GajabIndiaTrending

भारत में​​​ उम्मीदवार को वोट, इजरायल में पार्टी को! चुनाव का यह नियम जानकर चौंक जाएंगे

भारत में​​​ उम्मीदवार को वोट, इजरायल में पार्टी को! चुनाव का यह नियम जानकर चौंक जाएंगे

इजरायल: दुनिया के अलग-अलग देशों में चुनाव कराने के तरीके अलग-अलग हैं। भारत में मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार चुनते हैं, जबकि इजरायल में राष्ट्रीय चुनाव के दौरान लोग सीधे राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। इसी वजह से वहां संसद में सीटों का बंटवारा और सरकार बनाने की प्रक्रिया भारत से काफी अलग है।

इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। आइए समझते हैं कि इजरायल में चुनाव कैसे होते हैं और इसकी तुलना भारत की चुनाव प्रणाली से करने पर क्या अंतर सामने आता है।

इजरायल में पूरे देश में कैसे होता है मतदान?

इजरायल में राष्ट्रीय संसदीय चुनाव के लिए पूरे देश को एक ही निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है। भारत की तरह अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों से उम्मीदवार चुनने के बजाय मतदाता अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं।

मतदान के दौरान मतदाता गुप्त रूप से पार्टी के चुनाव चिह्न या पहचान वाली पर्ची चुनते हैं। इसके बाद पर्ची को लिफाफे में रखकर मतपेटी में डाल दिया जाता है। यानी यहां राष्ट्रीय चुनाव में मतदान कागज की पर्चियों के जरिए होता है।

संसद में कितनी सीटें और बहुमत का क्या नियम है?

इजरायल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में 120 सीटें हैं। किसी पार्टी को संसद में प्रतिनिधित्व पाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कुल वैध मतों का कम से कम 3.25 प्रतिशत हासिल करना होता है। इसे इलेक्टोरल थ्रेशोल्ड कहा जाता है।

सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। इजरायल की आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली में पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात के आधार पर सीटें आवंटित होती हैं। इसलिए अक्सर किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिलता और कई दलों को मिलकर गठबंधन सरकार बनानी पड़ती है।

भारत और इजरायल की चुनाव प्रणाली में सबसे बड़ा अंतर

भारत और इजरायल, दोनों लोकतांत्रिक देश हैं, लेकिन राष्ट्रीय संसद के चुनावों में इनकी व्यवस्थाएं अलग हैं।

भारत में लोकसभा चुनाव के दौरान देश को अलग-अलग संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा जाता है। हर क्षेत्र से उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं और मतदाता उनमें से किसी एक को वोट देते हैं। सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार उस सीट पर जीतता है।

इजरायल में राष्ट्रीय चुनाव के लिए पूरा देश एक निर्वाचन क्षेत्र होता है। मतदाता पार्टी को वोट देते हैं और पार्टियों को मिले मतों के अनुपात में संसद की सीटें मिलती हैं। इसलिए वहां चुनाव के बाद गठबंधन बनाना सरकार गठन का अहम हिस्सा होता है।

एक अन्य अंतर मतदान के तरीके का है। भारत में लोकसभा चुनाव में सामान्यतः इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल होता है, जबकि इजरायल में राष्ट्रीय संसदीय चुनाव में कागज की पर्चियों से मतदान किया जाता है।

इजरायल में सरकार कैसे बनती है?

मतगणना और आधिकारिक परिणाम आने के बाद सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है। इजरायल के राष्ट्रपति राजनीतिक दलों के नेताओं से विचार-विमर्श करते हैं और उस नेता को सरकार बनाने का अवसर देते हैं, जिसके पास संसद में बहुमत जुटाने की सबसे अच्छी संभावना हो।

इसके बाद संबंधित नेता को दूसरे दलों के साथ बातचीत करके कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जुटाना होता है। यदि कोई दल या गठबंधन बहुमत हासिल कर लेता है, तो नई सरकार बन सकती है। इस प्रक्रिया में छोटे दल भी अहम भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि उनके समर्थन से बहुमत का आंकड़ा पूरा हो सकता है।

भारत में भी गठबंधन सरकार बन सकती है, लेकिन वहां लोकसभा सीटें अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की जीत के आधार पर तय होती हैं। इजरायल में पार्टी को मिले राष्ट्रीय मतों का अनुपात सीधे सीटों के बंटवारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इजरायल के चुनाव में किन मुद्दों की रहती है अहम भूमिका?

इजरायल में चुनाव के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, सेना में अनिवार्य सेवा और धार्मिक-सामाजिक नीतियां प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं। क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम भी मतदाताओं की प्राथमिकताओं को प्रभावित करते हैं।

हालांकि, चुनावी सर्वेक्षण केवल मतदाताओं के संभावित रुझान बताते हैं। वास्तविक सीटों का बंटवारा आधिकारिक मतगणना के बाद ही स्पष्ट होता है।

भारत और इजरायल की चुनाव व्यवस्था क्यों है अलग?

दोनों देशों की राजनीतिक व्यवस्था और चुनावी परंपराएं अलग हैं। भारत में भौगोलिक निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर प्रतिनिधि चुने जाते हैं, जबकि इजरायल में राष्ट्रीय स्तर पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू है। भारत में भी गठबंधन सरकारें बनती हैं, लेकिन इजरायल में संसद की सीटों का बंटवारा कई पार्टियों के बीच होने के कारण गठबंधन की भूमिका अक्सर और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।

सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख चुनाव प्रणालियों की सामान्य जानकारी के लिए तैयार किया गया है। किसी विशिष्ट चुनाव की तारीख, सर्वेक्षण या संभावित सीटों से संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक चुनावी घोषणाओं और नवीनतम विश्वसनीय स्रोतों की पुष्टि करें।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply