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​बच्चों में क्या होते हैं प्रदूषण के खतरनाक लक्षण, कैसे करें बचाव, डॉक्टर से जानें

बच्चों को वायु प्रदूषण से बचाना बहुत जरूरी है, क्योंकि इस उम्र में उनके फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं. हो सकता है कि बच्चा बिल्कुल स्वस्थ दिखे, सामान्य रूप से खेलेकूदे और उसे खांसी या सांस लेने में कोई परेशानी न हो. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्रदूषण का उसके फेफड़ों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है. हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बेहद बारीक कण सांस के जरिए फेफड़ों के अंदर तक पहुंचकर सूजन पैदा कर सकते हैं. कई बार इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता.

​बच्चों में क्या होते हैं प्रदूषण के खतरनाक लक्षण, कैसे करें बचाव, डॉक्टर से जानें

बच्चों पर प्रदूषण का असर ज्यादा हो सकता है, क्योंकि वे बड़ों के मुकाबले अपने शरीर के आकार के हिसाब से तेजी से सांस लेते हैं. साथ ही, खेलते और दौड़ते समय वे ज्यादा हवा अंदर लेते हैं, जिससे प्रदूषण के संपर्क में आने की मात्रा बढ़ सकती है.

लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों का विकास प्रभावित हो सकता है, उनकी काम करने की क्षमता कम हो सकती है और अस्थमा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. जिन बच्चों को पहले से अस्थमा या एलर्जी है, उनकी परेशानी भी बढ़ सकती है.

बच्चों को प्रदूषण से ऐसे बचाएं

डॉ. निखिल राजवंशी बताते हैं कि मातापिता को रोजाना अपने इलाके का AQI देखना चाहिए. जब प्रदूषण ज्यादा हो, तो बच्चों को बाहर तेज दौड़ने, खेलने या एक्सरसाइज करने से बचाएं. घर के अंदर भी सिगरेट के धुएं, अगरबत्ती और दूसरे ऐसे स्रोतों से बचें, जो हवा को प्रदूषित करते हैं.

जरूरत के हिसाब से सही एयर प्यूरीफायर, जिसमें HEPA फिल्टर हो, इस्तेमाल करने से घर के अंदर हवा में मौजूद बारीक कणों को कम करने में मदद मिल सकती है.

ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर के पास जाएं

बच्चों में लगातार खांसी, रात में खांसी बढ़ना, सांस लेते समय घरघराहट या खेलते समय सांस फूलने जैसे लक्षणों पर ध्यान दें. अगर ऐसी परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लें. सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चों में लक्षण दिखाई देने का इंतजार न करें. प्रदूषण बढ़ने पर पहले से सावधानी बरतना उनके फेफड़ों की सेहत की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है.

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