देश में CNG कारों की मांग लगातार बढ़ रही है. इसके साथ ही CNG स्टेशनों पर कारों की कतार भी लंबी होती जा रही है. Nawgati ने इसी समस्या का समाधान किया है. Nawgati की शुरुआत साल 2019 में पेट्रोल पंप और CNG स्टेशनों पर लगने वाली लंबी कतारों की समस्या से हुई थी. कंपनी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , कंप्यूटर विजन और डेटा एनालिटिक्स की मदद से फ्यूल स्टेशनों का संचालन बेहतर बनाने पर काम कर रही है.

इसका उद्देश्य वाहन चालकों का समय बचाने के साथसाथ फ्यूल स्टेशन संचालकों को भी तकनीक के जरिए बेहतर सुविधाएं देना है. 2030 तक कंपनी हर फ्यूल स्टेशन को एक स्मार्ट मोबिलिटी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करना चाहती है. Nawgati के सफर, तकनीक, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं को लेकर Nawgati के कोफाउंडर और CEO वैभव कौशिक से TV9 भारतवर्ष ने खास बातचीत की. आइए पढ़ते हैं बातचीत के प्रमुख अंश…
सवाल 1: Nawgati की शुरुआत कैसे हुई? पेट्रोल पंप पर लंबा इंतजार करने की समस्या ने कंपनी बनाने का आइडिया कैसे आया?
जवाब: Nawgati की शुरुआत किसी मार्केट रिसर्च से नहीं, बल्कि एक रियल एक्सपीरियंस से हुई. साल 2019 में नोएडा में इंटर्नशिप के दौरान मैं रोजाना CNG से चलने वाली कैब में सफर करता था. इस दौरान कई ड्राइवरों ने बताया कि वे सड़क पर 10 घंटे काम करते हैं, लेकिन करीब एक घंटा CNG स्टेशन की कतारों में इंतजार करते हुए निकल जाता है. यानी उनकी रोजाना की कमाई का लगभग 10 फीसदी हिस्सा इस इंतजार से प्रभावित हो रहा था.
मुझे लगा कि इतनी आम समस्या का कोई न कोई समाधान जरूर होगा, लेकिन ऐसा नहीं था. यहीं से Nawgati का आइडिया आया. मुझे समझ आया कि यह सिर्फ एक ऐप बनाने का मौका नहीं, बल्कि एक ऐसी समस्या को हल करने का अवसर है, जिसका सामना रोजाना हजारों वाहन चालक करते हैं.
सवाल 2: पेट्रोल पंप पर ग्राहकों की रोजमर्रा की किन परेशानियों को देखकर आपको लगा कि तकनीक इनका समाधान कर सकती है?
जवाब: सबसे बड़ी समस्या ईंधन की कमी नहीं, बल्कि सही जानकारी का अभाव है. वाहन चालकों को पता नहीं होता कि किस पेट्रोल पंप या CNG स्टेशन पर कितनी भीड़ है, इंतजार में कितना समय लगेगा और किस स्टेशन पर जल्दी ईंधन मिल सकता है. ऐसे में वे एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक जाते हैं और इस दौरान उनका समय और ईंधन दोनों खर्च होते हैं.
मुझे लगा कि यह जानकारी और डेटा से जुड़ी समस्या है. तकनीक की मदद से लोगों को पहले ही यह जानकारी दी जा सकती है कि उन्हें किस स्टेशन पर जाना चाहिए. इसी सोच ने हमें एक ऐसे समाधान की दिशा में आगे बढ़ाया, जो वाहन चालकों को बेहतर फैसले लेने में मदद कर सके.
सवाल 3: Nawgati ने ग्राहकों की समस्या दूर करने वाले समाधान से फ्यूल रिटेल कंपनियों के लिए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म तक का सफर कैसे तय किया?
जवाब: शुरुआत में हमारा ध्यान ग्राहकों की एक खास परेशानी को दूर करने पर था. हालांकि, हमने शुरुआत से ही अपने तकनीकी ढांचे को इस तरह तैयार किया कि भविष्य में इसे अलगअलग तरह के ईंधन और जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सके. समय के साथ हमें समझ आया कि इस तकनीक का फायदा सिर्फ ग्राहकों तक सीमित नहीं है. फ्यूल स्टेशन संचालकों को भी अपने स्टेशन पर हो रही एक्टिविटी की रियल टाइम में जानकारी चाहिए. इसलिए हमने अपने प्लेटफॉर्म को दो हिस्सों में विकसित किया.
पहला हिस्सा ग्राहकों को कतारों, ईंधन की उपलब्धता और कीमतों की जानकारी देने पर केंद्रित है. दूसरा हिस्सा फ्यूल स्टेशन संचालकों को उनके कामकाज की निगरानी और संभावित समस्याओं का अनुमान लगाने में मदद करता है. इस तरह Nawgati एक साधारण ऐप से आगे बढ़कर ग्राहकों और कारोबारियों, दोनों के लिए तकनीकी प्लेटफॉर्म बन रही है.
सवाल 4: Nawgati AI, कंप्यूटर विजन और मौजूदा CCTV कैमरों की मदद से फ्यूल स्टेशनों को बेहतर कैसे बनाती है?
जवाब: हमारी कोशिश है कि फ्यूल स्टेशन संचालकों को नई मशीनों और उपकरणों पर अतिरिक्त पैसा खर्च न करना पड़े. इसके लिए हम वहां पहले से मौजूद CCTV कैमरों, फ्यूल डिस्पेंसर, कंप्रेसर, स्टोरेज और वाहन ट्रैकिंग सिस्टम से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल करते हैं.
