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15 मिनट​​​ तक थम गई थीं सांसें, फिर लौटा 19 साल का युवक; होश आया तो सुनाई ऐसी कहानी कि सब रह गए हैरान

15 मिनट​​​ तक थम गई थीं सांसें, फिर लौटा 19 साल का युवक; होश आया तो सुनाई ऐसी कहानी कि सब रह गए हैरान

एक 19 साल के युवक के साथ हुआ एक अनुभव इन दिनों चर्चा में है। दावा है कि ड्रग्स के ओवरडोज के बाद उसकी सांसें करीब 15 मिनट तक रुकी रहीं। उसे बचाने के लिए उसके भाई ने सीपीआर दिया और डॉक्टरों की कोशिशों के बाद उसकी धड़कन दोबारा लौट आई। इसके बाद युवक ने जो अनुभव बताया, उसने लोगों को हैरान कर दिया।

मौत के बाद क्या होता है और क्या इंसान को उस दौरान कुछ महसूस होता है? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब जानने की उत्सुकता लोगों में हमेशा रही है। युवक के अनुभव की कहानी भी इन्हीं सवालों को लेकर चर्चा में आई है।

शरीर बेजान था, लेकिन क्या महसूस हो रहा था?

डेलीस्टार यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, युवक ड्रग्स के ओवरडोज का शिकार हुआ था। उसकी हालत गंभीर हो गई और उसे बचाने के लिए तत्काल प्रयास किए गए। भाई के सीपीआर देने और चिकित्सकीय मदद के बाद उसकी धड़कन वापस आई।

बताया गया है कि युवक कई सप्ताह तक कोमा में रहा। जब उसकी हालत में सुधार हुआ और उसे होश आया, तो उसने अपने अनुभव के बारे में बताया। उसके अनुसार, उसे न तो तेज सफेद रोशनी दिखाई दी और न ही स्वर्ग जैसा कोई दृश्य नजर आया।

दूसरी दुनिया नहीं, महसूस हुआ गहरा अंधेरा

युवक ने अपने अनुभव को गहरे अंधेरे और सन्नाटे जैसा बताया। उसके मुताबिक, उसे ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वह किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गया है। उसने यह भी बताया कि उस समय उसे अपने शरीर की स्थिति का स्पष्ट एहसास नहीं था।

इस तरह के अनुभवों को चिकित्सा जगत में मृत्यु-समीप अनुभव (Near-Death Experience) कहा जाता है। अलग-अलग लोगों के अनुभव अलग हो सकते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के अनुभव के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मृत्यु के बाद वास्तव में क्या होता है।

अनुभव के बाद बदल गई जिंदगी

रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना के बाद युवक ने नशे की आदतें छोड़ने का फैसला किया और जिंदगी को देखने का उसका नजरिया बदल गया। उसने बताया कि अब उसे मौत का पहले जैसा डर नहीं लगता।

चिकित्सकीय रूप से, सांस या दिल की धड़कन रुकने के बाद समय पर सीपीआर और आपातकालीन उपचार किसी की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति के अनुभव को समझने के लिए उसके चिकित्सकीय रिकॉर्ड और उपचार से जुड़ी जानकारी भी जरूरी होती है।

सत्या रिपोर्ट की टिप्पणी: यह खबर मीडिया रिपोर्ट में बताए गए युवक के अनुभव पर आधारित है। उसके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इस अनुभव को मृत्यु के बाद जीवन होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

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