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‘लड़के-लड़कियां भाग जाते हैं, फिर…’, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बयान पर छिड़ी बहस, जानें किसने क्या कहा

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एक ऐसी बात कह दी है, जिसको लेकर न सिर्फ वो सुर्खियों में हैं बल्कि सियासी बवाल भी शुरू हो गया है. दरअसल, आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को कहा कि कभीकभी लड़केलड़कियां भाग जाते हैं और फिर लड़कियां गर्भवती हो जाती हैं और उनके बच्चे हो जाते हैं. बाद में फिर न वो उसे अपनाते हैं और न उनका मायका. फिर सरकार उनकी जिम्मेदारी उठाती है. लखनऊ में एकेटीयू दीक्षांत समारोह में भाग लेने गईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्रछात्राओं से खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि आप सबका पराक्रम है. ऐसा पराक्रम न करिए.

‘लड़के-लड़कियां भाग जाते हैं, फिर…’, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बयान पर छिड़ी बहस, जानें किसने क्या कहा

राज्यपाल ने अपने बेटे के बारे में बताते हुए कहा, ‘मैंने अपने बेटे को बैंगलोर पढ़ने के लिए भेजा था. मैंने उससे कहा कि बैंगलोर की कोई लड़की पसंद हो तो बताना, शादी करा देंगे, पर उसने कोई पसंद ही नहीं किया. अगर आपने पसंद किया है तो पहले करियर बनाएं, आत्मनिर्भर बनें, फिर शादी करें. मैं लव मैरिज का विरोध नहीं करती, पर जो दशा हो रही महिलाओं की…पढ़ाई गई, जिम्मेदारी आई’.

राज्यपाल ने बताई प्रेरणादायक कहानी

आनंदीबेन पटेल ने एक बच्ची के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना का भी जिक्र किया है और कहा कि अगर हमारे अंदर करुणा होती तो ऐसी घटनाएं कभी होती ही नहीं. इस दौरान उन्होंने छात्रछात्राओं के सामने एक प्रेरणादायक कहानी भी शेयर की. उन्होंने बताया कि जन्म के तुरंत बाद एक नवजात बच्ची को उसके मातापिता बेसहारा छोड़कर चले गए थे. बाद में एक सब्जी बेचने वाले व्यक्ति ने उसे अपनाया, अपने परिवार की तरह पालापोसा और पढ़ायालिखाया. आज वही बच्ची आईएएस अधिकारी बन चुकी है. उन्होंने कहा कि ये दोनों घटनाएं समाज की दो अलगअलग तस्वीरें पेश करती हैं और हमें अपने मूल्यों और संवेदनाओं पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.

सपा सांसद ने राज्यपाल के बयान पर दी प्रतिक्रिया

वहीं, सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, ‘आनंदीबेन पटेल एक महिला हैं. हमारे उत्तर प्रदेश की राज्यपाल हैं. हमारी बच्चियों के खिलाफ इस तरीके से अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना उनके मुंह से अच्छा नहीं लगता है. समाज में बहुत ऐसे लोग हैं, जो बहुत अच्छे हैं और बहुत गलत भी हैं. तो हमें उदाहरण अपनी संस्कृति के अनुसार ऐसा पेश करना चाहिए, जो बच्चियों के लिए प्रेरणादायक हो. इसलिए हम उनकी बात का समर्थन नहीं करते हैं’.

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