भारत में निजी क्षेत्र के निवेश को लेकर लंबे समय से चल रही चिंताओं के बीच एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है. SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 202526 में प्राइवेट निवेश घोषणाएं बढ़कर 56 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई हैं, जो पिछले वित्त वर्ष के 37 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है. रिपोर्ट बताती है कि मैन्युफैक्चरिंग, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े निवेश प्रस्तावों के चलते देश में कैपेक्स की रफ्तार तेज हुई है.

SBI रिसर्च की इकोव्रैप रिपोर्ट के अनुसार FY26 में निजी क्षेत्र द्वारा घोषित निवेश प्रस्ताव 56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं. पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 37 लाख करोड़ रुपये था. निवेश घोषणाओं में यह उछाल दर्शाता है कि कंपनियां भविष्य की मांग और आर्थिक गतिविधियों को लेकर पहले से अधिक आशावादी नजर आ रही हैं.
कुल निवेश घोषणाओं में लगातार बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुल निवेश घोषणाओं का आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है. FY19 में जहां कुल निवेश घोषणाएं करीब 17 लाख करोड़ रुपये थीं. वहीं, FY26 में यह आंकड़ा बढ़कर 80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह ट्रेंड उद्योग जगत के बढ़ते भरोसे और आर्थिक गतिविधियों में सुधार का संकेत देता है.
मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर सबसे आगे
नए निवेश प्रस्तावों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है. FY26 की कुल निवेश घोषणाओं में इसकी हिस्सेदारी करीब 28.9 प्रतिशत रही. इसके बाद पावर सेक्टर का योगदान 28.7 प्रतिशत और बिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का योगदान 23.1 प्रतिशत रहा. इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश भविष्य में रोजगार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है.
GDP आंकड़ों से भी मिला निवेश बढ़ने का संकेत
रिपोर्ट में कहा गया है कि आधिकारिक GDP आंकड़े भी निवेश गतिविधियों में तेजी की पुष्टि करते हैं. खासतौर पर FY26 की चौथी तिमाही में निवेश की गति काफी मजबूत रही. अर्थव्यवस्था में निवेश का प्रमुख संकेतक माने जाने वाले ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में चौथी तिमाही के दौरान 10.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो मजबूत निवेश माहौल को दर्शाती है.
कंपनियां लगातार बढ़ा रही हैं उत्पादक संपत्तियां
SBI रिसर्च ने निवेश के एक अन्य महत्वपूर्ण संकेतक ग्रॉस ब्लॉक में हुई बढ़ोतरी पर भी प्रकाश डाला है. रिपोर्ट के अनुसार 5,000 से अधिक लिस्टेड भारतीय कंपनियों का कुल ग्रॉस ब्लॉक मार्च 2022 के 87 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 तक 145 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कंपनियां पिछले पांच वर्षों में हर साल औसतन 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक की उत्पादक संपत्तियां जोड़ रही हैं. इससे स्पष्ट होता है कि केवल निवेश घोषणाएं ही नहीं, बल्कि जमीन पर एसेट निर्माण और क्षमता विस्तार भी लगातार जारी है.
आर्थिक विकास को मिलेगा समर्थन
एक्सपर्ट का मानना है कि निजी क्षेत्र का बढ़ता पूंजीगत खर्च भारत की दीर्घकालिक आर्थिक बढ़ोतरी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. निवेश घोषणाओं में तेजी, उत्पादन क्षमता का विस्तार और लगातार बढ़ते कॉर्पोरेट एसेट्स यह संकेत देते हैं कि देश में निजी निवेश का नया चक्र मजबूत हो रहा है. आने वाले वर्षों में यह रुझान आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार को नई गति दे सकता है.