कंप्यूटर विजन की मदद से यह समझने में सहायता मिलती है कि स्टेशन पर कितने वाहन कतार में खड़े हैं, उन्हें ईंधन देने में कितना समय लग रहा है और कहां भीड़ बढ़ रही है. इसके बाद AI और डेटा एनालिटिक्स की मदद से आने वाले समय में भीड़ बढ़ने की संभावना का अनुमान लगाया जा सकता है.
आसान शब्दों में कहें तो हम फ्यूल स्टेशन पर पहले से मौजूद कैमरों और उपकरणों को एक ऐसे डिजिटल डैशबोर्ड में बदलना चाहते हैं, जिससे संचालक अपने स्टेशन की स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकें और समय रहते जरूरी कदम उठा सकें.
सवाल 5: फ्यूल और मोबिलिटी जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में तकनीक लाने के दौरान स्टार्टअप्स को किन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
जवाब: सबसे बड़ी चुनौती भरोसा कायम करना है. पारंपरिक क्षेत्रों में कारोबारी केवल किसी नए विचार या तकनीक के वादे पर अपना काम करने का तरीका नहीं बदलते. उन्हें यह दिखाना पड़ता है कि तकनीक से वास्तव में समय बचेगा, कामकाज बेहतर होगा और कारोबार को फायदा मिलेगा.
इस वजह से नए समाधान अपनाने की प्रक्रिया में समय लगता है. हर स्टेशन पर जाकर तकनीक की उपयोगिता साबित करनी पड़ती है. दूसरी बड़ी चुनौती नई मशीनों और उपकरणों पर होने वाला खर्च है. अगर किसी समाधान को अपनाने के लिए कारोबारी को भारी निवेश करना पड़े, तो उसके बड़े स्तर पर इस्तेमाल की संभावना कम हो सकती है. इसीलिए Nawgati ने ऐसा मॉडल तैयार करने पर ध्यान दिया, जो मौजूदा बुनियादी ढांचे के साथ काम कर सके. इससे फ्यूल स्टेशन संचालकों के लिए तकनीक अपनाना आसान हो सकता है.
सवाल 6: ग्राहकों की एक परेशानी पहचानने से लेकर बड़ी कंपनियों के साथ काम करने तक के सफर ने आपको भारत में स्टार्टअप बनाने के बारे में क्या सिखाया?
जवाब: इस सफर ने मुझे सिखाया कि भारत में लंबे समय तक चलने वाले कारोबार अक्सर उन समस्याओं का समाधान करते हैं, जो व्यवस्था का स्थायी हिस्सा होती हैं. शुरुआत में हमें लगा था कि CNG स्टेशनों पर लगने वाली कतारें एक सीमित समस्या हैं, लेकिन आगे चलकर समझ आया कि फ्यूल रिटेल क्षेत्र में सही जानकारी और डेटा की कमी एक बड़ी चुनौती है.
यही समझ हमें एक शहर और एक तरह के ईंधन से आगे बढ़ने का अवसर देती है. इसके साथ ही मैंने सीखा कि भारत में बड़े कारोबारियों का भरोसा केवल प्रेजेंटेशन या बिजनेस प्लान से नहीं जीता जा सकता. इसके लिए जमीन पर काम करके दिखाना और वास्तविक परिणाम देना जरूरी है.
सवाल 7: साल 2030 तक भारत के मोबिलिटी और फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर में किस तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं?
जवाब: मुझे उम्मीद है कि 2030 तक भारत का मोबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर आज के मुकाबले काफी ज्यादा डिजिटल और आपस में जुड़ा हुआ होगा. फ्यूल स्टेशन केवल पेट्रोल, डीजल या CNG भरने की जगह नहीं रहेंगे. वहां इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग और ऊर्जा के दूसरे विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं.
ऐसे स्टेशन अलगअलग तरह की ऊर्जा उपलब्ध कराने वाले मल्टीएनर्जी हब के रूप में विकसित हो सकते हैं. इनके संचालन में AI और डेटा की भूमिका भी बढ़ेगी. स्टेशन संचालक और वाहन बेड़े चलाने वाली कंपनियां केवल मैनुअल निगरानी पर निर्भर रहने के बजाय रियलटाइम जानकारी के आधार पर फैसले ले सकेंगी.
मेरा मानना है कि भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर भले ही जमीन पर मौजूद रहेगा, लेकिन उसके संचालन के पीछे डिजिटल तकनीक की अहम भूमिका होगी.
सवाल 8: Nawgati का बड़ा विजन क्या है? आप भविष्य में भारतीय ग्राहकों के लिए कैसा मोबिलिटी अनुभव तैयार करना चाहते हैं?
जवाब: हमारा बड़ा लक्ष्य हर फ्यूल स्टेशन को एक कनेक्टेड मोबिलिटी हब बनाना है. यानी स्टेशन सिर्फ ईंधन भरने की जगह न रहे, बल्कि ग्राहकों, फ्यूल रिटेल कारोबारियों और वाहन बेड़े संचालकों को जरूरी जानकारी भी उपलब्ध कराए.
हम चाहते हैं कि ग्राहकों को ईंधन भरवाने के लिए घर से निकलने से पहले ही पता हो कि उन्हें किस स्टेशन पर जाना चाहिए, वहां कितना इंतजार करना पड़ सकता है और ईंधन की कीमत क्या है. इससे वे अपने समय और खर्च की बेहतर योजना बना सकेंगे.
जैसेजैसे भारत में इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा के दूसरे विकल्प बढ़ेंगे, हम इसी सुविधा को अलगअलग ऊर्जा स्रोतों तक पहुंचाना चाहते हैं. हमारा उद्देश्य ऐसा अनुभव तैयार करना है, जिसमें वाहन चाहे किसी भी तरह के ईंधन या ऊर्जा से चलता हो, उसे चलाने के लिए जरूरी ऊर्जा हासिल करना आसान और सुविधाजनक हो.



