ों का खेल खेल रही है। राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए जूली ने कहा कि राज्य सरकार में अनुशासन और जवाबदेही समाप्त हो चुकी है। सरकार एक तबेला बन गई है, जहां मंत्री ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) कार्यालय पहुंचकर जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मंत्री खुद अपनी ही सरकार की एजेंसियों पर भरोसा नहीं कर रहे तो आम जनता कैसे विश्वास करेगी।



