Kalpi advocate murder: उत्तर प्रदेश में जालौन के कालपी बार संघ के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की अपहरण के बाद निर्मम हत्या कर दी गई. शनिवार शाम कार सवार लोगों ने उन्हें कानपुरझांसी हाईवे स्थित दुर्गा मंदिर चौराहे से अगवा कर लिया था. पूरी रात तलाश के बाद रविवार सुबह उनका शव कानपुर में गुजैनी पार्क के पास बरामद हुआ. घटना की जानकारी मिलते ही अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश फैल गया. पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. शुरुआती जांच में जमीन संबंधी पुरानी रंजिश को वारदात की वजह माना जा रहा है.

जानकारी के अनुसार, कालपी कोतवाली क्षेत्र के कागजीपुरा निवासी 65 वर्षीय गयादीन अहिरवार शनिवार को मुकदमों की पैरवी के सिलसिले में उरई न्यायालय आए थे. दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उन्होंने अपने बेटे हर्ष को फोन कर मुन्ना फुल पावर चौराहे से लेने के लिए कहा. उन्होंने बताया कि दुर्गा मंदिर के पास एक मुवक्किल से मुकदमे की फाइल लेनी है. बेटा उन्हें स्कूटी से लेकर दुर्गा मंदिर पहुंचा, जहां पहले से सफेद रंग की डिजायर कार खड़ी थी. कार की पीछे की नंबर प्लेट नहीं थी और उसमें तीन लोग सवार थे.
बेटे ने कही ये बात?
बेटे हर्ष के मुताबिक, कार से उतरे दो लोगों ने गयादीन को चाचा कहकर संबोधित किया और चायनाश्ता करने के बाद फाइल देने की बात कही. इसके बाद वे उन्हें अपनी कार में बैठाकर आलमपुर चौराहे की तरफ हाईवे पर निकल गए. बेटा काफी दूर तक स्कूटी से कार के पीछे गया, लेकिन कार तेज गति से आगे निकल गई. घर लौटने के बाद जब काफी देर तक पिता नहीं पहुंचे तो फोन किया, लेकिन उनका मोबाइल बंद मिला. जिस नंबर से उन्हें फोन आया था, वह भी बंद हो गया. इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी.
एसपी ने बताया कि तत्काल तलाश शुरू कर टीमें गठित की. रातभर खोजबीन के बाद रविवार सुबह कानपुर में उनका शव मिलने की सूचना मिली. एसपी सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. वारदात में प्रयुक्त कार और हथियारों की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं. पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है.
चौथी बार बने थे अध्यक्ष
गयादीन अहिरवार कालपी बार संघ के प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में शामिल थे. वर्ष 1981 से वह सिविल और आपराधिक मामलों की पैरवी कर रहे थे. आठ मई 2026 को हुए चुनाव में उन्होंने चौथी बार बार संघ अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की थी. परिवार में पत्नी राजेश्वरी , तीन बेटे और दो बेटियां हैं. बड़ा बेटा सौरभ लखनऊ में नौकरी करता है, जबकि हर्ष मित्रा कालपी में रहता है. एक बेटे गौरव मित्रा की 31 अक्टूबर 2025 को मृत्यु हो चुकी है. बेटियों में संघ मित्रा और मणि मित्रा शामिल हैं.
जमीन को लेकर चल रहा था विवाद
साथी अधिवक्ता सतीश निषाद के अनुसार, वर्ष 2000 से गयादीन अहिरवार और अपर्णा नाम की महिला के बीच जमीन को लेकर कानूनी विवाद चल रहा था. इससे संबंधित मुकदमे कालपी सिविल कोर्ट और उरई चकबंदी न्यायालय में विचाराधीन थे. एक मुकदमे में अपर्णा के पक्ष में फैसला आने के बाद गयादीन ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी. वहां निचली अदालत का आदेश निरस्त कर मामला दोबारा सुनवाई के लिए कालपी सिविल कोर्ट भेज दिया गया था.
इसी बीच अपर्णा ने विवादित भूमि मैनपुरी निवासी इंद्रजीत यादव को बेच दी. इसकी जानकारी न्यायालय को दिए जाने के बाद गयादीन को जमीन पर स्थगन आदेश मिल गया. विवाद कालपी तहसील के कदौरा क्षेत्र के मौजा हासा स्थित गाटा संख्या 565, 566 और 576 की लगभग चार हेक्टेयर भूमि को लेकर था. अधिवक्ता सतीश के मुताबिक, इंद्रजीत सिंह यादव ने कालपी बार संघ अध्यक्ष होने के चलते निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होने की आशंका जताकर मुकदमा दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी. इसके बाद मामला कालपी से उरई न्यायालय स्थानांतरित कर दिया गया था.
11 नवंबर को होनी थी सुनवाई
सतीश निषाद ने बताया कि गयादीन ने तीन अक्टूबर को इंद्रजीत, उसकी पत्नी सविता यादव समेत कई लोगों के खिलाफ एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था. इसमें मारपीट का आरोप लगाया गया था. इस मामले में 31 अक्टूबर को उरई न्यायालय में सुनवाई हुई थी. सुनवाई के बाद अदालत ने आदेश के लिए 11 नवंबर की तारीख निर्धारित की थी. इसी तारीख पर पेशी के बाद वह कालपी लौट रहे थे, तभी उन्हें अगवा कर लिया गया.
आंदोलन की चेतावनी
बार काउंसिल के उपाध्यक्ष अनुराग पांडेय ने बार संघ अध्यक्ष की हत्या को बेहद दुखद और निंदनीय बताया. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर हत्याकांड का खुलासा कर दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो अधिवक्ता समुदाय आंदोलन के लिए बाध्य होगा. घटना के बाद जिले के अधिवक्ताओं में गहरा आक्रोश है और सभी ने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है.



